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कोविड-19: एमपी विधानसभा का मानसून सत्र स्थगित, 20 से 24 जुलाई तक होने वाला था

By शिवअनुराग पटैरया | Updated: July 17, 2020 16:42 IST

कोरोना के बढ़ते संक्रमण के कारण मध्य प्रदेश विधानसभा का 20 जुलाई से होने वाला बजट सत्र हुआ स्थगित। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ पूर्व मुख्य मंत्री कमलनाथ एवं अन्य नेताओं के साथ हुई बैठक में लिया गया फैसला।

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ठळक मुद्देविधानसभा के मानसून सत्र के संबंध में आज बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया। राज्यपाल की अनुमति के बाद सत्र स्थगित किए जाने की अधिसूचना जारी कर दी जाएगी।मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में मानसून सत्र के आयोजन को लेकर प्रतिपक्ष के साथ बैठक आयोजित की गई थी।

भोपालः मध्य प्रदेश में कोरोना के बढ़ते प्रकोप के कारण आगामी बीस जुलाई से आयोजित राज्य विधानसभा का मानसून सत्र को स्थगित कर दिया गया। सत्र स्थगित करने का फैसला आज सर्वदलीय बैठक में सर्वसम्मति से लिया गया।

विधानसभा के मानसून सत्र के संबंध में आज बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया। बैठक में प्रोटेम स्पीकर रामेश्वर शर्मा, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ , पूर्व विधानसभा अध्यक्ष एनपी प्रजपति और संसदीय कार्यमंत्री नरोत्तम मिश्रा भी मौजूद थे।

बैठक के बाद निर्णय को राज्यपाल आनंदी बैन पटेल के पास भेज दिया गया। राज्यपाल की अनुमति के बाद सत्र स्थगित किए जाने की अधिसूचना जारी कर दी जाएगी। बैठक के बाद संवददाताओं से चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में मानसून सत्र के आयोजन को लेकर प्रतिपक्ष के साथ बैठक आयोजित की गई थी।

बैठक में कोरोना के देश दुनिया के साथ मध्य प्रदेश में बढ़ते प्रकोप को लेकर तय किया गया कि सत्र का आयोजन टाल दिया जाए। आपने कहा कि केन्द्र सरकार और राज्य सरकार की भी गाइड लाइन है कि कोरोना के कारण कोई बड़े आयोजन न किये जाएं।

इसीलिए हमने सर्वसंमत्ति से यह फैसला लिया है। गौरतलब है कि विधानसभा के 20 से 24 जुलाई तक बुलाए गए मानसून सत्र में राज्य का बजट पेश होना था। सामान्य रूप से किसी भी राज्य सरकार का बजट फरवरी से मार्च माह के बीच प्रस्तुत होता है। लेकिन मध्य प्रदेश में गत मार्च के महिने में कमलनाथ सरकार के गिर जाने और उसके बाद कोरोना के बढ़ते प्रकोप के चलते लेखानुदान से प्रदेश का खर्च चल रहा है। वर्तमान स्थिति में यह स्पष्ट हो गया है कि अब फिर अध्यादेश के जरिए लेखानुदान लाया जाएगा।

 

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