लाइव न्यूज़ :

अमेरिका-इजराइल ईरान युद्ध के बीच रूस का खामोश खेल

By लोकमत समाचार सम्पादकीय | Updated: March 30, 2026 05:21 IST

रूस हर दिन 1,20,000 से 1,70,000 बैरल गैसोलीन निर्यात करता है, जिसके चीन, तुर्की, ब्राजील, अफ्रीका और सिंगापुर जैसे देश बड़े खरीददार हैं.

Open in App
ठळक मुद्देघरेलू उपलब्धता को प्राथमिकता देकर ईंधन की कीमतों को स्थिर बनाए रखना है.ऊर्जा का भंडार है तो वह दुनिया को उसका अंदाज कराने की क्षमता रखता है.नए दामों के लिए भी तैयार रहना होगा, जिसकी तैयारी रूस ने आरंभ कर दी है.

रूस ने अगले माह से चार महीने के लिए पेट्रोल (गैसोलीन) के निर्यात पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है. कहने के लिए यह निर्णय मुख्य रूप से रूस के घरेलू बाजार में ईंधन की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने और कीमतों को नियंत्रित करने के लिए लिया गया है. मगर इसके परिणामों की आशंका से वैश्विक तेल बाजार में हलचल तेज हो गई है. बताया जाता है कि रूस हर दिन 1,20,000 से 1,70,000 बैरल गैसोलीन निर्यात करता है, जिसके चीन, तुर्की, ब्राजील, अफ्रीका और सिंगापुर जैसे देश बड़े खरीददार हैं. वैश्विक अस्थिरता के बीच रूस का ताजा निर्णय बड़ा झटका है.

किंतु इससे भारत पर बड़ा संकट नहीं आएगा, क्योंकि वह मुख्य रूप से कच्चा तेल आयात करता है. माना यह भी जा रहा है कि रूस सस्ते दामों पर तेल बेचना बंद कर सकता है, जिसका भारत पर अवश्य असर पड़ सकता है. दुनिया को चौंकाने वाली घोषणा के पीछे रूस का कारण घरेलू उपलब्धता को प्राथमिकता देकर ईंधन की कीमतों को स्थिर बनाए रखना है.

उसका मानना है कि वैश्विक स्तर पर तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव है, लेकिन विदेशों में रूसी ऊर्जा की मांग अभी-भी मजबूत है. दरअसल अमेरिका-इजराइल-ईरान युद्ध के बीच रूस एक खामोश खिलाड़ी बन चुका है, जो हर तरह से विश्व को अपनी ताकत का अहसास करा रहा है. यदि उसके पास ऊर्जा का भंडार है तो वह दुनिया को उसका अंदाज कराने की क्षमता रखता है.

उसे लंबे समय से अपने पेट्रोलियम पदार्थों के खरीददार भारत से दिक्कत नहीं है, किंतु भविष्य में उसे कुछ ऐसे नए ग्राहक मिल सकते हैं, जो अमेरिका परस्ती में रह चुके हैं. जब खाड़ी देश पेट्रोलियम पदार्थ देने में सक्षम नहीं होंगे तो उन्हें रूस की तरफ ही देखना होगा. यही नहीं, नए दामों के लिए भी तैयार रहना होगा, जिसकी तैयारी रूस ने आरंभ कर दी है.

हालांकि यह बात खुलकर नहीं कही जा रही है कि अमेरिका-इजराइल से युद्ध में रूस ईरान का साथ उसी तरह दे रहा है, जिस प्रकार यूक्रेन को रूस के खिलाफ अमेरिका ने मदद दी. फिलहाल ईरान कथित मदद के साथ अधिक ताकतवर बनकर उभरा है. वहीं, यूक्रेन अपेक्षित सफलता हासिल नहीं कर सका है.

यूं तो रूस ने ईरान का हमेशा ही समर्थन किया है. संकट के समय उसका मजबूती के साथ खड़ा होना आश्चर्यजनक नहीं है. वैसे युद्ध में उसकी भूमिका स्पष्ट भले न हो, मगर नैतिक समर्थन में कोई कमी नहीं है. यह साफ करता है कि तीन देशों की लड़ाई में रूस का अपना लक्ष्य है.

जिसके लिए उसके पास एक बड़ा हथियार पेट्रोलियम पदार्थ हैं, जो दुनिया के लिए अपरिहार्य हैं. ताजा संघर्ष में परदे के पीछे की कहानियां अनेक हैं, जो धीरे-धीरे सामने आ रही हैं. आवश्यकता बस यही है कि अपने-अपने इरादों को पूरा करने के लिए दुनिया को बरबाद करने का ख्वाब नहीं देखा जाए. इसी में मानवता की भलाई है. 

टॅग्स :ईरानव्लादिमीर पुतिनरूसअमेरिकाडोनाल्ड ट्रंपचीनशी जिनपिंग
Open in App

संबंधित खबरें

विश्वअबू धाबी में रोकी गई ईरानी मिसाइलों के मलबे की चपेट में आने से घायल 12 लोगों में 5 भारतीय शामिल

कारोबारपश्चिम एशिया में 10,000 से अधिक कर्मचारी?, टाटा समूह ने सहायता योजना की शुरू

कारोबारईरान में फिर से फंसे सैकड़ों कश्मीरी छात्र?, 7 दिन के लिए बंद अजरबैजान सीमा

कारोबारपाकिस्तान में पेट्रोल की कीमत 458.40, केरोसिन दाम 457.80 और डीजल की कीमत 520.35 रुपये प्रति लीटर?

विश्व2027 में रिटायरमेंट और 2026 में जबरन हटाया?, सेना प्रमुख जनरल रैंडी जॉर्ज पर गाज?, ईरान युद्ध के बीच अमेरिकी रक्षा में हलचल

कारोबार अधिक खबरें

कारोबारGold Rate Today: 3 अप्रैल 2026 को सोना हुआ सस्ता, 24 कैरेट सोने की कीमत ₹ 1,50,865 प्रति 10 ग्राम

कारोबारदर्द कोई समझे, रील्स से बर्बादी तक?, कैसे पर्यटक और कंटेंट क्रिएटर्स पंपोर सरसों खेतों को पहुंचा रहे हैं नुकसान?

कारोबारPetrol, Diesel Price Today: बड़े शहरों में क्या है आज का रेट, यहां देखें पूरी लिस्ट

कारोबारBank Holiday Today: घर से निकलने से पहले चेक कर लें बैंक हॉलिडे लिस्ट, बस एक क्लिक से जानें आज बैंक बंद या खुले?

कारोबारसंसद ने जन विश्वास विधेयक 2026 पारित, 717 अपराधों को अपराध की श्रेणी से बाहर किया, जुर्माने की राशि 1 करोड़ रुपये?