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तेज आर्थिक विकास के साथ उन्नत परमाणु हथियारों से सुसज्जित मजबूत सैन्य शक्ति बनने की आवश्यकता

By डॉ जयंती लाल भण्डारी | Updated: March 30, 2026 05:17 IST

परमाणु और पारंपरिक हथियारों का विस्तार भारत सहित दक्षिण एशिया और अमेरिका के लिए भी  बड़ा खतरा बन गया है.

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ठळक मुद्देअप्रत्याशित परिस्थिति के लिए रक्षा तैयारियों को और मजबूत करने पर जोर दिया गया है. आधुनिक मिसाइलों के साथ उन्नत परमाणु शक्ति बनने की डगर पर आगे बढ़ना होगा.निश्चित रूप से हमें युद्ध पर आधारित ऐसी मजबूत अर्थव्यवस्था के रूप में भी तैयार होना होगा,

इस समय भारत के लिए तेज आर्थिक विकास के साथ उन्नत परमाणु हथियारों से सुसज्जित मजबूत सैन्य शक्ति बनने की आवश्यकता उभरकर दिखाई दे रही है. पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान-इजराइल संघर्ष के बीच हाल ही में 23 मार्च को नई दिल्ली में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ सीडीएस जनरल अनिल चौहान, तीनों सेना प्रमुखों और डीआरडीओ प्रमुख की बैठक में भारत की सुरक्षा तैयारियों की समीक्षा करते हुए किसी भी अप्रत्याशित परिस्थिति के लिए रक्षा तैयारियों को और मजबूत करने पर जोर दिया गया है.

हाल ही में जहां 18 मार्च  को बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप (बीसीजी) ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि भारत तेज रफ्तार से विकास करते हुए वर्ष 2030 तक जर्मनी को पीछे छोड़ दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा, वहीं  संसदीय रक्षा समिति की रिपोर्ट में पड़ोसी देशों के साथ जारी तनाव व भू-राजनीतिक चुनौतियों के बीच भारत की मजबूत रक्षा तैयारी और सुरक्षा संसाधनों के आधुनिकीकरण पर सिफारिशें प्रस्तुत की गई हैं. इन सिफारिशों के तहत भविष्य के युद्धों में भारत की निर्णायक भूमिका के मद्देनजर भारत को स्वदेशी ड्रोन और ड्रोन रोधी तकनीकों का हब बनाए जाने की जरूरत भी बताई गई है.

भारत के सैन्य शक्ति विकास की नई जरूरत हाल ही में 18 मार्च को अमेरिका की नेशनल इंटेलिजेंस डायरेक्टर तुलसी गबार्ड के  द्वारा प्रस्तुत  ‘एनुअल थ्रेट असेसमेंट’ रिपोर्ट 2026 में भी रेखांकित हो रही है. इस रिपोर्ट में कहा गया है कि इस समय पाकिस्तान  के द्वारा किया जा रहा परमाणु और पारंपरिक हथियारों का विस्तार भारत सहित दक्षिण एशिया और अमेरिका के लिए भी  बड़ा खतरा बन गया है.

चूंकि अब युद्ध केवल सीमाओं पर ही नहीं लड़े जाते, वरन ये मिसाइलों व ड्रोन के इस्तेमाल से हवा, समुद्र तथा साइबर स्पेस में भी लड़े जाते हैं, अतएव अब भारत के द्वारा सैन्य साजो-सामान के आधुनिकीकरण के साथ एआई, साइबर तकनीक और आधुनिक मिसाइलों के साथ उन्नत परमाणु शक्ति बनने की डगर पर आगे बढ़ना होगा.

उल्लेखनीय है कि स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट के मुताबिक अब परमाणु हथियारों की संख्या में कमी का युग खत्म हो रहा है. अब परमाणु हथियारों में वृद्धि और उन्हें उन्नत बनाने की प्रवृत्ति दिख रही है. निश्चित रूप से हमें युद्ध पर आधारित ऐसी मजबूत अर्थव्यवस्था के रूप में भी तैयार होना होगा,

जहां जरूरत पड़ने पर तेजी से औद्योगिक और तकनीकी क्षमता का इस्तेमाल करते हुए युद्ध सामग्री का निर्माण हो सके. हमें सार्वजनिक और निजी क्षेत्र से रक्षा इकाइयों को तकनीकी शैक्षणिक संस्थानों के साथ जोड़कर सैन्य साजो-सामान को अत्याधुनिक बनाने की डगर पर तेजी से बढ़ना होगा. देश में साइबर और सूचना युद्ध क्षमताओं को तेजी से विस्तारित करना होगा.

टॅग्स :मिसाइलअग्नि 5इकॉनोमी
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