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पाकिस्तान में ही छिपा है 'लापता' आतंकी मसूद अजहर, FATF से बचने के लिए फैलाया झूठ

By स्वाति सिंह | Updated: February 18, 2020 09:20 IST

पेरिस में 19 फरवरी को होने वाली बैठक में एफएटीएफ यह समीक्षा करेगा कि क्या पाकिस्तान ने आतंक के खिलाफ लड़ाई में उसकी कार्ययोजना को सही तरीके से कार्यान्वित किया है या नहीं। जुलाई, 2019 में चीन की अध्यक्षता में हुई बैठक में आतंक के खिलाफ इस्लामाबाद के कदमों को लेकर संतोष व्यक्त किया गया था।

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ठळक मुद्देपाकिस्तान का झूठ एकबार फिर बेनकाब हो गया है। मसूद अजहर फिलहाल पाकिस्तान के बहावलपुर शहर में रह रहा है।

पाकिस्तान का झूठ एकबार फिर बेनकाब हो गया है। दरअसल, पाकिस्तान आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के सरगना और भारत के मोस्ट वांटेड आतंकी मौलाना मसूद अजहर के लापता होने की बात कह रहा है। भारत की काउंटर टेरर एजेंसियों ने इस बात की पुष्टि की है कि आतंकी मसूद अजहर फिलहाल कड़ी सुरक्षा के बीच एक बम प्रूफ घर में रह रहा है। बहावलपुर के रेलवे लिंक रोड पर उसका ठिकाना है। 

बताया जा रहा है कि मसूद अजहर फिलहाल पाकिस्तान के बहावलपुर शहर में रह रहा है। मसूद अजहर जहां छिपा है वह बहावलपुर आतंकी हेडक्वॉर्टर के पीछे है। वहां काफी तगड़ी सिक्यॉरिटी भी है। कहा तो ये भी जाता है कि जहां मसूद अजहर छिपा है, उस घर में बम हमले का भी कोई असर नहीं होगा।

इसके अलावा अजहर के तीन अन्य ठिकानों का भी पता चला है। जिसमें कसूर कॉलोनी बहावलपुर, मदरसा बिलाल हबसी खैबर पख्तूनख्वा और मदरसा मस्जिद-ए-लुकमान खैबर पख्तूनख्वा शामिल हैं। मालूम हो कि 2016 में हुए पठानकोट हमले से संबंधित जो डोजियर पाकिस्तान को सौंपा गया था उसमें एक फोन नंबर ऐसा था जिसका लिंक बहावलपुर टेरर फैक्टरी से था।

मसूद अजहर पर पाकिस्तान ने दुनिया को किया गुमराह

बता दें कि पेरिस में होने वाली फायनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) की बैठक से पहले ही आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) का सरगना मसूद अजहर पाकिस्तान सेना की कैद से गायब हो गया। पाकिस्तान के मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट (एमक्यूएम) के संस्थापक अल्ताफ हुसैन ने कहा कि जैश प्रमुख और संयुक्त राष्ट्र द्वारा वैश्विक आतंकी घोषित मसूद अजहर पाकिस्तान सेना की कैद से गायब हो गया है। आतंकी सरगना के गायब होने से पाकिस्तान के प्रतिबंधित संगठनों को लेकर बनाई गई नीति पर कई सवाल खड़े हो गए हैं। 

इस हफ्ते, पेरिस स्थित वैश्विक आतंकी वित्त पोषण मामले में जांच करने वाली संस्था एफएटीएफ मूल्यांकन करेगी कि पाकिस्तान ने आतंकी वित्त पोषण से लड़ने के लिए अपनी कार्ययोजना को लागू किया है या नहीं और क्या उसने आतंकवाद रोकने के लिए पर्याप्त कदम उठाए हैं या नहीं। एफएटीएफ में 205 देशों के और न्यायालयों के 800 से अधिक प्रतिनिधि लेंगे भाग आईएमएफ, संयुक्त राष्ट्र, विश्व बैंक और अन्य संगठनों सहित दुनियाभर के 205 देशों और न्यायालयों के 800 से अधिक प्रतिनिधि एफएटीएफ की बैठक में भाग लेंगे। 

गौरतलब है कि पेरिस में 19 फरवरी को होने वाली बैठक में एफएटीएफ यह समीक्षा करेगा कि क्या पाकिस्तान ने आतंक के खिलाफ लड़ाई में उसकी कार्ययोजना को सही तरीके से कार्यान्वित किया है या नहीं। जुलाई, 2019 में चीन की अध्यक्षता में हुई बैठक में आतंक के खिलाफ इस्लामाबाद के कदमों को लेकर संतोष व्यक्त किया गया था। हालांकि इसके बावजूद पाकिस्तान को ग्रे-लिस्ट में बरकरार रखा गया था।

इसके बाद अक्तूबर में बीजिंग में हुई एफएटीएफ के एशिया प्रशांत समूह की बैठक में तकनीकी दृष्टिकोण से पाकिस्तान के हालातों की समीक्षा की गई थी। 27 में से 22 बिंदुओं पर अनुपालन नहीं किया तो ब्लैकलिस्ट होगा पाकिस्तान एफएटीएफ ने पाकिस्तान को फरवरी-2020 तक वक्त दिया था। एफएटीएफ ने चेतावनी दी थी कि अगर तब तक पाकिस्तान 27 में से 22 बिंदुओं पर उसकी सिफारिशों का अनुपालन नहीं करता है तो उसे ब्लैकलिस्ट में डाल दिया जाएगा।

अब एफएटीएफ यह फैसला करेगा कि क्या पाकिस्तान ने ब्लैकलिस्ट होने से बचने के लिए उपयुक्त कदम उठाए हैं या नहीं। अगर पाक को ब्लैकलिस्ट में डाल दिया जाता है तो उसे अंतर्राष्ट्रीय बहिष्कार का सामना करना पड़ सकता है।

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