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'दलित' विवाद: मोदी सरकार में मंत्री अठावले ने किया अपनी ही सरकार के फैसले का विरोध, कहा- जाऊँगा सुप्रीम कोर्ट

By ऐश्वर्य अवस्थी | Updated: September 6, 2018 09:54 IST

रामदास अठावले ने कहा कि दलित पर क्यों रोक लगाई जा रही है। हम इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट जाएंगे।

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नई दिल्ली, 6 सितंबर: केंद्रीय राज्य सामाजिक न्याय और सशक्तीकरण मंत्री रामदास अठावले अपने बयानों के चलते सुर्खियों मेंल रहते हैं। उन्होंने कहा है कि वह रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया दलित शब्द के इस्तेमाल पर सूचना व प्रसारण मंत्रालय के एडवायजरी को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे। उन्होंने  कहा कि जब हरिजन शब्द पर बैन नहीं है तो  फिर दलित पर क्यों रोक लगाई जा रही है। हम इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट जाएंगे।

 उन्होंने मीडिया  मीडिया में दलित शब्द के इस्तेमाल पर रोक की बात करते हुए हाल ही में मुख्य बातें पेश की थीं।बुधवार को मीडिया को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा है कि रिपब्लिकन पार्टी की तरफ से हम सुप्रीम कोर्ट जाएंगे और दलित शब्द के इस्तेमाल पर रोक के बांबे हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देंगे।

 उन्होंने कहा है कि दलित कोई अपमानजनक शब्द नहीं ऐसे में इसके प्रयोग पर रोक लगाया जाना पूरी तरह से गलत है। उन्होंने कहा कि मैं कोर्ट का सम्मान करता हूं ऐसे में मेरे मंत्रालय में दलित शब्द का प्रयोग किया जाएगा इसके आदेश भी उन्होंने दिए हैं। साथ ही उन्होंने मीडिया को इस शब्द के इस्तेमाल करने से नहीं रोकना चाहिए।

इससे पहले उन्होंने कहा था कि उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ पहुंचे केंद्रीय सामाजिक न्याय व अधिकारिता राज्यमंत्री रामदास अठावले ने बुधवार को कहा कि दलितों पर अत्याचार करने वालों को कठोर सजा मिलनी चाहिए। उन्होंने राम मंदिर निर्माण का जिक्र करते हुए कहा कि मंदिर मसले पर कोई न कोई फार्मूला निकाला जाना चाहिए। मंत्री अठावले बैंक अधिकारियों के साथ बैठक के लिए लखनऊ आए हुए थे। 

राम मंदिर मसले पर उन्होंने कहा कि अयोध्या में इस मसले पर कोई न कोई फार्मूला निकाला जाना चाहिए। वहां मंदिर बनना चाहिए। मुस्लिम समाज के लिए विश्वविद्यालय या अस्पताल खोला जाना चाहिए। दोनों समाज के लोगों को जोड़ना चाहिए।

राज्यमंत्री ने कहा कि दलितों पर अत्याचार करने वालों को कठोर सजा होनी चाहिए और जाति व्यवस्था खत्म करने के लिए अंतरजातीय विवाह को बढ़ावा दिया जाए। उन्होंने कहा, 'दलितों पर पूर्ववर्ती सरकारों में भी अत्याचार हुए और वर्तमान समय में भी अत्याचार हो रहे हैं। जातिवाद के चक्कर में अत्याचार होते हैं। जातिवाद को खत्म करना है तो अंतरजातीय विवाह को बढ़ावा देना चाहिए।

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