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Astrology: ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों का खेल समझा रहे दिल्ली के ज्योतिषी पंडित उमेश चंद्र पंत

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: April 16, 2024 17:50 IST

"ज्योतिषं चक्षुर्वेदानां" से तात्पर्य है कि ज्योतिष वेदों की आँखें हैं, अर्थात् ज्योतिष वेदों का वह भाग है जो दिव्य ज्ञान और अंतर्दृष्टि प्रदान करता है।

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ठळक मुद्देदिल्ली के प्रतिष्ठित ज्योतिषी पंडित उमेश चंद्र पंत शास्त्रों का उद्धरण लेकर बता रहे हैं।अब हम इस श्लोक का सम्पूर्ण अर्थ समझने का प्रयास करते हैं।"लोकानाम् प्रतिपत्तये" का अर्थ है मानव समाज की समझ और कल्याण के लिए।

नई दिल्लीः ज्योतिष विज्ञान, जो कि वेदों का एक महत्वपूर्ण अंग है, मानव जीवन पर ग्रहों के प्रभावों का अध्ययन करता है। इसे एक प्रकार का सांस्कृतिक खगोल विज्ञान भी कहा जा सकता है, जिसमें नौ प्रमुख ग्रहों- सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु, और केतु के जीवन पर प्रभावों को माना जाता है। दिल्ली के प्रतिष्ठित ज्योतिषी पंडित उमेश चंद्र पंत शास्त्रों का उद्धरण लेकर बता रहे हैं। ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों के प्रभाव और उनके महत्व पर अनेक श्लोक और सूत्र मिलते हैं। एक प्रसिद्ध और अक्सर उद्धृत श्लोक है, जो सामान्य रूप से ग्रहों के प्रभाव की व्याख्या करता है।

"ज्योतिषं चक्षुर्वेदानां, योगो ज्योतिषमुच्यते।

सूर्यादिग्रहणां योगात्, लोकानाम् प्रतिपत्तये॥"

अब हम इस श्लोक का सम्पूर्ण अर्थ समझने का प्रयास करते हैं

"ज्योतिषं चक्षुर्वेदानां" से तात्पर्य है कि ज्योतिष वेदों की आँखें हैं, अर्थात् ज्योतिष वेदों का वह भाग है जो दिव्य ज्ञान और अंतर्दृष्टि प्रदान करता है। यह मानव जीवन की गहराई और जटिलताओं को समझने का माध्यम है।

"योगो ज्योतिषमुच्यते" का अर्थ है कि योग, जो कि संयोग या संगठन को दर्शाता है, ज्योतिष में महत्वपूर्ण है। इसका मतलब है कि ग्रहों के बीच के योग या संयोग, ज्योतिष शास्त्र के मूल तत्व हैं जो जीवन के विभिन्न पहलुओं को प्रभावित करते हैं।

"सूर्यादिग्रहणां योगात्" से यह दर्शाया गया है कि सूर्य और अन्य ग्रहों के योग से, यानी उनके संयोग से, जीवन में विभिन्न घटनाएँ और परिवर्तन आते हैं। "लोकानाम् प्रतिपत्तये" का अर्थ है मानव समाज की समझ और कल्याण के लिए।

यह संकेत करता है कि ज्योतिष ज्ञान मानवता के कल्याण और उनके जीवन को समझने के लिए उपयोगी है। यह श्लोक ज्योतिष शास्त्र की महत्ता और ग्रहों के योगों के प्रभाव को समझने की आवश्यकता को दर्शाता है। यह बताता है कि कैसे ग्रहों के विभिन्न संयोग व्यक्तियों के जीवन पर विभिन्न प्रकार से प्रभाव डालते हैं और उनके भाग्य को आकार देते हैं।

ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों का महत्व संक्षिप्त में समझते हैं

ज्योतिष में प्रत्येक ग्रह का अपना एक विशेष चरित्र और महत्व होता है। सूर्य, जीवन शक्ति और आत्मा का प्रतीक है, चंद्र मन और भावनाओं को दर्शाता है, मंगल ऊर्जा और साहस का प्रतिनिधित्व करता है, बुध बुद्धि और संचार का कारक है, गुरु ज्ञान, उदारता और समृद्धि का प्रतीक है, शुक्र सुख, सौंदर्य, और प्रेम को दर्शाता है, शनि कर्म और अनुशासन का प्रतिनिधित्व करता है, राहु और केतु कर्मिक चुनौतियों और आध्यात्मिक विकास को दर्शाते हैं।

ज्योतिष शास्त्र में जन्मकुंडली और ग्रहों का प्रभाव

जन्म के समय ग्रहों की स्थिति को जन्मकुंडली में दर्ज किया जाता है, जो व्यक्ति के जीवन पर उनके प्रभावों का विश्लेषण करती है। यह व्यक्ति के स्वभाव, प्रवृत्तियों, स्वास्थ्य, वित्तीय स्थिति, करियर की संभावनाओं और वैवाहिक जीवन के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करती है।

ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों की भूमिका जन्म कुंडली में ग्रहों की स्थिति व्यक्ति के जीवन की दिशा और चुनौतियों को दर्शाती है। ग्रहों की दशा, अंतर्दशा, और गोचर व्यक्ति के जीवन में सुख-दुःख, सफलता-असफलता के विभिन्न चरणों को दर्शाते हैं। विशेष ग्रह स्थितियाँ जैसे कि ग्रहण दोष, कालसर्प दोष, और मांगलिक दोष आदि, विवाह, करियर, और आर्थिक स्थिति पर विशेष प्रभाव डाल सकते हैं।

ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों का उपचार

ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों के नकारात्मक प्रभावों को कम करने के लिए विभिन्न उपाय सुझाए गए हैं। ये उपाय रत्न धारण करना, मंत्र जाप, पूजा-पाठ, दान, योग और ध्यान जैसी आध्यात्मिक प्रक्रियाओं में शामिल होना शामिल हैं। इन उपायों का उद्देश्य व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाना और नकारात्मक प्रभावों को कम करना होता है।

आधुनिक समय में ज्योतिष की प्रासंगिकता

आधुनिक समय में, जब विज्ञान और तकनीक ने अभूतपूर्व विकास किया है, तब भी ज्योतिष शास्त्र अपनी प्रासंगिकता बनाए हुए है। व्यक्तियों और समाजों में इसका महत्व उस समय और भी अधिक स्पष्ट हो जाता है जब वे जीवन के विभिन्न पहलुओं में मार्गदर्शन और समाधान की तलाश करते हैं।

ज्योतिष विज्ञान न केवल भविष्य के बारे में जानकारी प्रदान करता है, बल्कि यह व्यक्तिगत विकास और आत्म-साक्षात्कार की यात्रा में भी सहायक होता है। ज्योतिष शास्त्र एक भारतीय शास्त्र सम्मत और गहन विज्ञान है जिसमें ग्रहों की गति और उनके प्रभावों का अध्ययन किया जाता है।

यह व्यक्ति के जीवन में विभिन्न घटनाओं और परिवर्तनों की भविष्यवाणी करने में सहायक होता है और उन्हें सकारात्मक दिशा में मार्गदर्शन करता है। ज्योतिष विज्ञान न केवल अतीत और वर्तमान की समझ प्रदान करता है, बल्कि भविष्य के लिए एक दर्पण का कार्य भी करता है, जिससे व्यक्ति अपने जीवन को और अधिक सार्थक और पूर्ण बना सकते हैं।

भारत के अनुभवी ज्योतिषी पंडित उमेश चंद्र पंत का एक परिचय

पंडित उमेश चंद्र पंत दिल्ली, भारत के एक प्रसिद्ध ज्योतिषी हैं, जिन्होंने वैदिक ज्योतिष के क्षेत्र में अपनी गहरी ज्ञान और विशेषज्ञता के लिए व्यापक पहचान प्राप्त की है। वे ThreeBestRated द्वारा 2017 से 2024 तक लगातार आठ वर्षों के लिए दिल्ली, भारत के सर्वश्रेष्ठ ज्योतिषी के रूप में सम्मानित किए गए हैं​ ।

पंडित जी की प्रतिबद्धता नैतिक, प्रासंगिक, व्यावहारिक और परिणाम-उन्मुख ज्योतिषीय सेवाएँ प्रदान करने की है, जिससे उन्होंने भारत भर के लोगों का विश्वास और सम्मान अर्जित किया है। उनका ज्ञान और अनुभव व्यक्तियों को उनके जीवन के विभिन्न पहलुओं में मार्गदर्शन और सहायता प्रदान करने में सहायक रहा है।

उन्हें ज्योतिष रत्न, ज्योतिष भूषण, ज्योतिष प्रभाकर, ज्योतिष शास्त्राचार्य, और ज्योतिष ऋषि जैसे कई सम्मानों से भी नवाजा गया है​ । पंडित जी ने अपने गहरे ज्ञान और अनुभव के साथ न केवल भारत में बल्कि विश्व भर के अपने संपर्क में आने वाले लोगों का विश्वास और सम्मान प्राप्त किया है, और उनके परामर्श ने कई लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने में मदद की है।

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