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एमपी में कांग्रेस को एक और झटका, लोधी के बाद नेपानगर mla सुमित्रा देवी कासडेकर ने दिया इस्तीफा

By शिवअनुराग पटैरया | Updated: July 17, 2020 16:38 IST

कांग्रेस विधायक प्रद्युम्न सिंह लोधी के कुछ दिन बाद जिस तरह सुमित्रा देवी कासडेकर ने कांग्रेस और विधानसभा से इस्तीफा दिया उससे यह संकेत साफ मिल रहे हैं कि आने वाले दिनों में कांग्रेस के कई और विधायक विधानसभा और पार्टी से इस्तीफा देकर भाजपा के साथ जा सकते हैं।

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ठळक मुद्दे नेपानगर की कांग्रेस विधायक सुमित्रा देवी कासडेकर को, पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अरुण यादव का करीबी माना जाता है।सुमित्रा देवी कासडेकर के इस्तीफे के साथ ही मध्य प्रदेश विधानसभा में कांग्रेस की सदस्य संख्या घटकर 90 हो गई है। भाजपा के 107, कांग्रेस के 90, बसपा के 2, सपा के 1 और 4 निर्दलीय विधायक हैं। छोटे दलों के 3 विधायकों के साथ ही भाजपा को निर्दलीय विधायकों का भी समर्थन प्राप्त है।

भोपालः मध्य प्रदेश की राजनीति में कांग्रेस को एक और बड़ा झटका लगा है। बड़ामलहरा के कांग्रेस विधायक प्रद्युम्न सिंह लोधी के बाद, प्रदेश के नेपानगर से कांग्रेस की विधायक सुमित्रा देवी कासडेकर ने आज विधानसभा की सदस्यता से दिया इस्तीफा दे दिया।

मध्य प्रदेश विधानसभा ने भी उनके इस्तीफे की पुष्टि की है। नेपानगर की कांग्रेस विधायक सुमित्रा देवी कासडेकर को, पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अरुण यादव का करीबी माना जाता है। बुंदेलखंड के बड़ामलहरा क्षेत्र के कांग्रेस विधायक प्रद्युम्न सिंह लोधी के कुछ दिन बाद जिस तरह सुमित्रा देवी कासडेकर ने कांग्रेस और विधानसभा से इस्तीफा दिया उससे यह संकेत साफ मिल रहे हैं कि आने वाले दिनों में कांग्रेस के कई और विधायक विधानसभा और पार्टी से इस्तीफा देकर भाजपा के साथ जा सकते हैं।

मध्य प्रदेश विधानसभा में कांग्रेस की सदस्य संख्या घटकर 90 हो गई है

सुमित्रा देवी कासडेकर के इस्तीफे के साथ ही मध्य प्रदेश विधानसभा में कांग्रेस की सदस्य संख्या घटकर 90 हो गई है। इस समय विधानसभा में भाजपा के 107, कांग्रेस के 90, बसपा के 2, सपा के 1 और 4 निर्दलीय विधायक हैं। छोटे दलों के 3 विधायकों के साथ ही भाजपा को निर्दलीय विधायकों का भी समर्थन प्राप्त है।

गौरतलब है कि बीते मार्च के महीने में ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ कांग्रेस के 22 विधायकों (इनमें 6 मंत्री भी थे) के द्वारा बगावत किए जाने के साथ ही कांग्रेस की कमलनाथ सरकार का पतन हो गया था। इसके बाद 23 मार्च को शिवराज सिंह चौहान ने राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी।

मुख्यमंत्री के शपथ लेने के लगभग 1 माह बाद 21 अप्रैल को उनके मंत्रिमंडल में 5 लोगों को शामिल किया गया था। इनमें से 2 गोविन्द राजपूत और तुंलसी सिलावट वह पूर्व मंत्री थे, जो कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए थे। इसके बाद 2 जुलाई को हुए मंत्रिमंडल के विस्तार में कांग्रेस से आए 12 लोगों को मंत्री बनाया गया।

इसके बाद 12 जुलाई को कांग्रेस के बड़ामहलरा क्षेत्र के कांग्रेस विधायक, प्रद्युम्न सिंह लोधी पार्टी और विधानसभा की सदस्यता छोड़कर भाजपा में आ गए। इसके बाद उन्हें कैबिनेट मंत्री के दर्जे के साथ मध्य प्रदेश नागरिक आपूूर्ति निगम का अध्यक्ष बना दिया गया। बताया जा रहा है कि सुमित्रा देवी को भी कोई महत्वपूर्ण जबावदारी मिल सकती है। 

टॅग्स :मध्य प्रदेशकांग्रेसभारतीय जनता पार्टी (बीजेपी)ज्योतिरादित्य सिंधियाकमलनाथशिवराज सिंह चौहान
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