Jamia violence: Senior journalist Umashankar Singh asked, why did the uniformers break the CCTV camera in reading hall | जामिया हिंसा Viral वीडियो: वरिष्ठ पत्रकार उमाशंकर सिंह ने पूछा, वर्दीवालों ने रीडिंग हॉल का CCTV कैमरा क्यों तोड़ा?
तस्वीर उमाशंकर सिंह के ट्विटर से साभार.

Highlightsजेसीसी ने 48 सेकेंड का एक वीडियो जारी किया है जिसमें कथित तौर पर अर्द्धसैनिक बल और पुलिस के करीब सात-आठ कर्मी ओल्ड रीडिंग हॉल में प्रवेश करते और छात्रों को लाठियों से पीटते दिख रहे हैं।पांच मिनट 25 सेंकेंड के दूसरे क्लिप में लोग हड़बड़ी में विश्वविद्यालय के पुस्तकाल में प्रवेश करते हुए कथित रूप से नजर आ रहे हैं। कुछ ने अपने चेहरे ढंके हुए हैं।

जामिया मिल्लिया इस्लामिया में 15 दिसंबर को हुई हिंसा को लेकर सोशल मीडिया पर फिर एक नया वीडियो तैर रहा है। 16 फरवरी से अब तक चौथा वीडियो वायरल हो चुका है। सोशल मीडिया पर पुलिस कार्रवाई को लेकर राय बंटी हुई है। कुछ लोग प्रदर्शनकारियों के पक्ष में लिख रहे हैं तो कुछ लोग दिल्ली पुलिस के साथ खड़े दिख रहे हैं।

एनडीटीवी के वरिष्ठ पत्रकार उमाशंकर ने ट्वीट किया, वर्दीवालों ने इस रीडिंग हॉल का सीसीटीवी कैमरा क्यों तोड़ा? क्योंकि उन्हें पता था कि कार्रवाई के नाम पर वह जो कर रहे हैं वह ज़ुल्म है। ये वीडियो अब तक सामने आए तमाम वीडियो पर भारी है। इसके बाद कुतर्कियों को चुप हो जाना चाहिए। पर नहीं। कोई नया कुतर्क गढ़ेंगे!

जामिया वीडियो की पूरी सच्चाई

16 फरवरी को जामिया समन्वय समिति (जेसीसी) ने सीसीटीवी फुटेज प्रतीत हो रहे 48 सेकेंड का एक वीडियो जारी किया है जिसमें कथित तौर पर अर्द्धसैनिक बल और पुलिस के करीब सात-आठ कर्मी ओल्ड रीडिंग हॉल में प्रवेश करते और छात्रों को लाठियों से पीटते दिख रहे हैं। ये कर्मी रूमाल से अपने चेहरे ढंके हुए भी नजर आ रहे हैं। विशेष पुलिस आयुक्त (खुफिया विभाग) प्रवीर रंजन ने कहा कि यह वीडियो पुलिस के संज्ञान में आया है और वह वर्तमान जांच प्रक्रिया के तहत उसकी भी जांच करेगी। सूत्रों ने बताया कि जेसीसी ने बस 48 सेंकेंड का वीडिया जारी किया किया है जिसमें इस प्रकरण का बस एक ही पक्ष दिखाया गया था। उसने (जेसीसी) दूसरे वीडियो नहीं दिखाये जिनमें दंगाई परिसर में दाखिल होते हुए नजर आ रहे हैं और कुछ अन्य उन्हें पुलिस से बचा रहे हैं। 

पांच मिनट 25 सेंकेंड के दूसरे क्लिप में लोग हड़बड़ी में विश्वविद्यालय के पुस्तकाल में प्रवेश करते हुए कथित रूप से नजर आ रहे हैं। कुछ ने अपने चेहरे ढंके हुए हैं। जब ये सभी पुस्तकालय में दाखिल हो जाते हैं तो तब वहां मौजूद लोग मेजों और कुर्सियों से मुख्य द्वार जाम करते हुए देखे जा सकते हैं। इसमें इस घटना के समय और तारीख का ब्योरा नहीं है। दो मिनट 13 सेकेंड के तीसरे वीडियो में चेहरे ढंके हुए कुछ लोग बीच सड़क पर नजर आते हैं । कम से कम दो के हाथों में पत्थर हैं। यह फुटेज 15 दिसंबर के छह बजकर चार मिनट का है। 

पहला वीडियो जामिया समन्वय समिति (जेएमसी) ने जारी किया है। यह जामिया मिल्लिया इस्लामिया के वर्तमान और पूर्व छात्रों का संगठन है जिसे 15 दिसंबर को कथित पुलिस बर्बरता के बाद गठित किया गया था। हालांकि विश्वविद्यालय ने स्पष्ट किया है कि पहला वीडियो उसने जारी नहीं किया है। विश्वविद्यालय 15 दिसंबर को उस वक्त युद्ध क्षेत्र में तब्दील हो गया था, जब पुलिस उन बाहरी लोगों की तलाश में विश्वविद्यालय परिसर में घुस गयी थी, जिन्होंने संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान इस शैक्षणिक संस्थान से कुछ ही दूरी पर हिंसा और आगजनी की थी। विश्वविद्यालय के विधि के एक छात्र ने आरोप लगाया था कि पुलिस कार्रवाई में उसकी एक आंख की रोशनी चली गई। जामिया समन्वय समिति ने कहा कि उसे यह वीडियो “गुमनाम” स्रोत से प्राप्त हुआ है। उसने यह भी कहा कि विश्वविद्यालय ने लाइब्रेरी में पुलिस की कार्रवाई का वीडियो राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के साथ साझा किया है, जो इस प्रकरण की जांच कर रहा है। 

ट्विटर पर वीडियो साझा करते हुए कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने कहा,‘‘...इस वीडियो को देखने के बाद जामिया में हुई हिंसा को लेकर अगर किसी पर एक्शन नहीं लिया जाता है तो सरकार की नीयत पूरी तरह से देश के सामने आ जाएगी।’’ उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और दिल्ली पुलिस पर यह “झूठ’’ बोलने का भी आरोप लगाया कि पुस्तकालय के भीतर जामिया के छात्रों की पिटाई नहीं की गई थी। उन्होंने ट्विटर पर लिखा, ‘‘देखिए कैसे दिल्ली पुलिस पुस्तकालय में छात्रों को अंधाधुंध पीट रही है। एक लड़का किताब दिखा रहा है लेकिन पुलिसकर्मी लाठियां चलाए जा रहे हैं।’’ 

उन्होंने लिखा, ‘‘गृह मंत्री और दिल्ली पुलिस के अधिकारियों ने झूठ बोला कि पुस्तकालय में किसी को नहीं पीटा गया।’’ माकपा महासचिव सीताराम येचुरी ने कहा कि पुलिस की कार्रवाई, “अत्यधिक अविवेकपूर्ण’’ और “अस्वीकार्य” है। येचुरी ने ट्वीट किया, “विश्वविद्यालयों में छात्रों पर पुलिस कार्रवाई का अमित शाह द्वारा किया गया हर बचाव गलत, भ्रामक और राजनीति से प्रेरित है। दिल्ली पुलिस मोदी-शाह के अधीन है और वे लाइब्रेरी में पढ़ रहे छात्रों से इस तरह से पेश आते हैं। शर्मनाक है।” 

हालांकि भाजपा आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने कहा कि जांच एजेंसियों को इस वीडियो को सबूत के रूप में लेना चाहिए और दंगाइयों के लिए खुद को पहचानना अच्छी बात है। उन्होंने ट्वीट किया, ‘‘ पुस्तकाल में नकाब के साथ विद्यार्थी-- बंद पुस्तकों को पढ़ते हुए। निश्चिंत होकर पढ़ाई में डूब जाने (पुस्तकालय इसी के लिए होता है) के बजाय दरवाजे की ओर चिंतातुर होकर देखते हुए। पथराव के बाद पुस्तकालय में छिपने की कोशिश में जुटे जामिया के दंगाइयों का गहन विश्लेषण।’’ 

विश्वविद्यालय के जनसंपर्क अधिकारी अहमद अजीम ने कहा, ‘‘हमारे संज्ञान में आया है कि जामिया मिल्लिया इस्लामिया के डॉ. जाकिर हुसैन पुस्तकालय में पुलिस बर्बरता के बारे में कोई वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहा है। यह स्पष्ट किया जाता है कि इस वीडियो को विश्वविद्यालय ने जारी नहीं किया है।’’ जनसंपर्क अधिकारी के अनुसार जेसीसी विश्वविद्यालय के गेट नंबर सात के बाहर मौलाना मोहम्मद अली जौहर रोड पर संशोधित नागरिकता कानून (सीएए), राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) और राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) के खिलाफ आंदोलन चला रही है। अजीम ने कहा, ‘‘ यह स्पष्ट किया जाता है कि जेसीसी विश्वविद्यालय का कोई आधिकारिक निकाय नहीं है। जेसीसी के साथ किसी भी संवाद को विश्वविद्यालय के साथ संवाद नहीं समझा जाए।’’ जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ ने भी विश्वविद्यालय में बल प्रयोग को लेकर दिल्ली पुलिस की आलोचना की और उन पर पांच जनवरी को जेएनयू परिसर में आतंकवादियों को घुसाने का आरोप लगाया। 

(एजेंसी इनपुट के साथ)

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