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केरल में कांग्रेस नेताओं ने विजयन के इस्तीफे की मांग करते हुए एक दिन का उपवास रखा

By भाषा | Updated: August 25, 2020 19:44 IST

कांग्रेस ने विजयन पर हमला तेज कर दिया गया है और आरोप लगाया है कि उनका कार्यालय सोने की तस्करी में संलिप्त है।

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ठळक मुद्देविधानसभा में लंबी बहस का जवाब देते हुए विजयन ने कांग्रेस पर करार प्रहार किया थाविजयन के खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव विधानसभा में 40 के मुकाबले 87 वोटों से गिर गया था।

केरल में कांग्रेस के नेताओं ने सोने की तस्करी के मामले समेत विभिन्न मुद्दों को लेकर मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के इस्तीफे की मांग करते हुए सोमवार को एक दिवसीय उपवास रखा। सोने की तस्करी के मामले में विजयन के पूर्व प्रधान सचिव को निलंबित कर दिया गया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष एम रामचंद्रन ने यहां प्रदेश पार्टी मुख्यालय में उपवास रखा जबकि जिला इकाइयों के प्रमुखों ने अपने अपने कार्यालयों में प्रदर्शन किया।

पार्टी ने विजयन पर हमला तेज कर दिया गया है और आरोप लगाया है कि उनका कार्यालय सोने की तस्करी में संलिप्त है। पार्टी के इस प्रदर्शन से एक ही दिन पहले उसकी अगुवाई वाले संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) द्वारा विजयन के खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव विधानसभा में 40 के मुकाबले 87 वोटों से गिर गया था। रामचंद्रन के उपवास पर बैठने से पूर्व विधानसभा में विपक्ष के नेता रमेश चेन्निथला ने सरकार पर निशाना साधा।

उन्होंने कहा, ‘‘ श्रीमान् मुख्मयंत्री, मैं आपको बताऊं, कि आप चिंतिंत है। आपके शारीरिक हाव-भाव से यह स्पष्ट दिखता है। आपका कार्यालय सोने की तस्करी के मामले में शामिल है जिसके अंतरराष्ट्रीय प्रभाव हैं। हम कुछ समय से यह मुद्दा उठा रहे हैं।’’ चेन्निथला ने दावा किया कि लोगों ने राज्य सरकार के खिलाफ इस अविश्वास प्रस्ताव को पारित कर दिया है। उन्होंने कहा , ‘‘ कल विधानसभा में मुख्यमंत्री ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की तीखी आलोचना की। किसी ने सोचा नहीं था कि हमारे मुख्यमंत्री इतना कांग्रेस विरोधी हैं। वह भाजपा या नरेंद्र मोदी के खिलाफ एक भी शब्द नहीं बोल पाये। वह मोदी और अमित शाह के विचार से ही डरते हैं।’’

विधानसभा में लंबी बहस का जवाब देते हुए विजयन ने कांग्रेस पर करार प्रहार किया था और कहा कि वह ‘दयनीय दशा’ में है और उसके ज्यादातर नेता भाजपा में शामिल होने के लिए बुलावे का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने कांग्रेस के नेतृत्व संबंधी मुद्दे का हवाला देते हुए कहा था कि कांग्रेस अपने नेता का चुनाव नहीं कर पायी क्योंकि वरिष्ठ नेता एक दूसरे को ‘भाजपा एजेंट’ बताने में लगे हैं। 

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