वेद प्रताप वैदिक वरिष्ठ पत्रकार व राजनीति विश्लेषक हैं। वे प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया से जुड़े रहे हैं और उसके हिन्दी सेवा 'भाषा' के संस्थापक संपादक रहे हैं।Read More
बलूच लोग पाकिस्तान में नहीं रहना चाहते हैं। वे अपना अलग राष्ट्र बनाना चाहते हैं। कई बलूच नेताओं ने मुझे कराची, इस्लामाबाद और पेशावर में हुई भेंटों में बताया कि वे पाकिस्तान में कभी मिलना ही नहीं चाहते थे। ...
फ्रांस में बेरोजगारी और महंगाई की वजह से लोग परेशान हैं. इमैनुएल मैक्रों ने पिछले चुनाव में बढ़-चढ़कर जो दावे किए थे, उन्हें वे पूरा नहीं कर सके. इसके बावजूद वे जीत वापस सत्ता में लौटे हैं. ...
केंद्र सरकार आजकल जम्मू-कश्मीर के लिए पहले की तुलना में ज्यादा योगदान कर रही है। उसके कुल खर्च का 64 प्रतिशत हिस्सा केंद्र सरकार देती है। देश के बहुत कम राज्यों को इतनी बड़ी मात्रा में केंद्र सरकार की मदद मिलती है। ...
न्याय-व्यवस्था का भारतीयकरण करना है तो सबसे पहले उसे अंग्रेजी के शिकंजे से मुक्त करना होगा. कानून संसद में मूल रूप से हिंदी में बनने लगें तो सभी भारतीय भाषाओं में उसका अनुवाद भी काफी सरल हो जाएगा ...
रूस-यूक्रेन युद्ध में चीन का फायदा ही फायदा है. इस युद्ध में रूस जितना भी कमजोर पड़ता जाएगा, चीन की पकड़ मजबूत होगी. रूस कमजोर होने के बाद चीन की ओर झुकेगा और शी जिनपिंग का इसका ही इंतजार है. ...
पड़ोसी देशों के लाखों-करोड़ों नागरिक इस पारंपरिक चिकित्सा के मुरीद हैं। यह चिकित्सा एलोपैथी के मुकाबले बहुत सस्ती है। इसका लाभ पड़ोसी देशों के मध्यम और गरीब वर्ग के लोग भी उठा सकें, इसका इंतजाम भारत सरकार को करना चाहिए। ...
सरकार ने ‘खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006’ में मिलावटखोरों पर 10 लाख रुपये जुर्माने और 6 माह से लेकर उम्र कैद तक का प्रावधान कर रखा है लेकिन क्या आज तक किसी को उम्रकैद हुई है? 10 लाख रुपये जुर्माने की बात अच्छी है लेकिन कितने मिलावटखोरों पर यह जु ...