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राजस्थानः बड़ा सवाल- गुलाब चंद कटारिया का बयान इरादतन या गैर इरादतन!

By प्रदीप द्विवेदी | Updated: January 31, 2019 08:10 IST

कटारिया भीलवाड़ा के माणिक्यलाल वर्मा राजकीय कॉलेज में छात्रसंघ कार्यालय का उद्घाटन करने पहुंचे थे जहां उन्होंने कहा कि- हमने किसी व्यक्ति की पूजा नहीं की है. हम किसी व्यक्ति की नौकरी करने के लिए पैदा नहीं हुए हैं, फिर चाहे वे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हों?

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वसुंधरा राजे सरकार में राजस्थान के गृहमंत्री रहे गुलाब चंद कटारिया का एक बयान सियासी चर्चाओं में है. क्योंकि, कटारिया राजस्थान में संघ का प्रमुख चेहरा हैं और इस वक्त नेता प्रतिपक्ष हैं, इसलिए राजनीतिक क्षेत्रों में बड़ा सवाल है कि कटारिया का यह बयान इरादतन था या गैर इरादतन.

कटारिया भीलवाड़ा के माणिक्यलाल वर्मा राजकीय कॉलेज में छात्रसंघ कार्यालय का उद्घाटन करने पहुंचे थे जहां उन्होंने कहा कि- हमने किसी व्यक्ति की पूजा नहीं की है. हम किसी व्यक्ति की नौकरी करने के लिए पैदा नहीं हुए हैं, फिर चाहे वे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हों? हम उनकी चाकरी करने के लिए पैदा नहीं हुए हैं! जो देश को आगे बढ़ाएगा उसकी मदद करेंगे, जो देश को रोकने का प्रयास करेगा उससे लड़ाई करेंगे.

यही नहीं, अपने स्वतंत्र विचारों के पक्ष में कटारिया ने कहा कि- मैं विद्यार्थी परिषद का कार्यकर्ता रहते हुए इमरजेंसी में 18 महीने जेल में रहा, क्या मेरा परिवार नहीं था? हमने कभी कायरता नहीं दिखाई. किसी को 18 दिन जेल में रख दो हाथ जोड़कर बाहर आ जाएगा. मैं 18 महीने जेल में रहा. मेरे मामाजी मिलने आए तो कहा- माफी लिख दो. मैने कहा- मेरी लाश बाहर आ सकती है, मैं नहीं. जिन उद्देश्यों को लेकर संगठन बनाया, उससे पीछे नहीं हट सकते.

कटारिया आगे बोले कि- आपातकाल में भी यही तो लड़ाई थी. हम कोई चोरी-डकैती करने वाले थोड़ी थे. हम तो संगठन के उद्देश्यों की लड़ाई लड़ रहे थे. हमने संगठन व्यक्ति की पूजा के लिए नहीं बनाया है. किसी नेता की नौकरी चाकरी के लिए नहीं आए हैं. हम मां भारती के आगे बढ़ाने के लिए जो रास्ता दिखाई देता है उस पर आगे बढ़ने का काम करते हैं. 

कुछ समय से पीएम मोदी के सियासी तौर-तरीकों और निर्णयों को लेकर बीजेपी समर्थकों में ही बेचैनी दिखाई देने लगी है, इतना ही नहीं, बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के एकतरफा अनुशासन से भी नेता परेशान हैं.

दक्षिण राजस्थान में बीजेपी की जड़े जमाने में कटारिया की बेहद महत्वपूर्ण भूमिका रही है, जिसके नतीजे में पिछले विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने वहां की ज्यादातर सीटें जीत ली थी, परन्तु इस बार अपेक्षाकृत सफलता नहीं मिली. माना जा रहा है कि इस हार का कारण केन्द्रीय मुद्दे रहे हैं, जिनसे बीजेपी समर्थक नाराज थे. 

संघ की पृष्ठभूमि से आए बीजेपी नेता व्यक्ति पूजा के विरोधी रहे हैं, ऐसे में लगातार पीएम मोदी की छवि को बीजेपी से उपर दिखाने की कोशिश भी संघ विचारधारा के समर्थकों को रास नहीं आ रही है.

उधर, लोस चुनाव के बाद केन्द्र में बीजेपी की सरकार बनती है तो पीएम मोदी के अलावा नितिन गडकरी, राजनाथ सिंह आदि के नाम भी चर्चाओं में सामने आ रहे हैं. ये नेता भी संघ की पृष्ठभूमि से ही हैं, लिहाजा माना जा रहा है कि यदि नरेन्द्र मोदी के नाम पर सहमति नहीं बनती है तो संघ का समर्थन इन नेताओं को भी मिल सकता है.

बहरहाल, कटारिया के इस बयान को लेकर स्पष्टीकरण के बाद ही यह साफ हो सकेगा कि गुलाब चंद कटारिया का बयान इरादतन या गैर इरादतन था, लेकिन इस बयान ने सियासी हलचल तो मचा ही दी है.

टॅग्स :भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी)राजस्थान
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