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जम्मू- कश्मीर दौरे पर आए यूरोपियन यूनियन सांसद ने कहा, 'हमें 'मुस्लिमों से नफरत' करने वाले नाजी कहना गलत'

By अभिषेक पाण्डेय | Updated: October 30, 2019 10:08 IST

EU lawmakers J&K Visit: जम्मू-कश्मीर के हालात का जायजा लेने आए यूरोपियन यूनियन सांसदों के दल में शामिल लार्स पैट्रिक ने कहा है कि वे मुस्लिम विरोधी नहीं हैं

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ठळक मुद्देयूरोपीय यूनियन के 23 सांसदों का दल दो दिवसीय यात्रा पर जम्मू-कश्मीर आया हैइस दल में शामिल एक सांसद ने कहा कि उन्हें मुस्लिम विरोधी कहना गलत है

जम्मू-कश्मीर के हालात का जायजा लेने के लिए यूरोपीय यूनियन के 23 सांसदों का एक दल मंगलवार को दिवसीय दौरे पर पहुंचा है। 5 अगस्त को जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 खत्म करने और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित करने की केंद्र की घोषणा के बाद कश्मीर के दौरे पर आने वाला पहला शिष्टमंडल है। 

यूरोपियन यूनियन के इस शिष्टमंडल में शामिल जर्मनी राइटविंग अल्टरनेटिव फॉर जर्मनी (AFD) और यूरोपियन पार्लियामेंट के सदस्य लार्स पैट्रिक बर्ग ने कहा है कि इस शिष्टमंडल को 'मुस्लिम विरोधी' कहना गलत है। लार्स पैट्रिक को कुछ आवश्यक काम की वजह से यात्रा के बीच से ही जर्मनी वापस लौटना पड़ा।

लार्स ने हिंदुस्तान टाइम्स को दिए एक इंटरव्यू में यूरोपियन यूनियन सांसदों की इस यात्रा पर विस्तार से चर्चा की है। 

क्या मुस्लिम विरोधी हैं यूरोपीय सांसदों का दल? खुद दिया जवाब

कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि जम्मू-कश्मीर की यात्रा पर आने वाले इन यूरोपीय सांसदों में से ज्यादातर 'मुस्लिम-विरोधी' दक्षिणपंथी हैं। 

इस संसदीय दल में शामिल रहे लार्स पैट्रिक से जब इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, 'मुझे नहीं पता कि ये सोच कहां से आ रही है। हां, इस दल में शामिल ज्यादातर कंजर्वेटिव राजनीतिक समूह से हैं। लेकिन हमारी भारत यात्रा के दौरान, मैंने किसी एक भी व्यक्ति को-न ही हमारी तरफ, न ही भारत की तरफ से-किसी को 'मुस्लिमों से नफरत' के संदर्भ में बात करते नहीं सुना।' 

लार्स ने कहा, 'हर समाज में ऐसे लोग होते हैं, जो नियमों को मानते हैं और नहीं मानते हैं। मीडिया में प्रचलित धारणा, जिसका आपने जिक्र किया, के विपरीत, यूरोपीय संसद में कंजर्वेटिव समूह 'मुस्लिमों-से नफरत' करने वाले नाजी नहीं हैं।'

उन्होंने कहा, 'हम से ज्यादातर एक आम 'वैश्विक सांस्कृतिक पहचान' को खोजने की समस्या से चिंतित है। वैश्विकरण है, लेकिन वैश्विक संस्कृति नहीं है। इसका जातिवाद या राष्ट्रवाद से कोई लेनादेना नहीं है। ये उचित मूल्यांक नहीं है, जो ऐसी मीडिया हमारा बना रही हैं।'

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