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'अगर भारत सरहद पर गलती दोहराता है तो इतिहास दोहराया जाएगा', चीनी मीडिया की धमकी

By स्वाति सिंह | Updated: September 9, 2020 18:25 IST

ग्लोबल टाइम्स ने लिखा, '1962 में भारत-चीन युद्ध में भारत को बुरी हार का सामना करना पड़ा था। भारतीय सैनिक हमेशा से कथित बदला लेना चाहते रहे हैं। भारत ने पहाड़ों में युद्ध लड़ने की अपनी क्षमता मजबूत की है और अमेरिकी और रूसी हथियार खरीदे हैं।'

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ठळक मुद्देचीनी मीडिया में भी भारत-चीन के बीच चल रहे तनाव को लेकर लगातार आर्टिकल छापे जा रहे हैं। ग्लोबल टाइम्स ने एक आर्टिकल में 'अगर भारत सरहद पर गलती दोहराता है तो इतिहास दोहराया जाएगा'

नई दिल्ली: भारत-चीन के बीच जारी गतिरोध लगातार बढ़ता जा रहा है। चीनी मीडिया में भी भारत-चीन के बीच चल रहे तनाव को लेकर लगातार आर्टिकल छापे जा रहे हैं। मंगलवार को ग्लोबल टाइम्स ने एक आर्टिकल में 'अगर भारत सरहद पर गलती दोहराता है तो इतिहास दोहराया जाएगा' शीर्षक के साथ लिखा। इस आर्टिकल में दावा किया गया कि भारत ने सीमा पर हथियार ना इस्तेमाल करने के समझौते को तोड़ा है। 

ग्लोबल टाइम्स ने आगे लिखा, 'भारतीय पक्ष को लगता है कि हथियारों का इस्तेमाल ना करने की वजह से उसकी स्थिति कमजोर है इसलिए भारतीय सेना अपनी क्षमता को मजबूत करने के लिए हथियारों का इस्तेमाल करना चाहती है।' इसके साथ ही इस लेख में कहा गया, 'अगर भारतीय सेना बंदूकों का इस्तेमाल करती है तो चीनी सेना भी ऐसा करने के लिए मजबूर हो जाएगी। भारतीय मीडिया में कहा जा रहा है कि उसके सैनिकों ने पैंगोंग झील के दक्षिणी किनारे पर दो कमांडिंग हाइट्स पर कब्जा कर लिया है। चीनी क्षेत्र में इस तरह के उकसावे वाले कदमों के गंभीर नतीजे होंगे और इनका हर हाल में जवाब दिया जाएगा।

ग्लोबल टाइम्स ने किया ये दावा 

ग्लोबल टाइम्स ने लिखा, '1962 में भारत-चीन युद्ध में भारत को बुरी हार का सामना करना पड़ा था। भारतीय सैनिक हमेशा से कथित बदला लेना चाहते रहे हैं। भारत ने पहाड़ों में युद्ध लड़ने की अपनी क्षमता मजबूत की है और अमेरिकी और रूसी हथियार खरीदे हैं। भारतीय सेना की लड़ने की क्षमता को कम करके नहीं आंकना चाहिए। लेकिन समस्या ये है कि भारतीय सैनिकों के पास सुनियोजित और संयुक्त मोर्चे से हमले की क्षमता नहीं है जोकि एक असली कॉम्बैट में बड़ी रुकावट है।'

विदेश मंत्रालय ने भी लताड़ा

भारतीय सेना के बाद विदेश मंत्रालय ने चीन के LAC पर फायरिंग के आरोपों को खारिज किया है। साथ ही विदेश मंत्रालय ने कहा, 'हमने ग्लोबल टाइम्स के साथ ही चीनी मीडिया में चल रहे रिपोर्ट्स देखें। इसमें NSA अजित डोभाल को लेकर भी कुछ कमेंट्स किए गए हैं। ये रिपोर्ट पूरी तरह से फर्जी और झूठे हैं। इनका कोई आधार नहीं है। हम मीडिया से ऐसी रिपोर्टिंग से परहेज करने का आग्रह करते हैं।'

विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को अपने बयान में कहा है, ‘हमने चीनी मीडिया (चाइना डेली, ग्लोबल टाइम्स) में कुछ आर्टिकल देखे हैं जिसमें NSA अजित डोभाल को लेकर बात की जा रही है। हम साफ करना चाहते हैं कि ये सभी रिपोर्ट्स पूरी तरह से गलत हैं, ऐसे में इस तरह की खबरों से बचने की अपील करते हैं’।

 

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