लाइव न्यूज़ :

संतान प्राप्ति और पितृ दोष मुक्ति के लिए रखें 'भीष्म अष्टमी' का व्रत, जानें विधि

By धीरज पाल | Updated: January 24, 2018 15:48 IST

धर्म शास्त्र के मुताबिक भीष्म पितामह ने सूर्य के उत्तरायण होने पर प्राण त्यागे थे। उनकी याद में यह व्रत किया जाता है।

Open in App

हिन्दू धर्म के पवित्र माह 'माघ' में एक के बाद एक कई त्यौहार आते हैं। मकर संक्रांति, मौनी अमावस्या, बसंत पंचमी और अब भीष्म अष्टमी। माघ मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी को भीष्म अष्टमी कहते हैं। इस बार भीष्म अष्टमी 25 जनवरी (बृहस्पतिवार) को पड़ रहा है क्योंकि इस दिन माना जाता है कि भीष्म पितामह ने अपने प्राण त्याग दिए थे। इस तिथि पर व्रत करने का विशेष महत्व होता है। माना जाता है कि इस दिन व्रत रखने से सारे कष्ट और पाप नष्ट हो जाते हैं।

अपनी मृत्यु की तिथि खुद चुनी थी 

महाभारत के सबसे प्रबल योद्धाओं में से एक थे भीष्म पितामह जो हस्तिनापुर के राजा शांतनु और देवनदी गंगा के पुत्र थे। भीष्म पितामह ने महाभारत की लड़ाई में कौरवों की ओर से युद्ध किया था। उन्हें अपने पिता से इच्छामृत्यु का वरदान प्राप्त था। पुराणों में बताया गया है कि युद्ध के मैदान में  जब भीष्म पितामह को तीर लगे, वह समय मलमास का था जो शुभ कार्यों के  लिए उत्तम नहीं होता है।

अर्जुन ने शिखंडी की आड़ में भीष्म पर इस कदर बाण वर्षा की कि उनका शरीर बाणों से बंध गया और वह बाण शय्या पर लेट गए किंतु उन्होंने अपनी दृढ़ इच्छा शक्ति और प्रभु कृपा के चलते मृत्यु को धारण नहीं किया क्योंकि उस समय सूर्य दक्षिणायन था। जैसे ही सूर्य ने मकर राशि में प्रवेश किया और सूर्य उत्तरायण हो गया,  भीष्म ने अर्जुन के बाण से निकली गंगा की धार पान कर प्राण त्याग, मोक्ष प्राप्त किया। 

उनकी याद में रखते हैं व्रत

धर्म शास्त्र के मुताबिक, जिस दिन भीष्म पितामह ने सूर्य के उत्तरायण होने पर प्राण त्यागे थे, उसे भीष्म अष्टमी के नाम से जाना जाता है। इसदिन की याद में ही भीष्म अष्टमी पर व्रत किया जाता है। इस दिन कुश, तिल, जल से भीष्म पितामह का तर्पण करना चाहिए। कहा जाता है कि ऐसा करने से मनुष्य को सभी पापों से मुक्ति मिलती है। साथ ही उनके पुरखों को भी आत्मा की शांति मिलती है।

पितृदोष व पुण्य के लिए रखें व्रत

यदि आप पितृदोष से मुक्ति या संतान की प्राप्ति के लिए यह व्रत काफी महत्व रखता है क्योंकि महाभारत के सभी पात्रों में भीष्म पितामह विशिष्ट स्थान रखते हैं।  कहा जाता है कि इस दिन पवित्र नदियों में स्नान, दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। भीष्म अष्टमी पर जल में खड़े होकर ही सूर्य को अर्घ्य देना चाहिए। पुराणों के मुताबिक उन्होंने अपने पिता की खुशी के लिए आजीवन ब्रह्मचर्य का पालन किया। साथ ही उन्हें न्यायप्रिय, सत्यनिष्ठ एवं गंगापुत्र के रूप में भी जाना जाता है। 

टॅग्स :महाभारतहिंदू धर्ममाघ मेलाभगवान शिव
Open in App

संबंधित खबरें

पूजा पाठकैसे करें हनुमान बाहुक का पाठ?, मंगलवार-शनिवार को शुरू कर पाठ?, देखिए वीडियो

पूजा पाठHanuman Janmotsav 2026: रूद्र के अवतार हनुमान जी को अमरता का वरदान?, मंगलवार को जरूर करें बजरंग बाण?, वीडियो

पूजा पाठHappy Ram Navami 2026 Wishes: राम नवमी की हार्दिक शुभकामनाएं, दोस्तों और रिश्तेदारों को भेजें ये मैसेज

ज़रा हटकेबाबा धाम का वीडियो वायरल! भीड़ कंट्रोल या बदसलूकी? दर्शन व्यवस्था पर उठे सवाल

भारतआदिकाल से वसुधैव कुटुम्बकम है भारतीय संस्कृति?, सीएम यादव ने कहा-मानव जीवन में आनंद आयाम, हमारे सुख-दु:ख के बीच अंतर को समझने?

पूजा - पाठ अधिक खबरें

पूजा पाठPanchang 05 April 2026: आज कब से कब तक है राहुकाल और अभिजीत मुहूर्त का समय, देखें पंचांग

पूजा पाठRashifal 05 April 2026: आज शत्रुओं की चाल से बचें वृषभ राशि के लोग, कर्क राशिवालों के जीवन में खुशियां

पूजा पाठGuru Nakshatra Parivartan 2026: अप्रैल में इन 5 राशिवालों का शुरू होगा गोल्डन पीरियड, मोटी कमाई की उम्मीद

पूजा पाठPanchang 04 April 2026: आज कब से कब तक है राहुकाल और अभिजीत मुहूर्त का समय, देखें पंचांग

पूजा पाठRashifal 04 April 2026: कुंभ राशिवालों को अचानक धनलाभ मिलने की संभावना, जानें सभी राशियों का फल