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पश्चिम बंगाल:  राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने यादवपुर विश्वविद्यालय की एक मानद डिग्री पर जताई आपत्ति, कहा- भविष्य में होनी चाहिए व्यापक चर्चा

By भाषा | Updated: October 18, 2019 19:49 IST

उल्लेखनीय है कि 19 सितंबर को विश्वविद्यालय में बाबुल सुप्रियो को काले झंडे दिखाए गए और विद्यार्थियों के एक धड़े ने उनके साथ धक्का-मुक्की की थी। उन्हें परिसर से बाहर जाने से भी रोका गया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए धनखड़ को वहां पहुंचना पड़ा। 

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यादवपुर विश्वविद्यालय में एक बैठक में शामिल हुए पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने इस साल प्रदान की जाने वाली चार मानद डिग्री में एक पर आपत्ति प्रकट की लेकिन बाद में सुर नरम करते हुए कहा कि ‘‘भविष्य में व्यापक चर्चा होनी चहिए।’’

विश्वविद्यालय द्वारा प्रदान की जाने वाली मानद डिग्री ‘होनोरिस कॉसा’ के संबंध में विश्वविद्यालय की फैसला लेने वाली शीर्ष इकाई ‘कोर्ट’ की बैठक के दौरान चार नामों को अंतिम रूप दिया गया। परिसर में उग्र छात्रों की भीड़ द्वारा किए गए घेराव से केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो को 'सुरक्षित निकालने' के एक माह बाद शुक्रवार को धनखड़ विश्वविद्यालय की ‘कोर्ट’ बैठक में शामिल हुए।

राज्यपाल राज्य के सभी विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति भी हैं। वह सुबह 11 बजे विश्वविद्यालय परिसर में पहुंचे और बैठक के बाद छात्रों से भी बातचीत की। इस साल 24 दिसंबर को दीक्षांत समारोह के तहत डी लिट और डी एससी की मानद डिग्री से नवाजे जाने वाले चार नामी लोगों के नाम को अंतिम रूप दिए जाने के बारे में धनखड़ ने कहा, ‘‘बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय हुआ और हमने यह भी कहा कि भविष्य में व्यापक चर्चा होनी चाहिए। ’’

करीब एक घंटे तक चली बैठक में प्रो-वाइस चांसलर, रजिस्ट्रार और विभिन्न विभागों के प्रमुख भी शामिल हुए। अंतरराष्ट्रीय संबंध विभाग के प्रमुख ओमप्रकाश मिश्रा के मुताबिक राज्यपाल से ‘कोर्ट’ द्वारा सर्वसम्मति से लिए मानद डिग्री प्रदान करने के लिए तय किए गए चार नामों पर गौर करने का आग्रह किया गया था।

राज्यपाल ने प्रस्ताव पर सहमति जताई या नहीं, यह पूछने पर मिश्रा ने कहा कि हालांकि उन्होंने इसका विरोध नहीं किया लेकिन यह भी स्पष्ट कर दिया कि आगे से निर्णय लेने की प्रक्रिया में उन्हें शामिल किया जाना चाहिए।

उल्लेखनीय है कि 19 सितंबर को विश्वविद्यालय में बाबुल सुप्रियो को काले झंडे दिखाए गए और विद्यार्थियों के एक धड़े ने उनके साथ धक्का-मुक्की की थी। उन्हें परिसर से बाहर जाने से भी रोका गया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए धनखड़ को वहां पहुंचना पड़ा। 

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