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‘हमने अपना धैर्य खो दिया है’?, प्रवासी श्रमिकों पर आखिर उच्चतम न्यायालय क्यों की टिप्पणी

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: October 5, 2024 16:23 IST

पीठ ने कहा, ‘‘हमने अपना धैर्य खो दिया है, हम यह पूरी तरह से स्पष्ट कर रहे हैं कि और उदारता नहीं बरती जाएगी।’’

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ठळक मुद्देहम आपको हमारे आदेश का पालन करने के लिए एक आखिरी मौका दे रहे हैं।अन्यथा आपके सचिव को उपस्थित होना होगा।प्रत्येक परिवार को केवल एक राशन कार्ड जारी किया जाता है।

नई दिल्लीः उच्चतम न्यायालय ने प्रवासी श्रमिकों को राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा राशन कार्ड मुहैया करने में देरी को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि ‘‘हमने अपना धैर्य खो दिया है।’’ न्यायमूर्ति सुधांशु धुलिया और न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानउल्लाह की पीठ ने केंद्र, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को 19 नवंबर तक इस सिलसिले में आवश्यक कदम उठाने का अंतिम मौका दिया है। पीठ ने कहा, ‘‘हमने अपना धैर्य खो दिया है, हम यह पूरी तरह से स्पष्ट कर रहे हैं कि और उदारता नहीं बरती जाएगी।’’

न्यायालय ने कहा, ‘‘हम आपको हमारे आदेश का पालन करने के लिए एक आखिरी मौका दे रहे हैं, अन्यथा आपके सचिव को उपस्थित होना होगा।’’ केंद्र की ओर से पेश हुईं अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने पीठ को बताया कि अंत्योदय अन्न योजना के तहत प्राथमिकता वाले प्रत्येक परिवार को केवल एक राशन कार्ड जारी किया जाता है।

शीर्ष अदालत कोविड महामारी के दौरान प्रवासी मजदूरों को पेश आईं समस्याओं और दशा का संज्ञान लेने के बाद, 2020 में दर्ज स्वत: संज्ञान वाले एक मामले की सुनवाई कर रही है। न्यायालय ने इससे पहले, केंद्र से एक हलफनामा दाखिल कर प्रवासी श्रमिकों को राशन कार्ड प्रदान करने और उनके लिए अन्य कल्याणकारी कदम उठाने के संबंध में 2021 के फैसले और उसके बाद के निर्देशों के अनुपालन के बारे में विवरण देने को कहा था। शीर्ष अदालत ने 29 जून 2021 के फैसले और उसके बाद के आदेशों में प्राधिकारों को कई निर्देश जारी कर उनसे कल्याणकारी उपाय करने को कहा था।

जिसमें कोविड-19 महामारी के दौरान समस्याओं का सामना करने वाले सभी प्रवासी श्रमिकों को 'ई-श्रम' पोर्टल पर पंजीकृत राशन कार्ड देना भी शामिल है। 'ई-श्रम' केंद्रीय श्रम और रोजगार मंत्रालय द्वारा शुरू किया गया असंगठित श्रमिकों (एनडीयूडब्ल्यू) का एक व्यापक राष्ट्रीय डेटाबेस है, जिसका प्राथमिक उद्देश्य देश भर में असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के वास्ते सामाजिक सुरक्षा उपायों को सुविधाजनक बनाना है।

टॅग्स :सुप्रीम कोर्टकोविड-19 इंडिया
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