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महाराष्ट्र: कोरोना का असर, 18 लाख राज्य सरकारी कर्मचारियों के वेतन में देरी होने के आसार

By लोकमत समाचार ब्यूरो | Updated: March 27, 2020 07:25 IST

महाराष्ट्र: कोषागार कार्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने 'लोकमत समाचार' से बातचीत में कहा कि हर माह 25 तारीख तक अधिकांश बिल संबंधित विभागों की ओर से कोषागार में भेज दिए जाते हैैं. इस बार अब तक 20 प्रतिशत बिल नहीं भेजे गए हैैं.

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ठळक मुद्देमहाराष्ट्र में 18 लाख राज्य सरकारी कर्मचारियों के वेतन में देरी के आसार10 अप्रैल के बाद वेतन मिलने के इस बार आसार, सरकार 2019-20 वित्तीय वर्ष 31 मार्च को समाप्त करने पर अडिग

यदु जोशी

मुंबई:कोरोना वायरस के प्रकोप के बीच राज्य के 18 लाख राज्य सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के वेतन में विलंब होने की स्थिति दिखाई दे रही है. अधिकारियों का कहना है कि वेतन बिलों से संबंधित कर्मचारी कार्यालय में ही नहीं आ रहे हैैं, इसलिए यह विलंब अटल है. कर्मचारियों को वेतन हर माह एक अथवा दो तारीख को मिलता है. वित्तीय वर्ष समाप्त होने के कारण मार्च का अप्रैल में मिलने वाला वेतन अमूमन 5 से 6 अप्रैल तक मिल जाता है. लेकिन, इस बार इसके 10 अप्रैल के बाद ही मिलने के आसार दिखाई दे रहे हैैं.

कोषागार कार्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने 'लोकमत समाचार' से बातचीत में कहा कि हर माह 25 तारीख तक अधिकांश बिल संबंधित विभागों की ओर से कोषागार में भेज दिए जाते हैैं. इस बार अब तक 20 प्रतिशत बिल नहीं भेजे गए हैैं. इसलिए वेतन में विलंब अटल है.

विविध सरकारी कार्यालयों में 11500 आहरण व संवितरण अधिकारी हैैं. इस सभी के पास वेतन बिल जारी करने की जिम्मेदारी होती है. वे ऑनलाइन बिल डालते हैैं और उसकी प्रिंट निकाली जाती है और मैसेंजर के मार्फत वे बिल लेखा अधिदान कार्यालय में जमा किए जाते हैैं. उसके बाद लेखा अधिदान कार्यालय के अंकेक्षक, अधीक्षक उनकी जांच करते हैैं.

इसमें कोई त्रुटि रही तो वे बिल फिर से संबंधित कार्यालय को वापस भेजे जाते हैैं. त्रुटि न हुई तो वेतन की राशि संबंधित कार्यालय के बैंक खाते में जमा कर दी जाती है. उतनी राशि का धनादेश संबंधित कार्यालय की ओर से भेजा जाता है. उसके बाद कर्मचारियों के खाते में वेतन की राशि जमा होती है.

इसके अलावा गत वर्ष के हजारों करोड़ रुपए की पूरक मांगों में से 'सुविधाजनक' कार्य मंजूर कराए जा सकेेंगे. बॉक्स मूल वेतन अग्रिम देने की मांग राजपत्रित अधिकारी महासंघ के नेता ग. दि कुलथे और उपाध्यक्ष समीर भाटकर ने मांग की है कि यदि वेतन देने में विलंब हो रहा हो तो सभी कर्मचारी-अधिकारियों को सातवें वेतन आयोग के अनुसार न्यूनतम मूल वेतन उनके बैंक खातों में अग्रिम के रूप में जमा किया जाए और बिल मंजूर होने के बाद उसे समायोजित कर लिया जाए.

31 मार्च पर सरकार अडिग: 2019-20 वित्तीय वर्ष 30 अप्रैल तक बढ़ाने की मांग की जा रही है. लेकिन, राज्य सरकार यह वर्ष हमेशा की तरह 31 मार्च को समाप्त करने पर अडिग है. वित्त विभाग ने आदेश जारी किया है कि 27 मार्च तक अपने-अपने कार्यालय की ओर से वित्त विभाग में बिल (विकास कार्य आदि के) पेश करेें अन्यथा उसके बाद स्वीकार नहीं किए जाएंगे. 

31 मार्च की डेडलाइन क्यों अब सवाल यह उठ रहा है कि सरकार 31 मार्च की डेडलाइन को लेकर इतनी हठी क्यों है? कहा जा रहा है कि ऐसा करने से एक तो बजट खर्च में अपने आप कटौती हो जाएगी और कोरोना को रोकने के लिए तजोरी पर ज्यादा अतिरिक्त बोझ नहीं आएगा.

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