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ईरान में फंसे 850 जायरीन, सुप्रीम कोर्ट ने भारत वापस लाने की याचिका पर मांगा केंद्र से जवाब

By भाषा | Updated: March 27, 2020 17:33 IST

ईरान उन देशों में हैं जो कोविड-19 महामारी से बुरी तरह प्रभावित है और जहां अभी तक 2000 से ज्यादा व्यक्तियों की मृत्यु हो चुकी है।

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ठळक मुद्देईरान में अभी तक कोरोना वायरस से 2000 से ज्यादा व्यक्तियों की मृत्यु।दुनियाभर में इस महामारी के साढ़े 5 लाख से भी ज्यादा मामले दर्ज।

उच्चतम न्यायालय ने कोरोना वायरस महामारी की वजह से ईरान के कोम शहर में फंसे करीब 850 जायरीनों को स्वदेश लाने के लिये दायर याचिका पर शुक्रवार को केन्द्र से जवाब मांगा। न्यायमूर्ति धनन्जय वाई चन्द्रचूड़ और न्यायमूर्ति सूर्य कांत की पीठ ने वीडियो कांफ्रेन्सिग के माध्यम से इस मामले की सुनवाई की और केन्द्र को नोटिस जारी किया। इस मामले में न्यायालय अब 30 मार्च को आगे सुनवाई करेगा।

केन्द्र शासित लद्दाख के रहने वाले मुस्तफा एमएच की याचिका पर न्यायालय ने यह नोटिस जारी किया। मुस्तफा ने इस याचिका में ईरान में फंसे इन भारतीय जायरीनों को सुरक्षित बाहर निकाले जाने तक समुचित चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने का निर्देश देने का भी अनुरोध किया गया है।

ईरान उन देशों में हैं जो कोविड-19 महामारी से बुरी तरह प्रभावित है और जहां अभी तक 2000 से ज्यादा व्यक्तियों की मृत्यु हो चुकी है। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता संजय हेगड़े ने इस मामले में बहस की। याचिका में कहा गया है कि याचिकाकर्ता के कुछ रिश्तेदार पिछले साल दिसंबर में करीब 1000 जायरीनों के साथ ईरान गये थे।

याचिकाकर्ता के इन रिश्तेदारों को मार्च के पहले सप्ताह में भारत लौना था लेकिन कोरोना वायरस फैलने की वजह से वे वहीं पर फंस गये हैं। याचिका के अनुसार लद्दाख के अनेक नागरिकों ने इस मामले को विदेश मंत्रालय के समक्ष रखा था। इसके बाद सरकार ने कदम उठाये थे लेकिन वहां फंसे इन जायरीनों को ठहरने या चिकित्सा संबंधी ठीक सुविधायें नहीं मिल रहीं हैं।

विदेश मंत्री के बयान का जिक्र करते हुये याचिका में कहा गया है कि अनेक कदम उठाये ये और करीब 389 व्यक्तियों को ईरान से निकाला गया जिसमे अनेक छात्र भी शामिल थे। याचिका के अनुसार चिकित्सकों को एक दल ईरान भेजा गया था जिसने 850 व्यक्तियों की जांच की थी लेकिन यह प्रक्रिया सिर्फ एक बार ही की गयी।

याचिका में कहा गया है कि ईरान की सरकार ने वहां फंसे यात्रियों को अलग अलग होटलों में ठहराया है लेकिन पर्याप्त धन के अभाव में अधिकांश जायरीन इनका किराया देने की स्थिति में नहीं हैं। याचिका में केन्द्र को यह सुनिश्चित करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है कि इन यात्रियों को विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानकों के अनुरूप अलग रखा जाये। भाषा माधव माधव

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