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Coronavirus Vaccine: ऑक्सफोर्ड के बाद चीन की कोविड-19 की वैक्सीन सफल, टीके का दूसरा चरण सुरक्षित

By भाषा | Updated: July 21, 2020 17:57 IST

घातक कोरोना वायरस अब तक दुनियाभर में 1.45 करोड़ से अधिक लोगों को संक्रमित कर चुका है और छह लाख से ज्यादा लोगों की जान ले चुका है।

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ठळक मुद्देकोरोना वायरस की शुरुआत चीन के हुबेई प्रांत की राजधानी वुहान शहर से हुई थी.दुनिया के कई देशों में कोरोना वायरस के टीके का परीक्षण चल रहा है

बीजिंग: चीन में किये जा रहे कोविड-19 टीका के दूसरे चरण के क्लीनिकल परीक्षण में यह पाया गया है कि यह सुरक्षित है और शरीर में प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया पैदा कर रहा है। ‘द लांसेट’ मेडिकल जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन में यह कहा गया है। चीन रोग नियंत्रण केंद्र के विशेषज्ञों सहित अनुसंधान में शामिल अन्य वैज्ञानिकों ने कहा है कि परीक्षण में टीके की सुरक्षा और प्रतिरक्षा तैयार होने का मूल्यांकन किया गया। उन्होंने बताया अनुसंधान के नतीजे में प्रथम चरण के परीक्षण की तुलना में कहीं अधिक प्रतिभागियों से आंकड़े उपलब्ध हुए हैं।

परीक्षण में 55 साल से अधिक उम्र के लोगों के एक छोटे से समूह को भी शामिल किया गया था। हालांकि, अनुसंधानकर्ताओं ने आगाह किया है कि मौजूदा परीक्षण में शामिल कोई भी प्रतिभागी टीकाकरण के बाद कोरोना वायरस, सार्स-कोवी-2 की चपेट में नहीं आया। इसलिए, उन्होंने कहा कि मौजूदा परीक्षण के जरिये यह कहना संभव नहीं है कि टीके ने सार्स-कोवी-2 संक्रमण के खिलाफ प्रभावी सुरक्षा प्रदान की या नहीं। ब्रिटेन के लंदन स्थित इम्पेरियल कॉलेज के प्रतिरक्षा विज्ञान के प्राध्यापक डैनी अल्टमैन ने कहा, ‘‘चीन का अनुसंधान सामान्य सर्दी-जुकाम वायरस पर आधारित है, जिसके खिलाफ लोगों के शरीर में पहले से एंटीबॉडी मौजूद होते हैं। ’’

उल्लेखनीय है कि अनुसंधान टीम से उनका कोई संबंध नहीं है। वैज्ञानिकों के मुताबिक 508 लोगों को नये टीके के परीक्षण में शामिल किया गया। परीक्षण के नतीजों में यह खुलासा हुआ कि टीके की अधिक खुराक वाले 95 प्रतिशत प्रतिभागियों और कम खुराक वाले 91 प्रतिशत प्रतिभागियों में टीकाकरण के 28 वें दिन टी-सेल या एंटीबॉडी प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया दिखी।

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी का कोरोना टीका सुरक्षित

ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय द्वारा विकसित कोरोना वायरस टीका सुरक्षित है और शरीर के भीतर एक मजबूत प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को उत्पन्न करता है। इसके शोध में लगे वैज्ञानिकों ने मानव परीक्षण के पहले चरण के बाद सोमवार को यह घोषणा की।

परीक्षण के पहले चरण के तहत अप्रैल और मई में ब्रिटेन के पांच अस्पतालों में 18 से 55 वर्ष की आयु के 1,077 स्वस्थ वयस्कों को टीके की खुराक दी गई थी और उनके परिणाम चिकित्सा पत्रिका ‘लांसेट’ में प्रकाशित किए गए हैं। परिणाम बताते हैं कि जिनको टीके लगाए गए, उनमें 56 दिनों तक मजबूत एंटीबॉडी और टी-सेल प्रतिरक्षा प्रतिक्रियाएं उत्पन्न हुईं। सालों तक वायरस से सुरक्षित रखने के लिए टी-सेल महत्वपूर्ण हैं। निष्कर्षों को आशाजनक माना जा रहा है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना ​​है कि यह पता लगाना बहुत जल्दीबाजी होगी कि क्या यह सुरक्षा प्रदान करने में पूरी तरह से सक्षम है क्योंकि बड़े स्तर पर अब भी परीक्षण चल रहे हैं।

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