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"राहुल गांधी की सांसदी क्यों नहीं बहाल की गई? अयोग्य ठहराने वाली जल्दबाजी अब कहां गायब है", स्टालिन का लोकसभा अध्यक्ष पर हमला

By आशीष कुमार पाण्डेय | Updated: August 7, 2023 08:49 IST

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने राहुल गांधी की सांसद में बहाली को लेकर सवाल उठाया है और उनकी सांसदी बहाल में हो रही देरी पर सवाल उठाते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला को घेरने का प्रयास किया है।

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ठळक मुद्देस्टालिन ने राहुल गांधी की सांसद में बहाली को लेकर घेरा लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला को स्टालिन ने राहुल गांधी की सांसद में बहाली को लेकर हो रही देरी पर उठाया सवाल राहुल गांधी की सांसदी बहाली में उन्हें अयोग्य ठहराने वाली जल्दबाजी कहां गायब हो गई है

चेन्नई: तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने राहुल गांधी की सांसद में बहाली को लेकर सवाल उठाया है और उनकी सांसदी बहाल में हो रही देरी पर सवाल उठाते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला को घेरने का प्रयास किया है। सीएम स्टालिन ने रविवार को कहा कि आखिर अब तक राहुल गांधी की सांसदी क्यों नहीं बहाल की गई? उन्हें अयोग्य ठहराने वाली जल्दबाजी अब कहां गायब हो गई है।

उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा 'मोदी' उपनाम के इस्तेमाल को लेकर आपराधिक मानहानि मामले में गुजरात की अदालत से मिली सजा पर रोक लगाए जाने के बावजूद अभी तक ऐसा नहीं हुआ है। आखिर क्यों लोकसभा सचिवालय इसमें देरी कर रहा है। जबकि उन्हें सजा मिलने के चौबीस घंटे के भीतर संसद से निकाल दिया गया था।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला पर परोक्ष कटाक्ष करते हुए सीएम स्टालिन ने सवाल किया कि लोकसभा सचिवालय ने जिस तत्परता के साथ उनके सांसद होने का दर्जा छीन लिया था, वही अब सुप्रीम कोर्ट से स्टे मिलने के बावजूद लोकसभा में उनकी वापसी के लिए वैसी ही जल्दबाजी क्यों नहीं दिखा रहा है।

स्टालिन ने कहा, "सुप्रीम कोर्ट द्वारा उनकी सजा पर रोक लगाने के बावजूद राहुल गांधी को सांसद के रूप में बहाल क्यों नहीं किया गया? उन्हें अयोग्य ठहराने के लिए दिखाई गई तत्परता अब गायब क्यों है? क्या संसद में राहुल गांधी की मौजूदगी से भाजपा डर रही है?"

मालूम को कि राहुल गांधी को साल 2019 के लोकसभा चुनावों से पहले कर्नाटक के कोलार में जनसभा में 'मोदी' उपनाम का इस्तेमाल करते हुए की गई टिप्पणी के लिए गुजरात की अदालत द्वारा दोषी ठहराया गया और दो साल की जेल की सजा सुनाई गई।

मानहानि के केस में दोषसिद्धि के कारण लोकसभा सचिवालय ने फौरन उनकी सदस्यता को सदस्यता को रद्द कर दिया था। हालांकि कोर्ट ने राहुल को दी गई दो साल की सजा को निलंबित कर दिया था, जिसके बाद उन्होंने दोषसिद्धि को गुजरात हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।

हालांकि, गुजरात हाईकोर्ट द्वारा सूरत की सेशन कोर्ट द्वारा राहुल गांधी को दी गई सजा को बरकरार रखा गया, जिसके बाद राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।

सुप्रीम कोर्ट ने बीते शुक्रवार को मानहानि मामले में सुनवाई करते हुए राहुल को सूरत की सेशन कोर्ट द्वारा दोषी करार देने पर पर रोक लगा दी थी लेकिन साथ ही कोर्ट ने राहुल गांधी को सार्वजनिक भाषण या बयान देते समय अधिक सावधानी बरतने की सलाह दी।

लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने शनिवार को कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश की एक प्रति औपचारिक रूप से लोकसभा सचिवालय को सौंप दी गई है।

कांग्रेस नेता चौधरी ने अपने अनुरोध पर लोकसभा सचिवालय की प्रतिक्रिया पर निराशा व्यक्त की कि राहुल की निचले सदन की सदस्यता जल्द से जल्द बहाल की जाए ताकि वह केंद्र के खिलाफ 8 अगस्त से शुरू होने वाले अविश्वास प्रस्ताव पर बहस में भाग ले सकें।

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