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Vishu 2019: कल 15 अप्रैल को केरल नववर्ष 'विषु', होती है कृष्ण पूजा, जानें क्यों और कैसे मनाते हैं ये पर्व

By गुलनीत कौर | Updated: April 14, 2019 14:33 IST

केरल में मलयालम समुदाय द्वारा यह नववर्ष धूमधाम से मनाया जाता है। इस अवसर पर केरल में खास मेलों का आयोजन होता है। मंदिर सज जाते हैं। लोग सुन्दर वस्त्र पहनकर मंदिर जाते हैं। पूरे केरल में इस अवसर पर एक दिन की छूती भी होती है।

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केरल में मलयालम कैलेंडर के अनुसार मेष महीने की पहली तिथि को नववर्ष माना जाता है। हर साल यह दिन अंग्रेजी कैलेंडर के मुताबिक अप्रैल महीने के मध्य में आता है। इस साल यह तारीख 15 अप्रैल 2019, दिन सोमवार को पड़ रही है। केरल के पंचांग के अनुसार इसी दिन सूर्य अपनी राशि बदलकर 'मेडम' राशि में प्रवेश करते हैं। जिसके आबाद नववर्ष का शुभारम्भ होता है। 

केरल में मलयालम समुदाय द्वारा यह नववर्ष धूमधाम से मनाया जाता है। इस अवसर पर केरल में खास मेलों का आयोजन होता है। मंदिर सज जाते हैं। लोग सुन्दर वस्त्र पहनकर मंदिर जाते हैं। पूरे केरल में इस अवसर पर एक दिन की छूती भी होती है। स्कूल, कॉलेज, दफ्तर सभी बंद होते हैं।

केरल नववर्ष विषु का महत्व:

मलयालम कैलेंडर के पहले महीने की प्रथम तिथि 'विषु' को बेहद शुभ माना जाता है। इसदिन की शुरुआत 'विषुक्कणी' से की जाती है। यह एक खास प्रकार की पारंपरिक झांकी होती है जिसका दर्शन प्रातः काल किया जाता है। इसके लिए विषु की एक शाम पहले ही आवश्यक सामग्री को एकत्रित कर झांकी सजा दी जाती है और अगली सुबह यानी विषु पर्व के दिन धूमधाम से इसे केरल की सड़कों पर निकाला जाता है। 

इसके दर्शन करना सभी केरलवासियों के लिए शुभ होता है। इस पवित्र झांकी के दर्शन करने के बाद करेलवासी मंदिर में जाकर भगवान की पूजा करते हैं। केरल में भगवान विष्णु या फिर विष्णु के ही 8वें अवतार श्रीकृष्ण की सबसे अधिक पूजा होती है। कृष्ण की पूजा और उन्हें भोग लगाया जाता है। इसके बिना यह पर्व अधूरा माना जाता है।

पूजा के बाद लोग अपने घरों में चावल, केला, पान के पत्ते, कटहल, आम के पत्ते आदि चीजों से पकवान बनाते हैं। ये सभी इस दिन की शुभ खाद्य सामग्री होती  है। इन्हें पूजा में भी शामिल किया जाता है। पूजा, पकवान के बाद इसदिन घर के बड़े-बुजुर्गों का आशीर्वाद लेना भी जरूरी होता है। बड़े बुजुर्ग आशीर्वाद के रूप में अपने से छोटे सदस्यों को भेंट भी देते हैं। 

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