कौन थे ज्ञानरंजन?, ‘साहित्य भूषण सम्मान’, ‘सुभद्रा कुमारी चौहान’, ‘शिखर सम्मान’ और ‘मैथिलीशरण गुप्त सम्मान’

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: January 8, 2026 11:02 IST2026-01-08T11:01:28+5:302026-01-08T11:02:10+5:30

देश की प्रतिष्ठित साहित्यिक पत्रिकाओं में विशेष स्थान रखने वाली पत्रिका ‘पहल’ के संपादक के रूप में काम कर चुके ज्ञानरंजन का जन्म 21 नवम्बर 1936 को महाराष्ट्र के अकोला ज़ि‍ले में हुआ था।

Who was Gyanranjan no more Unparalleled storyteller editor Pahal Sahitya Bhushan Award Subhadra Kumari Chauhan Shikhar Award Maithilisharan Gupt Award | कौन थे ज्ञानरंजन?, ‘साहित्य भूषण सम्मान’, ‘सुभद्रा कुमारी चौहान’, ‘शिखर सम्मान’ और ‘मैथिलीशरण गुप्त सम्मान’

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Highlightsसाहित्यकार के परिवार में पत्नी सुनयना, पुत्री वत्सला और पुत्र शांतनु हैं और दोनों बच्चे जबलपुर में ही हैं।बृहस्पतिवार दोपहर गौरीघाट मुक्तिधाम में ज्ञानरंजन का अंतिम संस्कार किया जाएगा। प्रारम्भिक जीवन महाराष्ट्र, राजस्थान, दिल्ली, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में व्यतीत हुआ।

जबलपुरः प्रसिद्ध कथाकार और साहित्यकार ज्ञानरंजन का 90 वर्ष की आयु में बुधवार रात यहां के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। उनके एक पारिवारिक मित्र ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। ज्ञानरंजन के पारिवारिक मित्र पंकज स्वामी ने बताया कि वह वृद्धावस्था संबंधी बीमारियों से पीड़ित थे और बुधवार सुबह तबियत बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां रात साढ़े दस बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। उन्होंने बताया कि साहित्यकार के परिवार में पत्नी सुनयना, पुत्री वत्सला और पुत्र शांतनु हैं और दोनों बच्चे जबलपुर में ही हैं।

बृहस्पतिवार दोपहर गौरीघाट मुक्तिधाम में ज्ञानरंजन का अंतिम संस्कार किया जाएगा। देश की प्रतिष्ठित साहित्यिक पत्रिकाओं में विशेष स्थान रखने वाली पत्रिका ‘पहल’ के संपादक के रूप में काम कर चुके ज्ञानरंजन का जन्म 21 नवम्बर 1936 को महाराष्ट्र के अकोला ज़ि‍ले में हुआ था।

उनका प्रारम्भिक जीवन महाराष्ट्र, राजस्थान, दिल्ली, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में व्यतीत हुआ और फिर उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा प्राप्त की। वर्ष 2013 में जबलपुर विश्वविद्यालय ने उन्हें मानद ‘डॉक्टर ऑफ़ लिटरेचर’ की उपाधि प्रदान की। वह जबलपुर विश्वविद्यालय से संबंद्ध जी. एस. कॉलेज में हिन्दी के प्रोफ़ेसर रहे और 34 वर्ष की सेवा के बाद 1996 में सेवानिवृत्त हुए।

ज्ञानरंजन के अनेक कहानी-संग्रह प्रकाशित हुए और अनूठी गद्य रचनाओं की उनकी एक क़िताब 'कबाड़खाना' बहुत लोकप्रिय हुई। उन्हें हिन्दी संस्थान के ‘साहित्य भूषण सम्मान’, मध्यप्रदेश साहित्य परिषद के ‘सुभद्रा कुमारी चौहान’, मध्यप्रदेश संस्कृति विभाग के ‘शिखर सम्मान’ और ‘मैथिलीशरण गुप्त सम्मान’ से भी नवाजा जा चुका है।

 

Web Title: Who was Gyanranjan no more Unparalleled storyteller editor Pahal Sahitya Bhushan Award Subhadra Kumari Chauhan Shikhar Award Maithilisharan Gupt Award

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