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कोरोना वायरस: चीन के इस शहर में लगी कुत्ते-बिल्ली का मांस खाने पर रोक, पहली बार हुआ ऐसा

By निखिल वर्मा | Updated: April 3, 2020 12:15 IST

दुनिया भर में कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों के बीच चीन के एक शहर में पहली बार कुत्ते-बिल्ली के मांस खाने पर रोक लगा दी है.

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ठळक मुद्देचीन सरकार फरवरी महीने में वन्य जीवों के व्यापार और जंगली जानवरों के मांस खाने पर प्रतिबंध लगा चुकी हैचीन में कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों के इलाज के लिए भालूओं के पित्त का इस्तेमाल होता रहेगा.

चीन के वुहान शहर से फैला कोरोना वायरस (Covid-19) पूरी दुनिया में तबाही मचा रहा है। दुनिया भर में कोविड-19 से संक्रमित मरीजों की संख्या 10 लाख पार चली गई जबकि 53 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हुई है। कई देशों में लॉकडाउन चल रहा है तो कई जगह सामाजिक दूरी का पालन किया जा रहा है। यह बीमारी कैसी फैली अब तक इसका पता नहीं चल पाया है लेकिन कुछ लोग इसे जानवरों के मांस खाने से जोड़ रहे हैं। इस बीच चीन के शहर शेज्ने शहर में कुत्ते और बिल्लियों का मांस खाने पर रोक लगा दी गई है। ऐसा करने वाला चीन का ये पहला प्रांत है।

चीन में कोरोना वायरस का कहर

चीन में कोरोना वायरस का पहला केस 1 दिसंबर 2019 को आया था और अब तक यहां 81,620 केस आए जिसमें 3322 लोगों की मौत हुई है। एक रिपोर्ट के अनुसार चीन में यह वायरस वुहान के हन्नान प्रांत के सी-फूड मार्केट से फैला है। जहां एक झींगा मछली बेचने वाली 57 वर्षीय महिला को कोरोना पॉजिटिव पाया गया। इसके बाद से कोरोना वायरस का संबंध जानवरों के मांस के आहार बताया जाने लगा। हालांकि इसकी कोई वैज्ञानिक पुष्टि नहीं हुई है।

1 मई से लागू होगा प्रतिबंध

चीन सरकार ने फरवरी महीने में वन्य जीवों के व्यापार और जंगली जानवरों का मांस खाने पर पाबंदी लगा दी थी लेकिन शेन्जेन शहर में कुत्तों और बिल्लियों के मांस को भी बैन कर दिया गया है। यहां नया कानून 1 मई से प्रभाव में होगा। बता दें कि चीन में हर साल एक करोड़ कुत्तों और 40 लाख बिल्लियों को मार दिया जाता है। ह्यूमेन सोसायटी इंटरनेशनल  के अनुसार एशियाई देशों में मांस के लिए हर साल 3 करोड़ कुत्तों को मारा जाता है।

बीबीसी में छपी रिपोर्ट के अनुसार शेन्जेन सरकार ने कहा है कि कुत्ते और बिल्लियां पालतू जानवरों के तौर पर इंसानों के सबसे नजदीक है। पालतू जानवरों के मांस खाने पर विकसित देशों, हांगकांग और ताइवान में पाबंदी लगाई जाती रही है। यह प्रतिबंध मानव सभ्यता के अनुकूल हैं।

वहीं चीन ने कोरोना वायरस के संक्रमण के इलाज के लिए बनाई जाने वाली दवा में भालू के पित्त का इस्तेमाल करने की इजाजत दे रखी है। चीन में भालू के पित्त का इस्तेमाल लंबे पथरी और लिवर की बीमारियों के इलाज के लिए देसी दवाओं के तौर पर होता रहा है।

 

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