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महाभारत: भीम में आखिर कहां से आया था 10 हजार हाथियों का बल? जानिए, इसके पीछे की रोचक कहानी

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: July 26, 2019 11:51 IST

दुर्योधन की सबसे ज्यादा प्रतिद्वद्वीता भीम से थी और वह इसमें जीत हासिल करने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार था। इसलिए उसने भीम को बचपन में जान से मारने तक की कोशिश की।

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ठळक मुद्देदुर्योधन पांच पांडवों में सबसे ज्यादा भीम से ईर्ष्या करता थाये दुश्मनी ऐसी थी कि दुर्योधन ने बचपन में भीम को जहर देकर मारने तक की कोशिश कीभीम को हालांकि इसका फायदा ही हुआ और वे पहले से और शक्तिशाली हो गये

महाभारत के युद्ध में अगर अर्जुन ने अपने गांडीव धनुष से कौरवों को परास्त करने में बड़ी भूमिका निभाई तो वहीं, भीम भी दुर्योधन सहित दुशासन जैसे कौरवों की मौत का कारण बनें। भीम के बारे में कहा जाता है कि उनमें 10000 हाथियों जैसा बल था। एक बार तो उन्होंने अपनी शक्तिशाली भुजाओं से नर्मदा नदी का प्रवाह तक रोक दिया था। भीम की खासियत ये भी थी कि वे गदा युद्ध में पारंगत थे और दुर्योधन की भी ताकत गदा ही थी। इसलिए हमेशा से दोनों में अनबन रही।

दुर्योधन पांचों भाईयों में सबसे ज्यादा भीम से ही ईर्ष्या करता था। उसने कई बार छल से भीम को मारने की कोशिश की लेकिन कभी सफल नहीं हो सका। वैसे, दुर्योधन के ही एक छल का फायदा भीम को ये हुआ कि उन्हें 10000 हाथियों का बल मिल गया। आखिर कैसे मिला भीम को 10 हजार हाथियों का बल, जानिए

दुर्योधन की ईर्ष्या से भीम को हुआ फायदा 

दुर्योधन की सबसे ज्यादा प्रतिद्वद्वीता भीम से थी और वह इसमें जीत हासिल करने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार था। भीम की कमजोरी मिष्ठान और लजीज व्यंजन थे। दुर्योधन ने इसी का फायदा उठाया और बचपन मे एक बार उसने अकेले भीम को खीर खाने के लिए बुलाया। भीम ने खीर के लालच में दुर्योधन से मिले न्योते की बात अपने किसी भाई को नहीं बताई और चुपचाप उसके पास पहुंच गये। दु्र्योधन इसके लिए तैयार था और उसने भीम को ऐसी खीर पड़ोसी जिसमें विषैले नागों का जहर मिला हुआ था।

खीर खाते ही भीम बेहोश हो गये और दुर्योधन ने मौका देखकर उन्हें नदी में फेंक दिया। भीम मूर्छित थे और इस अवस्था में वह पानी में बहुत गहरे चले गये और नागों के लोक में पहुंच गये। नागों ने जब अपने बीच एक बालक को देखा तो दुश्मन समझ उन्हें डंसने लगे। भीम में पहले से ही जहर भरा हुआ और ऊपर से नागों के डंसने से जहर का असर कम होने लगा और उन्हें होश आ गया। 

भीम को मिला दस हजार हाथियों का बल

होश में आने के बाद भीम ने भी नागों से लोहा लेना शुरू कर दिया और सभी नागों को मारने लगे। यह खबर नागराज वासुकि के पास पहुंची तो वे दौड़े-दौड़े वहां पहुंचे। वासुकि के साथ आर्यक नाग भी पहुंचे। आर्यक दरअसल भीम के नाना के नाना थे। आर्यक ने भीम को पहचान लिया। इसके बाद भीम ने भी खीर वाली बात आर्यक और दूसरे नागों को सुनाई। यह सुनकर आर्यक ने भीम को हजार हाथियों का बल देने वाले कुंड का रस पिने को दिया। इसी रस को पीकर भीम की शक्ति बढ़ जाती है और उनके पास 10 हजार हाथियों का बल आ जाता है।

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