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पाकिस्तान के नेताओं के बयानों और शायरों को क्यों पसंद करते हैं कांग्रेसी: सुधांशु त्रिवेदी

By भाषा | Updated: January 4, 2020 07:21 IST

त्रिवेदी ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘पाकिस्तान कहता है कि हमारी सेना सिविलियन को मारती है। राज्यसभा में विपक्ष (कांग्रेस) के नेता गुलाम नबी आजाद भी ऐसा ही कहते हैं। पाकिस्तान कहता है कि हमें अनुच्छेद 370 को खत्म नहीं करना चाहिए था। लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी भी यही कहते हैं। वे (कांग्रेस नेता) पाकिस्तान के नेताओं एवं उनके बयानों से इतना प्रेम क्यों करते हैं।’’

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ठळक मुद्देसुधांशु त्रिवेदी ने शुक्रवार को कांग्रेस से सवाल किया कि देश की इतनी पुरानी पार्टी के नेता पड़ोसी देश पाकिस्तान के नेताओं, उनके बयानों, कवियों एवं शायरों सहित सभी चीजों को क्यों पसंद करते हैं? त्रिवेदी ने कहा, ‘‘हमारा देश गालिब और मीर का है। उर्दू हिन्दुस्तानी भाषा है और पाकिस्तान ने इसे अपनाया है। वे (कांग्रेस) पाकिस्तान के नेताओं, उनके बयानों, उनके मीडिया की हेडलाइनों और यहां तक कि उनके कवियों एवं शायरों को क्यो पसंद करते हैं?’’

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान-कानपुर (आईआईटी-के) में पाकिस्तान के मशहूर शायर फैज अहमद फैज की कविता ‘‘हम देखेंगे’’ गाये जाने से उत्पन्न विवाद पर भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने शुक्रवार को कांग्रेस से सवाल किया कि देश की इतनी पुरानी पार्टी के नेता पड़ोसी देश पाकिस्तान के नेताओं, उनके बयानों, कवियों एवं शायरों सहित सभी चीजों को क्यों पसंद करते हैं?

हाल में देश में कुछ स्थानों पर फैज अहमद फैज की कविता गाये जाने पर हुए विवाद पर पूछे गये एक सवाल पर त्रिवेदी ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘पाकिस्तान कहता है कि हमारी सेना सिविलियन को मारती है। राज्यसभा में विपक्ष (कांग्रेस) के नेता गुलाम नबी आजाद भी ऐसा ही कहते हैं। पाकिस्तान कहता है कि हमें अनुच्छेद 370 को खत्म नहीं करना चाहिए था। लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी भी यही कहते हैं। वे (कांग्रेस नेता) पाकिस्तान के नेताओं एवं उनके बयानों से इतना प्रेम क्यों करते हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘वे (कांग्रेस) पाकिस्तान के कवियों से भी प्रेम करते हैं।’’ त्रिवेदी ने कहा, ‘‘हमारा देश गालिब और मीर का है। उर्दू हिन्दुस्तानी भाषा है और पाकिस्तान ने इसे अपनाया है। वे (कांग्रेस) पाकिस्तान के नेताओं, उनके बयानों, उनके मीडिया की हेडलाइनों और यहां तक कि उनके कवियों एवं शायरों को क्यो पसंद करते हैं?’’

उल्लेखनीय है कि फैज की कविता पर विवाद तब उत्पन्न हुआ जब एक छात्र ने जामिया मिलिया इस्लामिया के उन छात्रों के प्रति समर्थन व्यक्त करते हुए मशहूर शायर फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ की कविता 'हम देखेंगे' गायी जिनके खिलाफ सीएए के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने कार्रवाई की थी।

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