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ना पूछेंगे तारांकित प्रश्न, ना बनेगे सरकार के लिए समस्या! यूपी बीजेपी का अपने विधायकों को सलाह - अतारांकित प्रश्न ही पूछें

By राजेंद्र कुमार | Updated: July 31, 2023 19:37 IST

विधानसभा के बीते सत्र में कई बार सत्तारूढ़ दल के विधायकों के तारांकित प्रश्न का विभागीय मंत्री उचित जवाब नहीं दे सके थे। ऐसे भी मौके आए जब अपने ही विधायकों के सवालों पर सरकार को घिरता देख संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना को दखल देना पड़ा।

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ठळक मुद्देप्रश्नकाल में विधायकों के जिन सवालों को शामिल किया जाता है वह तारांकित प्रश्न कहलाते हैंतारांकित प्रश्न के लिए विधानसभा में विभागवार दिन तय हैबीजेपी का अपने विधायकों को सलाह- तारांकित प्रश्न के बजाए अतारांकित प्रश्न ही पूछें

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान सत्ता पक्ष के किसी विधायक के सवाल पर विपक्षी दल सदन में योगी सरकार को घेरने ना पाए, इसके लिए सरकार और पार्टी के स्तर तैयारियां तेज हो गई। इसी क्रम में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सभी विधायकों से कहा गया है कि वह सदन में ज्यादा तारांकित प्रश्न ना लगाएं।

विधानसभा के इतिहास में यह पहला मौका है, जब सत्तापक्ष ने अपने सभी विधायकों को ये संदेश दिया है। ऐसे में अब सत्तारूढ़ दल के विधायक क्षेत्र की समस्या, शिकायतों के समाधान के लिए ज्यादा संख्या में अतारांकित प्रश्न ही लगाएंगे। ऐसा होने पर भाजपा के किसी भी विधायक के सवाल पर विपक्षी दल सदन में सरकार को घेर नहीं सकेंगे। और इस व्यवस्था के चलते सदन में भाजपा विधायको के सवाल भी सरकार के लिए कोई जोखिम नहीं खड़ा कर सकेंगे और ना ही कोई समस्या बनेंगे।

बीते बजट सत्र के दौरान योगी सरकार को अपने विधायकों के कई सवालों को लेकर सदन में विपक्षी दलों का निशाना बनना पड़ा था, इस कारण से इस बार यह व्यवस्था  लागू की जा रही है। उत्तर प्रदेश में विधानसभा के मानसून सत्र 7 से 11 अगस्त तक होगा। मानसून सत्र को सदन में चर्चा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सत्र के दौरान एक तरफ सरकार अपनी उपलब्धियां सदन में पेश करती है। वहीं दूसरी तरफ विपक्ष सदन में सरकार को घेरने की पुरजोर कोशिश करता। सरकार की खामियों को सदन में रखता है। योगी सरकार मानसून सत्र के दौरान अनुपूरक बजट पेश करने के साथ ही कई विधेयक भी सदन के पटल पर रखेगी।

योगी सरकार की मंशा कम समय में अपने सारे काम निपटाने की है। ऐसे में योगी सरकार सदन में ऐसा कोई जोखिम नहीं लेना चाहती है, ताकि विपक्ष को उसे घेरने का कोई मुद्दा मिले। इसके चलते ही भाजपा विधायकों को संदेश दिया गया है कि वह ज्यादा तारांकित प्रश्न ना लगाएँ। और यदि किसी विभाग से जुड़ी कोई खास समस्या है तो संबंधित मंत्री या संसदीय कार्य मंत्री से बात कर उसका हल निकालें। ताकि सदन में भाजपा विधायक के लगाए सवाल पर विपक्षी दलों के नेता को सरकार से सवाल करने का मौका ना मिले।

इसलिए उठाया गया यह कदम :

विधानसभा में अपने क्षेत्र की समस्या और शिकायतों के समाधान के लिए हर विधायक तारांकित प्रश्न और अतारांकित प्रश्न पूछते हैं। तारांकित प्रश्न के जवाब से संतुष्ट नहीं होने पर संबंधित विधायक या विपक्षी दल के विधायक सरकार से पूरक प्रश्न पूछते हैं। पूरक प्रश्न का जवाब नहीं दे पाने पर विपक्ष   की ओर से सदन में सरकार को घेरा जाता है। कई बार विपक्ष सदन का बर्हिगमन करता है। सदन की कार्यवाही का सीधा प्रसारण होने के चलते इससे जनता में संबंधित विभाग के सवाल का जवाब सरकार के स्तर से ना आने की स्थिति में सरकार की छवि खराब होती है।

विधानसभा के बीते सत्र में कई बार सत्तारूढ़ दल के विधायकों के तारांकित प्रश्न का विभागीय मंत्री उचित जवाब नहीं दे सके थे। ऐसे भी मौके आए जब अपने ही विधायकों के सवालों  पर सरकार को घिरता देख संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना को दखल देना पड़ा। ऐसे में भाजपा नेताओं ने अपने विधायकों को तारांकित प्रश्न लगाने से बचाने की सलाह दे डाली है। भाजपा विधायकों के अनुसार तारांकित प्रश्न केवल नीतिगत विषय से जुड़े सवाल लगाए जाते हैं। प्रश्नकाल में विधायकों के जिन सवालों को शामिल किया जाता है वह तारांकित प्रश्न कहलाते हैं।

तारांकित प्रश्न के लिए विधानसभा में विभागवार दिन तय है। प्रश्न पर संबंधित विभाग के मंत्री, संसदीय कार्य मंत्री या मुख्यमंत्री को सदन में जवाब पेश करना होता है। जबकि अतारांकित प्रश्न में विधायक अपने क्षेत्र के विकास और समस्याओं के समाधान के लिए लगाते हैं। लेकिन संबंधित मंत्री को सदन में उसका जवाब नहीं देना होता है। प्रश्न का जवाब सीधे विधानसभा की वेबसाइट पर अपलोड होता है या संबंधित विधायक को भेज दिया जाता है। अतारांकित प्रश्न सरकार के लिए समस्या नहीं बनते, इसलिए भाजपा विधायकों को कहा गया है कि वह तारांकित प्रश्न के बजाए अतारांकित प्रश्न ही पूछें।

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