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नाना पटोले के इस्तीफ़े से महाराष्ट्र अघाड़ी सरकार के घटक दलों में उभरा विश्वास का संकट

By शीलेष शर्मा | Updated: February 4, 2021 19:08 IST

महाराष्ट्र विधान सभा के अध्यक्ष नाना पटोले से भी प्रभारी एच के पाटिल ने लंबी चर्चा की और उसके बाद पाटिल ने राहुल गांधी से मुलाक़ात कर पटोले को नया अध्यक्ष बनाने का निर्णय किया। 

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ठळक मुद्देप्रभारी महासचिव के सी वेणुगोपाल पटोले को नया प्रदेश अध्यक्ष बनाये जाने के लिये पैरवी कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने कांग्रेस नेताओं से पूछा कि अब नए अध्यक्ष के चुनाव में अगर गंभीर संकट खड़ा हुआ तब क्या होगा।शरद पवार ने कहा कि अध्यक्ष पद हम चुनाव लड़ेंगे।

नई दिल्लीः महाराष्ट्र विधानसभा के अध्यक्ष नाना पटोले के अध्यक्ष पद से इस्तीफ़ा देने के कारण महाराष्ट्र अघाड़ी सरकार के घटक दलों के बीच विश्वास का संकट पैदा हो गया है।

महाराष्ट्र विधानसभा के अध्यक्ष नाना पटोले प्रदेश कांग्रेस के अगले प्रमुख होंगे। लिहाजा उन्होंने बृहस्पतिवार को पद से इस्तीफा दे दिया। विधानसभा सूत्रों ने बताया कि पटोले ने विधानसभा के उपाध्यक्ष नरहरि झीरवाल को अपना इस्तीफा सौंपा।

पटोले भंडारा जिले की सकोली सीट से विधायक हैं। पार्टी सूत्रों ने बताया कि वह प्रदेश प्रमुख के तौर पर राजस्व मंत्री बालासाहेब थोराट का स्थान लेंगे। महाराष्ट्र में शिवसेना, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और कांग्रेस की गठबंधन सरकार है। थोराट की अगुवाई में कांग्रेस के मंत्रियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने हाल में दिल्ली में पार्टी नेतृत्व से मुलाकात की थी। महाराष्ट्र विधानसभा का बजट सत्र एक मार्च से शुरू होगा।

सूत्रों के अनुसार यह हालत उस समय पैदा हुये, जब नाना पटोले इस्तीफ़ा देने के लिये बाला साहब थोराट,अशोक चव्हाण तथा सुनील केदार के साथ मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से मिलने पहुंचे। सूत्रों ने दावा किया कि पटोले का अध्यक्ष पद से इस्तीफ़ा पाकर ठाकरे न केवल नाराज़ हुए, बल्कि उन्होंने टिप्पणी की कि अहमद पटेल के रहते ऐसा कभी नहीं हुआ कि बिना पूर्व चर्चा के ऐसा फ़ैसला लिया गया हो।

केसी वेणुगोपाल की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए मुख्यमंत्री ने कांग्रेस नेताओं से पूछा कि अब नए अध्यक्ष के चुनाव में अगर गंभीर संकट खड़ा हुआ तब क्या होगा। गुप्त चुनाव में कौन विधायक किधर वोट करेगा किसी को पता ही नहीं।

ऐसे हालत सरकार को अस्थिर कर सकते हैं। एक तरफ़ मुख्यमंत्री की टिप्पणी तो दूसरी तरफ़ शरद पवार का ताज़ा बयान, जिसमें उन्होंने अध्यक्ष के पद पर राकांपा की दावेदारी के संकेत दिए हैं। माना जा रहा है कि यदि वास्तव में पवार दावेदारी को लेकर गंभीर हैं तो घटक दलों के बीच अविश्वास की गहरी लकीर खिंच सकती है जिसके लिये भाजपा लंबे समय से इंतज़ार कर रही है।  

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