वेद प्रताप वैदिक वरिष्ठ पत्रकार व राजनीति विश्लेषक हैं। वे प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया से जुड़े रहे हैं और उसके हिन्दी सेवा 'भाषा' के संस्थापक संपादक रहे हैं।Read More
यूरोप और अमेरिका में हिंदू बहुसंख्या में नहीं हैं लेकिन उदारता के वहां वे सब लक्षण विद्यमान हैं, जो भारत में हैं. लेकिन पटेल का इशारा कुछ दूसरी तरफ है. ...
इस वक्त बेहतर होगा कि हमारे कूटनीतिज्ञ काबुल में सक्रिय सभी पक्षों के नेताओं से सीधा संवाद करें और वहां एक मिली-जुली शासन-व्यवस्था स्थापित करवाने की कोशिश करें. ...
हम अफगानिस्तान को पाकिस्तान और चीन के हवाले होने दे रहे हैं. जबकि हमारी सरकार की भूमिका इस समय काबुल में पाकिस्तान से भी ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकती थी. ...
भारत को केपल अंग्रेजों द्वारा शासित 1947 का अखंड भारत ही खड़ा नहीं करना है बल्कि सदियों पुराना आर्यावर्त पुनर्जीवित करना है, जिसे आजकल ‘दक्षेस’ भी कहा जाता है. ...
पाकिस्तान ने तालिबान को हथियार, पैसा, प्रशिक्षण और रहने को जगह दी है. इसका अर्थ सारी दुनिया ने यह लगाया कि तालिबान उसकी कठपुतली बनकर रहेगा लेकिन ऐसा समझने वाले लोग अफगान पठानों का मूल चरित्र नहीं समझते. ...
भारत अफगानिस्तान का पड़ोसी है और वहां 3 बिलियन डॉलर खर्च भी किए हैं, इसके बावजूद काबुल की नई सरकार बनवाने में उसकी कोई भूमिका क्यों नहीं है. वहीं चीन और पाकिस्तान इस मामले में तगड़ी पहल कर रहे हैं। ...