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टेक्सटाइल सेक्टर के लिए गेमचेंजर हैं समझौते

By डॉ जयंती लाल भण्डारी | Updated: February 20, 2026 05:41 IST

आगामी वित्त वर्ष 2026-27 में टेक्सटाइल्स निर्यात से होने वाली कमाई में 8 से 11 प्रतिशत तक और टेक्सटाइल कंपनियों के मुनाफे में लगभग 9.5 प्रतिशत की बढ़त की उम्मीद है.

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ठळक मुद्देभारतीय टेक्सटाइल्स निर्यातकों को राहत मिलेगी और उनकी लागत प्रतिस्पर्धा बेहतर होगी.आधार पर रेटिंग एजेंसी ने अब टेक्सटाइल सेक्टर का आउटलुक ‘नेगेटिव’ से बढ़ाकर ‘स्टेबल’ कर दिया है.टेक्सटाइल्स सेक्टर को दी गई अहमियत की वजह से आने वाले समय में भारत के टेक्सटाइल सेक्टर को मजबूती मिलेगी.

हाल ही में इनवेस्टमेंट इनफॉरमेशन एंड क्रेडिट रेटिंग एजेंसी (आईसीआरए) की रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका द्वारा भारतीय सामान पर लगाए गए टैरिफ को 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने के बाद भारतीय टेक्सटाइल सेक्टर के तेजी से बढ़ने और निर्यात की नई संभावनाएं बनी हैं. रेटिंग एजेंसी ने कहा है कि टेक्सटाइल के टैरिफ में कमी ऐसे समय में आई है जब वैश्विक व्यापार में उतार-चढ़ाव बना हुआ है. इससे भारतीय टेक्सटाइल्स निर्यातकों को राहत मिलेगी और उनकी लागत प्रतिस्पर्धा बेहतर होगी.

ऐसे में आगामी वित्त वर्ष 2026-27 में टेक्सटाइल्स निर्यात से होने वाली कमाई में 8 से 11 प्रतिशत तक और टेक्सटाइल कंपनियों के मुनाफे में लगभग 9.5 प्रतिशत की बढ़त की उम्मीद है. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अमेरिका द्वारा टैरिफ में कटौती के अलावा भारत-यूरोप मुक्त व्यापार समझौते और अन्य द्विपक्षीय समझौतों में टेक्सटाइल्स सेक्टर को दी गई अहमियत की वजह से आने वाले समय में भारत के टेक्सटाइल सेक्टर को मजबूती मिलेगी. इसी आधार पर रेटिंग एजेंसी ने अब टेक्सटाइल सेक्टर का आउटलुक ‘नेगेटिव’ से बढ़ाकर ‘स्टेबल’ कर दिया है.

गौरतलब है कि 13 फरवरी को वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने ग्लोबल बिजनेस समिट में कहा कि अमेरिका के साथ अंतरिम व्यापार समझौते और अन्य देशों के साथ हुए मुक्त व्यापार समझौतों से आगामी पांच वर्षों में रोजगार के 70 से लाख अधिक नए अवसर पैदा होंगे.

सरकार का लक्ष्य टेक्सटाइल सेक्टर के कारोबार को 2026 तक वर्तमान 152 अरब डॉलर से बढ़ाकर 350 अरब डॉलर और निर्यात को वर्तमान 37.8 अरब डॉलर से बढ़ाकर 100 अरब डॉलर मूल्य तक पहुंचाने का है. उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका के साथ व्यापार समझौते में भारत को भी अमेरिकी धागे और कपास से बने कपड़ों पर शुल्क में उसी तरह की छूट हासिल होगी,

जैसी बांग्लादेश को हाल ही में अमेरिका के साथ व्यापार समझौते में मिली है. इस समझौते के मुताबिक बांग्लादेश से अमेरिका में आयात पर पारस्परिक शुल्क घटकर 19 फीसदी रह जाएगा. अगर कपड़ा अमेरिकी कपास और मानव निर्मित फाइबर से तैयार होता है तो अमेरिकी बाजार में उस पर कोई शुल्क नहीं लगेगा.

अभी बांग्लादेश से अमेरिका को निर्यात हो रहे कपड़ों पर 31 फीसदी आयात शुल्क लगता है, जिसमें सबसे पसंदीदा देश पर लगने वाला 12 फीसदी आयात शुल्क और 19 फीसदी पारस्परिक शुल्क है. अमेरिकी फाइबर इस्तेमाल होने पर पारस्परिक शुल्क खत्म हो जाएगा और कुल 12 फीसदी आयात शुल्क लगेगा.

ऐसे में अब भारत भी अमेरिका के साथ अंतरिम व्यापार समझौते में बांग्लादेश जैसी ही टैरिफ व्यवस्था वाले कर समझौते की डगर पर आगे बढ़ा है. अमेरिका, यूरोपीय संघ और अन्य प्रमुख देशों के साथ भारत  के द्विपक्षीय और मुक्त व्यापार समझौते भारत के टेक्सटाइल और अपैरल सेक्टर में तेज वृद्धि लाएंगे.

केंद्रीय बजट 2026-27 के तहत टेक्सटाइल सेक्टर के लिए जिस तरह अभूतपूर्व प्रावधान किए गए हैं, उससे भारत के टेक्सटाइल सेक्टर को तेजी से आगे बढ़ने का मौका मिलेगा. वस्तुतः इन बजट प्रावधानों का मुख्य उद्देश्य भारत को वैश्विक वस्त्र निर्माण का हब बनाना, रोजगार सृजन और निर्यात को बढ़ावा देना है.

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट के तहत ‘रेशा से फैशन’ तक पूरी मूल्य श्रृंखला को मजबूत करने पर जोर दिया है. टेक्सटाइल सेक्टर के लिए वस्त्र क्षेत्र के लिए एक व्यापक एकीकृत कार्यक्रम की घोषणा की गई है, जिसमें प्राकृतिक रेशों और मानव निर्मित फाइबर के लिए ‘राष्ट्रीय फाइबर योजना’ शामिल है. नए बजट में सात पीएम मेगा टेक्सटाइल पार्क को खास प्राथमिकता दी गई है.

ये पार्क विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचा प्रदान करेंगे. वर्ष 2026-27 के बजट में टेक्स-इको पहल वैश्विक रूप से प्रतिस्पर्धी और टिकाऊ वस्त्रों के निर्माण को बढ़ावा देने के लिए सुनिश्चित की गई है. ‘टेक्स-इको’ पहल अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप है. यह बात महत्वपूर्ण है कि केंद्रीय कपड़ा मंत्रालय ने सात मेगा इंटीग्रेटेड टेक्सटाइल रीजन एंड अपैरल पार्क स्थापित करने के लिए जो पीएम मित्र पार्क योजना शुरू की है वह देश के टेक्सटाइल सेक्टर के लिए मील का पत्थर है. पीएम मित्र पार्क प्रधानमंत्री के पांच-एफ विजन- फार्म से फाइबर, फाइबर से फैक्टरी, फैक्टरी से फैशन और फैशन से फॉरेन तक से प्रेरित है.

यह एक ‘आत्मनिर्भर भारत’ के निर्माण की दृष्टि को पूरा करने और भारत को वैश्विक वस्त्र मानचित्र पर मजबूती से स्थापित करने की आकांक्षा रखता है. सरकार की इस पहल से इन टेक्सटाइल पार्कों में करीब एक लाख करोड़ रुपए का निवेश आने का अनुमान है.

निश्चित रूप से विगत वर्षों में टेक्सटाइल सेक्टर पर अनिश्चितताओं और बदलावों का दबाव रहा है और अभी भी वर्ष 2026 में टेक्सटाइल सेक्टर में बढ़ते मौकों के बावजूद बड़ी चुनौतियां सामने खड़ी दिखाई दे रही हैं. इसमें लगातार लॉजिस्टिक्स पर असर डालने वाली जियोपॉलिटिकल रुकावटें, बढ़ती इनपुट और कम्प्लायंस लागत और सोर्सिंग जगहों के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा  शामिल है.

उम्मीद करें कि अमेरिका, यूरोपीय संघ और अन्य देशों के साथ व्यापार समझौतों में भारत के टेक्सटाइल सेक्टर के अनुकूल व्यवस्थाएं और वर्ष 2026-27 के केंद्रीय बजट में टेक्सटाइल सेक्टर को गति देने वाले अभूतपूर्व प्रावधानों से भारत के टेक्सटाइल सेक्टर से निर्यात तेजी से बढ़ेंगे और लक्ष्य के मुताबिक वर्ष 2030 तक रोजगार के 70 लाख से अधिक नए मौके निर्मित होते दिखाई देंगे.  

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