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अगर 2019 लोकसभा चुनाव में होता है 'कर्नाटक जैसा हाल', तो किसे प्रधानमंत्री बनाएगी कांग्रेस?

By खबरीलाल जनार्दन | Updated: June 27, 2018 13:32 IST

भारतीय जनता पार्टी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चेहरे पर लड़ेगी चुनाव।

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कनार्टक के हालिया चुनाव रिजल्ट के बाद जिस तरह से सबसे छोटे दल के मुखिया को कांग्रेस ने मुख्यमंत्री बनाया, उससे कई छोटे दलों में प्रधानमंत्री पद पहुंचने को लेकर सुगबुगाहट बढ़ गई है। एक तरफ भारतीय जनता पार्टी है, जो 2019 सीधे-सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चेहरे पर चुनाव लड़ेगी, तो दूसरी तरफ पीएम रेस में कई नाम अचानक हचकोले मारने लगे हैं।

दरअसल, हाल ही में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने एक टीवी शो में कहा कि सयुंक्त विपक्ष में किसी ने अभी राहुल गांधी को प्रधानमंत्री उम्मीदवार नहीं बताया है। दूसरी ओर भले कर्नाटक चुनावों के दौरान खुद को प्रधानमंत्री उम्मीदवार बताने वाले राहुल गांधी, बीजेपी को सत्ता से बेदखल करने के लिए किसी भी रास्ते अपना सकते हैं।

उल्लेखनीय है कि भारतीय राजनीति में जादूई आंकड़े तक पहुंचाने वाली पा‌र्टियां प्रमुख पदों की मांग करती हैं। भले उनके पास नंबर सबसे कम हों। हाल ही में बनी कर्नाटक सरकार में एक मंत्री बहुजन समाज पार्टी से लिए गए। जबकि कर्नाटक में बीएसपी ने महज एक सीट ही जीती थी। इसी प्रकार झारखंड में एक बार निर्दलीय मधु कोड़ा की सरकार बनवाई गई थी।

खुद एचडी कुमारस्वामी के पिता एचडी देवगौड़ा साल 1996 में प्रधानमंत्री बने थे। तब जनता दल के पास महज 47 सीटें थीं। जबकि भारत में 545 लोकसभा सीटें हैं। किसी दल को सरकार बनाने के लिए 273 सीटों की आवश्यकता पड़ती है। ऐसे में हर वो दल जिसमें 20 से 30 सीटें तक जीतने की क्षमता वे अपनी पार्टी से प्रधानमंत्री समेत कई बड़े पदों की ओर देख रहा है। इसमें माना जा रहा है कि कांग्रेस महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

पर इसमें सबसे अहम बात है कि अगर 2019 चुनाव परिणाम कर्नाटक जैसे होते हैं, बीजेपी बड़ी पार्टी बनती है और थोड़ी सीटों से भी बहुमत से पिछड़ जाती है, दूसरी तरफ कांग्रेस वापसी करती है पर इतनी सीटें नहीं जुटा पाती कि खुद सरकार बना पाए और दूसरी पार्टियां अड़ जाएं कि प्रधानमंत्री की कुर्सी मिलने पर ही किसी से गठजोड़, तो कांग्रेस क्या करेगी?

ऐसा हुआ तो 2019 में कांग्रेस की राह हो जाएगी बेहद आसान, बीजेपी के खेमे में बढ़ सकती हैं मुश्किलें

क्या तब भी कांग्रेस राहुल गांधी के प्रधानमंत्री उम्मीदवारी करती रहेगी या बीजेपी को सत्ता बाहर करने के लिए वह किसी और मौका देगी। अगर इतिहास और मौजूदा हालातों को देखें तो मायावती संयुक्त विपक्ष में मजबूती से उभरी हैं। उनके अखिलेश पहले ही कुर्बानी देने की बयानबाजी कर चुके हैं। फिर देश को दूसरी महिला और पहली दलित प्रधानमंत्री देने का दांव भी चल जा सकता है। इतिहास को देखें तो पता चलता है दूसरी मजबूत उम्मीदवार ममता बनर्जी सकती हैं, लेकिन ममता बनर्जी से राहुल गांधी और सोनिया गांधी दोनों ही लोगों के रिश्ते बहुत मधुर नहीं हैं। इसके अलावा फिलहाल कोई नेता इस पद के लिए ज्यादा सिर नहीं उठा रहा है। हालांकि राहुल गांधी का एम करुणानिधि प्यार समय-समय पर दिखाई देता है। शरद पवार एक नाम है जो कांग्रेस के लिए प्रतियोगिता कठिन कर सकता है। हालांकि ऐन मौके पर तेलगू देशम पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल, द्रविण मुनेत्र कणगम, नेशनल कांफ्रेंस आदि भी 2019 में प्रधानमंत्री चुनने में अहम भूमिका निभा सकती हैं।

टॅग्स :लोकसभा चुनावराहुल गाँधीमायावतीशरद पवार
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