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99 दिन से हांगकांग में हिंसा जारीः लोकतंत्र समर्थक प्रदर्शनकारियों पर पेट्रोल बम, आंसू गैस के गोलों के साथ-साथ पानी की बौछार

By भाषा | Updated: September 16, 2019 13:12 IST

हांगकांग पुलिस ने पत्थर और पेट्रोल बम फेंक रहे लोकतंत्र समर्थक प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस के गोलों के साथ-साथ पानी की बौछारों का इस्तेमाल किया। इससे हांगकांग में एक बार फिर हिंसा भड़क उठी। हांगकांग में बीते 99 दिनों से लोकतंत्र के समर्थन में प्रदर्शन हो रहे हैं।

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ठळक मुद्देसुरक्षा घेरों पर पेट्रोल बम और पत्थर फेंके गए जिसके बाद पुलिस ने आंसू गैस के गोलों और पानी की बौछारों का इस्तेमाल किया। इस दौरान एकत्रित हुए लोगों ने ब्रिटेन के ध्वज फहराये और "हांगकांग को बचाओ ब्रिटेन" के नारे भी लगाए।

लोकतांत्रिक सुधारों की मांग को लेकर निकाले गए मार्च ने हिंसक रूप ले लिया, प्रदर्शनकारियों ने सरकारी इमारतों पर देसी बम फेंके, यातायात बााधित किया और जगह-जगह आगजनी की जिसके बाद पुलिस को आंसू गैस के गोले और पानी की बौछारें छोड़नी पड़ी।

मार्च बिना मंजूरी के निकाला गया था। सरकार ने रविवार को वक्तव्य जारी कर कहा कि हिंसा से समुदाय को नुकसान ही पहुंचेगा और वह समस्याओं का समाधान खोजने की गंभीर कोशिश कर रही है। काले नकाब लगाए हजारों की संख्या में प्रदर्शनकारियों ने पुलिस की पाबंदी को धता बताते हुए शुरुआत में कॉजवे बे शॉपिंग डिस्ट्रिक्ट से दो किमी दूर सेंट्रल बिजनेस डिस्ट्रिक्ट तक शांतिपूर्ण मार्च निकाला था।

इसमें प्रदर्शनकारियों के परिजन और बच्चे भी शामिल थे। बाद में कुछ प्रदर्शनकारियों ने चीन के झंडे जलाए और सबवे स्टेशनों पर तोड़फोड़ की। इन लोगों ने सरकारी इमारतों पर ईंट और गैस के गोले भी फेंके। हांगकांग में प्रत्यपर्ण विधेयक को लेकर जून माह से सरकार विरोधी प्रदर्शन हो रहे हैं।

इस विवादित विधेयक को हालांकि सरकार ने अब वापस ले लिया है लेकिन लोकतंत्र की मांग को लेकर प्रदर्शन अब भी जारी हैं। अब तक 1,300 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। 

हांगकांग पुलिस ने पत्थर और पेट्रोल बम फेंक रहे लोकतंत्र समर्थक प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस के गोलों के साथ-साथ पानी की बौछारों का इस्तेमाल किया। इससे हांगकांग में एक बार फिर हिंसा भड़क उठी। हांगकांग में बीते 99 दिनों से लोकतंत्र के समर्थन में प्रदर्शन हो रहे हैं।

रैली के दौरान हजारों प्रदर्शनकारियों ने सड़कों पर मार्च कर अधिकारियों को चुनौती दी। रैली के दौरान उस समय हिंसा शुरू हुई जब गुस्साए प्रदर्शनकारियों के एक छोटे समूह ने शहर के मुख्य सरकारी परिसर पर हमले का प्रयास किया।

इस दौरान परिसर के आसपास सुरक्षा घेरों पर पेट्रोल बम और पत्थर फेंके गए जिसके बाद पुलिस ने आंसू गैस के गोलों और पानी की बौछारों का इस्तेमाल किया। इससे पहले, सैंकड़ों प्रदर्शनकारियों ने लोकतांत्रिक सुधार अभियान के लिये अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाने के मकसद से रविवार को ब्रिटेन के वाणिज्य दूतावास के बाहर रैली की।

हांगकांग अर्ध स्वायत्त चीनी क्षेत्र है। इस दौरान एकत्रित हुए लोगों ने ब्रिटेन के ध्वज फहराये और "हांगकांग को बचाओ ब्रिटेन" के नारे भी लगाए। प्रदर्शनकारी जिन बैनरों को थामे हुए थे उन पर लिखा था कि "एक देश, दो व्यवस्थाओं का दौर अब खत्म हो चुका है।"

गौरतलब है कि हांगकांग पर पहले ब्रिटेन का नियंत्रण था, लेकिन 1997 में ब्रिटेन और चीन के बीच हुए समझौते के बाद से इसे चीन को सौंप दिया गया। प्रदर्शनकारियों ने उस समझौते का हवाला देते हुए ब्रिटेन से हांगकांग की स्वायत्तता सुनिश्चित करने की अपील की।

प्रदर्शनकारियों ने इससे पहले एक सितंबर को भी ब्रिटेन के वाणिज्य दूतावास के बाहर रैली निकाली थी। इसके अलावा उसने पिछले सप्ताहांत अमेरिकी वाणिज्य दूतावास के बाहर भी रैली निकाली थी। दरअसल चीन ने हांगकांग के लिये एक प्रत्यर्पण विधेयक पेश किया था।

यह कानून हांगकांग के मुख्य कार्यकारी और अदालतों को उन देशों के प्रत्यर्पण अनुरोधों को प्रक्रिया में लाने की अनुमति देगा जिनके साथ पूर्व ब्रिटिश उपनिवेश का औपचारिक हस्तांतरण समझौता नहीं है। इसमें चीन, ताइवान और मकाऊ शामिल हैं, जिन्हें बिना विधायी पर्यवेक्षण के हस्तांतरण की इजाजत होगी।

प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि चीन हांगकांग में अपना दखल बढ़ाने के लिये यह विधेयक लाया है। हालांकि हांगकांग सरकार ने इस महीने घोषणा की थी कि वह विधेयक को वापस लेगी, लेकिन प्रदर्शनकारी शहर में प्रत्यक्ष चुनाव कराने और पुलिस की जवाबदेही तय करने की मांग पर अड़े हुए हैं। 

टॅग्स :हॉन्ग कॉन्गचीनसंयुक्त राष्ट्र
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