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ज्येष्ठ अमावस्या 2020: ज्येष्ठ अमावस्या आज, बहते जल में जरूर प्रवाहित करें ये 1 चीज-मिलेगा शुभ समाचार

By मेघना वर्मा | Updated: May 22, 2020 08:43 IST

ज्येष्ठ अमावस्या वाले दिन शनि जयंती भी पड़ती है। जिसका शास्त्रों में महत्व बताया गया है।

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ठळक मुद्देज्येष्ठ अमावस्या वाले दिन सूर्य और चंद्र वृषभ राशि में एक साथ विराजमान होंगे। अमावस्या के बाद चंद्र दर्शन से शुक्ल पक्ष आरंभ हो जाएगा।

हिन्दू धर्म में अवास्या को बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। हिन्दू पंचाग के अनुसार इस ज्येष्ठ महीने की अमावस्या इस बार 22 मई को है। इसी दिन महिलाएं वट सावित्री का व्रत भी करेंगी। माना जाता है कि इस दिन पूजा और दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। सिर्फ यही नहीं अमावस्या वाले दिन पितरों का तर्पण भी करते हैं। 

ज्येष्ठ अमावस्या वाले दिन सूर्य और चंद्र वृषभ राशि में एक साथ विराजमान होंगे। अमावस्या के बाद चंद्र दर्शन से शुक्ल पक्ष आरंभ हो जाएगा। आइए आपको बताते हैं ज्येष्ठ अमावस्या की पूजा विधि और शुभ मुहूर्त-

ज्येष्ठ अमावस्या शुभ मुहूर्त

ज्येष्ठ अमावस्या वाले दिन शनि जयंती भी पड़ती है। जिसका शास्त्रों में महत्व बताया गया है। अमावस्या तिथि की शुरुआत 21 मई रात 9 बजकर 35 मिनट से हो रही है। जो 22 मई को 11 बजकर 8 मिनट पर खत्म होगी। व्रती 22 मई को किसी भी समय पूजा, जप, तप और दान पुण्य कर सकते हैं। 

ऐसे करें विशेष पूजा

अमावस्या वाले दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर किसी पवित्र नदी या कुंड में स्नान करने का विधान हैं। मगर इस लॉकडाउन में ये संभव नहीं। इसलिए घर में नहाने के पानी में गंगाजल मिलाकर उस पानी से स्नान करें। इसके बाद सूर्य देव को जलाभिषेख करें। सूर्य को अर्घ्य देने के बाद बहते हुए जल में तिल प्रवाहित करें। इस दिन बरगद के पेड़ की भी उपासना करना शुभ माना जाता है।

अमावस्या पर क्या करें क्या नहीं-

1. ज्येष्ठ अमावस्या वाले दिन गंगाजल से स्नान करें और पितरों की शांति के लिए उपाय करें। 2. इस दिन आप उपवास कर सकते हैं इससे पितृदोष और गृहदोष दूर हो जाते हैं। 3. हनुमान चालीसा का पाठ करना फलदायी है।4. शनिदोष से मुक्ति के उपाय भी जरूर करें। 5. आज के लिए लोहा या उड़द के दाल का दान करें। 6. लड़ाई-झगड़े वाद-विवाद से बचें। 7. तामसिक चीजों का सेवन ना करें। 8. नशे से परहेज करें।9. शारीरिक संबंध ना बनाएं। 

टॅग्स :अमावस्यापूजा पाठहिंदू त्योहारवट सावित्री व्रतशनि देव
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