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'अयोग्य ठहराए गए तो भी शिंदे मुख्यमंत्री बने रहेंगे', उपमुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़नवीस ने कहा

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: October 29, 2023 15:56 IST

उच्चतम न्यायालय में सोमवार को शिवसेना के उद्धव ठाकरे गुट और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के शरद पवार गुट द्वारा दायर याचिकाओं पर सुनवाई होनी है। इन याचिकाओं में कुछ विधायकों के खिलाफ दाखिल अयोग्यता याचिकाओं पर जल्द निर्णय लेने के लिए नार्वेकर को निर्देश देने का अनुरोध किया गया है।

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ठळक मुद्दे'अयोग्य ठहराए गए तो भी शिंदे मुख्यमंत्री बने रहेंगे'- उपमुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़नवीस हम उन्हें विधानपरिषद के सदस्य के तौर पर निर्वाचित करेंगे- देवेन्द्र फड़नवीसअगला चुनाव उन्हीं के नेतृतव में होगा- देवेन्द्र फड़नवीस

मुंबई: महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़नवीस ने कहा है कि मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे अयोग्य नहीं ठहराए जाएंगे और अगर ऐसा हुआ भी तो उन्हें विधानपरिषद के सदस्य के तौर पर निर्वाचित किया जाएगा और वह पद पर बने रहेंगे। देवेन्द्र फड़नवीस का ये बयान ऐसे समय आया है जब  उच्चतम न्यायालय ने 17 अक्टूबर को महाराष्ट्र विधानसभा के अध्यक्ष राहुल नार्वेकर को शिवसेना के दोनों गुटों की ओर से दायर याचिकाओं पर फैसला करने के लिए एक वास्तविक समय-सीमा बताने का अंतिम अवसर दिया था। 

शिवसेना में टूट के बाद, ये याचिकाएं एक-दूसरे के गुट के विधायकों को अयोग्य घोषित करने के लिए एकनाथ शिंदे और उद्धव ठाकरे नीत गुटों की ओर से दायर की गई थीं। उच्चतम न्यायालय में सोमवार को शिवसेना के उद्धव ठाकरे गुट और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के शरद पवार गुट द्वारा दायर याचिकाओं पर सुनवाई होनी है। इन याचिकाओं में कुछ विधायकों के खिलाफ दाखिल अयोग्यता याचिकाओं पर जल्द निर्णय लेने के लिए नार्वेकर को निर्देश देने का अनुरोध किया गया है।

उपमुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़नवीस ने एक निजी समाचार चैनल के साथ बात करते हुए कहा, "पहली बात तो यह है कि एकनाथ शिंदे अयोग्य नहीं ठहराए जाएंगे और अगर उन्हें अयोग्य ठहरा भी दिया गया तो हम उन्हें विधानपरिषद के सदस्य के तौर पर निर्वाचित करेंगे और वह मुख्यमंत्री के पद पर बने रहेंगे। अगला चुनाव उन्हीं के नेतृतव में होगा।"

बता दें कि न्यायालय ने पूर्व में, मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उनके विश्वस्त कई विधायकों को अयोग्य घोषित करने के लिए उद्धव गुट द्वारा दायर याचिकाओं पर फैसला करने में देरी को लेकर विधानसभा अध्यक्ष के प्रति नाखुशी जताते हुए कहा था कि वह शीर्ष न्यायालय के आदेशों की अनदेखी नहीं कर सकते हैं। इसी तरह की अयोग्यता याचिकाएं शिंदे गुट ने भी उद्धव के प्रति निष्ठा रखने वाले विधायकों के खिलाफ दायर की हैं। शीर्ष न्यायालय ने 18 सितंबर को विधानसभा अध्यक्ष को याचिकाओं पर निर्णय के लिए समय सीमा बताने का निर्देश दिया था।  

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