वेद प्रताप वैदिक वरिष्ठ पत्रकार व राजनीति विश्लेषक हैं। वे प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया से जुड़े रहे हैं और उसके हिन्दी सेवा 'भाषा' के संस्थापक संपादक रहे हैं।Read More
संसदीय समिति को बधाई कि उसने अभी सांसदों की दुगुनी-तिगुनी पेंशन पर रोक लगाई है लेकिन यह काम अभी अधूरा ही है। उसे पहला काम तो यह करना चाहिए कि सांसदों के अपने वेतन और भत्ते खुद ही बढ़ाने के अधिकार को वह समाप्त करे। ...
जातीय अलगाव मजहबी अलगाव से भी अधिक जहरीला है। पिछली जनगणना में 46 लाख जातियों और उप-जातियों का पता चला था। एक ही प्रांत में एक ही जाति के लोग अलग-अलग जिलों में अपने आपको उच्च या नीच जाति का मानते हैं। ...
बाइडेन प्रशासन को इस लक्ष्य में कहां तक सफलता मिलेगी, यह इस पर निर्भर करेगा कि वह इन सदस्य-राष्ट्रों को कितनी छूट देगा। अमेरिका ने चीन से सीखा है कि अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए आर्थिक अस्त्र ही सबसे ज्यादा कारगर है लेकिन अमेरिका की समस्या यह है कि वह ...
सभी भाषाओं को नौकरानी बनाकर अंग्रेजी खुद महारानी बनी बैठी है। कानून सदा अंग्रेजी में बनते रहे हैं, अदालतों के फैसले अंग्रेजी में होते हैं, मंत्रिमंडल के फैसले अंग्रेजी में होते रहे हैं और हमारी उच्च नौकरशाही अंग्रेजी में सारे काम करती है। ...
तमिलनाडु के अन्य प्रमुख दल भी उसकी रिहाई का स्वागत कर रहे हैं। कहने का तात्पर्य यह कि इस मामले में तमिलनाडु की सरकार और जनता प्रधानमंत्री रहे राजीव गांधी की हत्या पर जरा भी दुखी मालूम नहीं पड़ रही है। यह अपने आप में कितने दुख की बात है? ...