हर साल तीर्थराज प्रयागराज में होने वाले कुंभ या माघ मेले में लोग दूर-दराज से डुबकियां लगाने आते हैं। मकर संक्राति से शुरू होने वाले इस पावन पर्व की मान्यता है कि इस माघ महीने में जो कोई श्रद्धालु सच्चे मन से मां गंगा में स्नान करता है उसके सभी पाप कट जाते हैं। पूरे माघ के महीने में कुल छह दिनों पर गंगा स्नान को प्रमुख माना गया है। इनमें मकर संक्राति, पौष पूर्णिमा, मौनी अमावस्या, माघी पूर्णिमा, बसंत पंचमी और महाशिवरात्री को माना जाता है। आइए आपको बताते हैं इन प्रमुख स्नान के दिनों की तिथियां। 

पहला स्नान मकर संक्राति पर 

माघ का सबसे पहला स्नान मकर संक्राति से शुरू होता है। इस साल मकर संक्राति का ये पावित्र दिन 14 जनवरी को पडज़ रहा है। इसे शाही स्नान और राजयोगी स्नान भी कहा जाता है। इस दिन संगम की रेत पर विभिन्न अखाड़ों के संतों की शोभा यात्रा निकलती है और स्नान होता है। सिर्फ वहीं नहीं आम जनता की भी अच्छी खासी भीड़ घाटों पर इस दिन देखी जा सकती है। 

पौष पूर्णिमा में होती है मोक्ष की प्राप्ति

इस साल 21 जनवरी को पौष पूर्णिमा की तिथि पड़ रही है। पुरानी कथाओं के अनुसार पौष महीने के 15वें दिन पर पौष पूर्णिमा पड़ती है। मान्यता है कि जो व्यक्ति इस दिन गंगा का स्नान करता है उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। 

मौनी अमावस्या के स्नान से कटते हैं पाप

कुंभ मेले का तीसरा और सबसे बड़ा स्नान होता है मौनी अमावस्या का। इस साल मौनी अमावस का पर्व 4 फरवरी को पड़ रहा है। रात से ही श्रद्धालुओं की भीड़ घाटों पर देखी जा सकती है। इस साल मौनी अमावस्या चार फरवरी को पड़ रही है। मान्यता है कि मौनी अमावस्या की भोर में नहाने इंसान के सभी पाप कट जाते हैं। 

बंसत पंचमी पर हुआ था मां सरस्वती का जन्म

मान्यता है कि मां सरस्वती का जन्म बसंत पंचमी के दिन हुआ था। माघ महीने की पंचमी को हर साल बंसत का ये पर्व मनाया जाता है। इस साल बंसत पंचमी 10 फरवरी को है। माघ मेले में इस दिन भी लोगों की भारी भीड़ गंगा स्नान को जुटती है। इसी दिन से बंसत ऋतु का आरंभ होता है। मान्यता है कि इस दिन स्नान से मनुष्य को मानसिक शांति मिलती है।

माघी पूर्णिमा के दिन धरती पर पधारते हैं देवता

माघ मेले में अगला स्नान होता है माघी पूर्णिमा का। इसके कल्पवास की पूर्णता का पर्व भी कहा जाता है। इस साल माघी पूर्णिमा 19 फरवरी को पड़ रही है। हिन्दू मान्यताओं में कहा जाता है कि इसी दिन देवता स्वर्ग से धरती पर आते हैं। तो इस दिन के स्नान को बेहद पवित्र और महत्वपूर्ण माना जाता है। 

महाशिवरात्रि पर नहाने से होते हैं शिव प्रसन्न

कुंभ मेले का आखिरी स्नान होता है महाशिवरात्रि का। इस साल यह पर्व 4 मार्च को पड़ रहा है। माघ मेले का ये आखिरी दिन होता है। इसके बाद से सभी कल्पवासी अपने-अपने घर चले जाते हैं। भगवान शिव और पार्वती के इस पर्व पर कुंभ आए सभी भक्त संगम में डुबकी लगाते हैं। 


Web Title: kumbh mela 2019 know the date and significance of Makar Sankranti, Paush Purnima, Mauni Amavasya, Basant Panchami, Maghi Purnima and Maha Shivratri
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