वरुण गांधी का ब्लॉगः हर क्षेत्र में बेलगाम होती महंगाई पर लगाम लगाना जरूरी

By वरुण गांधी | Published: November 25, 2022 02:19 PM2022-11-25T14:19:07+5:302022-11-25T14:19:26+5:30

आटे की कीमत जून 2016 में 24.56 रुपए प्रति किलो थी, जो मार्च 2022 में 29 फीसदी बढ़ोत्तरी के साथ 31.68 रुपए हो गई। खुदरा मुद्रास्फीति आरबीआई के 2-6 फीसदी के टॉलरेंस बैंड से आगे निकलते हुए अक्तूबर, 2022 में 5 महीने के उच्च स्तर 7.41 फीसदी पर पहुंच गई है।

Varun Gandhi's blog It is necessary to control the rampant inflation in every sector | वरुण गांधी का ब्लॉगः हर क्षेत्र में बेलगाम होती महंगाई पर लगाम लगाना जरूरी

वरुण गांधी का ब्लॉगः हर क्षेत्र में बेलगाम होती महंगाई पर लगाम लगाना जरूरी

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भारत के औसत शहरी परिवार के लिए हफ्ते की बुनियादी किराने की खरीद लागत पिछले एक दशक में 68 फीसदी बढ़ी है. हाल में मुंबई और दिल्ली जैसे महानगरों में सब्जियों की कीमत अक्तूबर में बढ़कर 120-140 रुपए प्रति किलो हो गई। यह कीमत इससे पहले के महीने में 60-80 रुपए प्रति किलो थी। आटे की कीमत जून 2016 में 24.56 रुपए प्रति किलो थी, जो मार्च 2022 में 29 फीसदी बढ़ोत्तरी के साथ 31.68 रुपए हो गई। खुदरा मुद्रास्फीति आरबीआई के 2-6 फीसदी के टॉलरेंस बैंड से आगे निकलते हुए अक्तूबर, 2022 में 5 महीने के उच्च स्तर 7.41 फीसदी पर पहुंच गई है। जाहिर है कि खाद्य कीमतों में इस तरह की अस्थिरता से औसत भारतीयों के लिए अपने रसोई बजट का प्रबंधन मुश्किल हो जाता है।

हिमाचल प्रदेश इस मामले में एक स्पष्ट सबक देता है। वहां उगाए गए सेब उपभोक्ताओं तक पहुंचने के लिए एक लंबी यात्रा से गुजरते हैं। राज्य के बागवानी उत्पाद विपणन और प्रसंस्करण निगम ने प्रमुख सेब वाले क्षेत्रों में हर 3-4 किमी पर संग्रह केंद्र स्थापित करते हुए कोल्ड स्टोरेज क्षमताओं के साथ कटाई के बाद की सुविधाओं का एक विस्तृत नेटवर्क बनाया है। इसी तरह का नेटवर्क आपूर्ति और शहरी मांग को देखते हुए विकसित करने की दरकार है।

इस दौरान खाद्य पदार्थों से परे अन्य मासिक खर्चों में भी मूल्य वृद्धि और इससे जुड़ी अस्थिरता देखी गई है। एलपीजी की कीमत जून 2016 में 548.50 रुपए प्रति गैर-सब्सिडी वाले 14.2 किलोग्राम सिलेंडर से बढ़कर अक्तूबर 2022 में 1,053 रुपए हो गई। इस बीच, बिजली के बिल भी बढ़ रहे हैं। दिल्ली में बिजली की लागत में इस साल जून की तुलना में जुलाई में 4 फीसदी की वृद्धि हुई है। 2002 से 2022 तक दिल्ली के डिस्कॉम द्वारा खरीदी गई बिजली की लागत 300 फीसदी बढ़ गई है, साथ ही खुदरा दर भी 90 फीसदी बढ़ गई है। तमिलनाडु में इस साल सितंबर में बिजली की बढ़ोत्तरी का मतलब है कि 500 यूनिट तक बिजली का उपयोग करनेवाले उपभोक्ताओं का औसत बिजली बिल 53 फीसदी बढ़ जाएगा।

कर्नाटक के बिजली नियामक आयोग (केईआरसी) ने इस साल तीन दफे बिजली की कीमत में बढ़ोत्तरी की है। देश की राजधानी में पेट्रोल की कीमत जून, 2016 में 65.65 रुपए प्रति लीटर से बढ़कर इस साल अक्तूबर में 96.72 रुपए प्रति लीटर हो गई है। यहां तक कि सीएनजी में भी इस साल सितंबर से अक्तूबर के बीच 7-8 फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई है। अगस्त 2022 में बेंगलुरु और मुंबई जैसे शहरों में किराया 2019 की तुलना में 15-20 फीसदी अधिक था। दिल्ली-एनसीआर में इसी अवधि में औसत वृद्धि 10-15% थी, जबकि चेन्नई में 8-10 फीसदी की वृद्धि देखी गई।

Web Title: Varun Gandhi's blog It is necessary to control the rampant inflation in every sector

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