इस समय पश्चिम एशिया में युद्ध के बीच जहां भारत के रिकॉर्ड खाद्यान्न उत्पादन और रिकॉर्ड खाद्य प्रसंस्करण उत्पाद देश के आम आदमी के लिए राहत और अर्थव्यवस्था की ताकत बन गए हैं, वहीं 1 अप्रैल से लागू होने वाले वर्ष 2026-27 के आम बजट के तहत देश की कृषि को उन्नत और निर्यात उन्मुख बनाने की प्रभावी पहल की गई है. हाल ही में प्रधानमंत्री मोदी ने बजट 2026-27 के बाद ‘कृषि और ग्रामीण परिवर्तन’ विषय पर वेब गोष्ठी को संबोधित करते हुए कहा कि आज दुनिया के तेजी से खुलते हुए कृषि बाजारों और खाद्यान्न की बढ़ती वैश्विक मांग के मद्देनजर भारत के द्वारा कृषि को निर्यात उन्मुख बनाए जाने से किसानों की आर्थिक सशक्तता के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था का नया अध्याय लिखा जा सकेगा. मोदी ने कहा कि 21वीं सदी के इस दौर में कृषि क्षेत्र को नई ऊर्जा के साथ आगे ले जाना सरकार की प्राथमिकता है.
बजट 2026-27 में कृषि क्षेत्र के लिए 1,62,671 करोड़ रुपए का आवंटन किया गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 7 प्रतिशत अधिक है. सरकार तकनीक और कृषि हितप्रद नीति के माध्यम से किसानों को केवल ‘अन्नदाता’ ही नहीं, बल्कि ‘निर्यातकर्ता’ बनाने की दिशा में काम कर रही है.
खाद्य तेल और दलहन पर राष्ट्रीय मिशन और प्राकृतिक खेती पर राष्ट्रीय मिशन सहित सभी कृषि क्षेत्रों को मजबूत किया जा रहा है. ऐसे में उच्च मूल्य वाले कृषि क्षेत्र को बड़े पैमाने पर बढ़ाने से ही हम अपनी खेती को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी क्षेत्र में बदल सकते हैं और दुनिया में भारत से बड़े पैमाने पर कृषि निर्यात बढ़ा सकते हैं.
जहां देश का रिकॉर्ड खाद्यान्न उत्पादन देश के आम आदमी के लिए भोजन की गारंटी है, वहीं दुनिया के कई जरूरतमंद देशों के करोड़ों लोगों के लिए खाद्यान्न आपूर्ति का आधार भी है. पिछले वर्ष 2024 -25 में भारत में 35.70 करोड़ टन खाद्यान्न का रिकॉर्ड उत्पादन हुआ है और इस वर्ष 2025-26 में इससे भी अधिक खाद्यान्न उत्पादन की संभावना है.
भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के पास केंद्रीय पूल में अप्रैल 2026 तक लगभग 182 लाख टन गेहूं उपलब्ध हो जाने का अनुमान है. इस समय देश के 80 करोड़ से अधिक कमजोर वर्ग के लोगों को नि:शुल्क खाद्यान्न वितरित किया जा रहा है. यह बात भी महत्वपूर्ण है कि 2008 की वैश्विक मंदी में भी भारत की अर्थव्यवस्था खाद्यान्न ताकत के कारण बहुत कम प्रभावित हुई.
इतना ही नहीं छह साल पहले कोरोना से जंग में देश के खाद्यान्न भंडार देश के लिए हथियार बन गए थे और भारत ने जरूरतमंद देशों को खाद्यान्न का निर्यात भी किया. अब एक बार फिर इस समय जब ईरान और इजराइल-अमेरिका युद्ध से दुनिया में खाद्य पदार्थों की कीमतें बढ़ रही हैं और खाद्यान्न आपूर्ति में व्यवधान है, तब भारत का रिकॉर्ड खाद्यान्न उत्पादन और रिकॉर्ड खाद्य प्रसंस्करण उत्पाद एक मजबूत हथियार दिखाई दे रहे हैं और भारत नए खाद्यान्न निर्यात आदेशों की पूर्ति के लिए तत्पर दिखाई दे रहा है.