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द्वितीय विश्व युद्ध के बाद कोविड-19 के कारण जीवन प्रत्याशा में आई सबसे अधिक कमी: अध्ययन

By विशाल कुमार | Updated: September 27, 2021 12:03 IST

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी द्वारा प्रकाशित अध्ययन में विश्लेषण किए गए 29 देशों में से 22 देशों में 2019 की तुलना में जीवन प्रत्याशा में छह महीने से अधिक की गिरावट आई है. कुल मिलाकर 29 देशों में से 27 में जीवन प्रत्याशा में कमी आई है.

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ठळक मुद्देऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी ने कहा कि विभिन्न देशों में जीवन प्रत्याशा में कमी को आधिकारिक कोविड-19 मौतों से जोड़ा जा सकता हैअधिकांश देशों में महिलाओं की तुलना में पुरुषों के लिए जीवन प्रत्याशा में अधिक गिरावट आई.पिछले 5.6 वर्षों में मृत्यु दर पर हासिल की गई बढ़त, बर्बाद हो गई.

लंदन: ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी द्वारा सोमवार को प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से कोविड-19 महामारी ने साल 2020 में सबसे अधिक जीवन प्रत्याशा कम हुई है. इसने अमेरिकी पुरुषों के जीवनकाल में दो साल की कमी कर दी है.

समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, अध्ययन में विश्लेषण किए गए 29 देशों में से 22 देशों में 2019 की तुलना में जीवन प्रत्याशा में छह महीने से अधिक की गिरावट आई है. यह अध्ययन यूरोप, अमेरिका और चिली में किया गया. कुल मिलाकर 29 देशों में से 27 में जीवन प्रत्याशा में कमी आई है.

यूनिवर्सिटी ने कहा कि विभिन्न देशों में जीवन प्रत्याशा में कमी को आधिकारिक कोविड-19 मौतों से जोड़ा जा सकता है. रॉयटर्स के आंकड़े दिखाते हैं कि नए कोरोना वायरस के कारण अब तक लगभग 50 लाख लोगों की मौत हो चुकी है.

इंटरनेशनल जर्नल ऑफ एपिडेमियोलॉजी में प्रकाशित पेपर की सह-प्रमुख लेखक डॉ. रिद्धि कश्यप ने कहा कि तथ्य यह है कि हमारे परिणाम इतने बड़े प्रभाव को उजागर करते हैं जो सीधे तौर पर कोविड-19 के कारण होते हैं, यह दर्शाता है कि यह कई देशों के लिए कितना विनाशकारी झटका है.

अधिकांश देशों में महिलाओं की तुलना में पुरुषों के लिए जीवन प्रत्याशा में अधिक गिरावट आई. अमेरिकी पुरुषों में 2019 की तुलना में जीवन प्रत्याशा में 2.2 वर्ष की गिरावट देखी गई.

कुल मिलाकर 11 देशों में महिलाओं की तुलना में 15 देशों में पुरुषों की जीवन प्रत्याशा में एक साल तक की कमी आई है. इस तरह इसके कारण पिछले 5.6 वर्षों में मृत्यु दर पर हासिल की गई बढ़त, बर्बाद हो गई.

अमेरिका में मृत्यु दर में वृद्धि मुख्य रूप से कामकाजी उम्र के लोगों और 60 से कम उम्र के लोगों में हुई थी, जबकि यूरोप में 60 वर्ष से अधिक आयु के लोगों की मृत्यु मृत्यु दर में वृद्धि में अधिक महत्वपूर्ण योगदान देती है.

कश्यप ने निम्न और मध्यम आय वाले देशों सहित और अधिक देशों से अपील की कि वे आगे के अध्ययन के लिए मृत्यु दर के आंकड़े उपलब्ध कराएं.

उन्होंने कहा कि हम विश्व स्तर पर महामारी के प्रभावों को बेहतर ढंग से समझने के लिए और अधिक अलग-अलग आंकड़ों के प्रकाशन और उपलब्धता के लिए तत्काल आह्वान करते हैं.

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