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मध्यप्रदेश की 5 अजजा सीटों पर भाजपा और एक पर कांग्रेस है काबिज, जनजातीय क्षेत्रों में कौन करेगा कमाल?

By लोकमत समाचार ब्यूरो | Updated: April 25, 2019 05:29 IST

लोकसभा चुनाव 2019: 2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्र्रेस के द्बारा अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित विधानसभा क्षेत्रों में कांग्रेस के द्बारा अच्छा प्रदर्शन किए जाने के बाद अब कांग्रेस को लग रहा है कि वह लोकसभा चुनाव में भी इसे दोहराते हुए भी अनुसूचित जाति की सभी नहीं तो कम से कम आधी सीटों पर कब्जा कर लेगी.

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ठळक मुद्देखरगोन लोकसभा क्षेत्र के तहत आने वाले 8 विधानसभा क्षेत्रों में से 6 पर कांग्रेस 1 पर भाजपा और पर निदर्लीय प्रत्याशी ने जीत दर्ज कराई थीभाजपा ने अपने मौजूदा सांसद सुभाष पटेल का टिकट काट कर गजेन्द्र पटेल प्रत्याशी बनाया है

मध्यप्रदेश के 29 लोकसभा क्षेत्रो मे सी 6 लोकसभा क्षेत्र शहडोल, मंडला, रतलाम, धार, खरगोन और बैतूल अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं. पर 1990 के पहले तक राज्य के यह सभी जनजाति क्षेत्र कांग्रेस के प्रभाव क्षेत्र वाले माने जाते हैं लेकिन बाद में हालात बदलते गए धीरे-धीरे राज्य के अधिकांश जनजातियों क्षेत्रों पर भाजपा काबिल हो गई. 2014 के लोकसभा चुनाव में तो सभी 6 संसदीय क्षेत्रों पर भाजपा ने कब्जा कर लिया था इस चुनाव के कुछ समय बाद ही रतलाम-झाबुआ संसदीय क्षेत्र से चुनकर आए भाजपा सांसद दिलीप सिंह भूरिया की मृत्यु के बाद यहां हुए उपचुनाव में कांगे्रस ने भाजपा से यह सीट छीन ली.

2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्र्रेस के द्बारा अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित विधानसभा क्षेत्रों में कांग्रेस के द्बारा अच्छा प्रदर्शन किए जाने के बाद अब कांग्रेस को लग रहा है कि वह लोकसभा चुनाव में भी इसे दोहराते हुए भी अनुसूचित जाति की सभी नहीं तो कम से कम आधी सीटों पर कब्जा कर लेगी. नवंबर 2018 में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित 47 सीटों में से 30 सीटे जीत कर शानदार प्रदर्शन किया था वहीं उसके द्बारा समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी ने भी जीत दर्ज कराई थी. वहीं भाजपा को मात्र 16 सीटों पर सफलता मिली थी.

2018 के विधानसभा चुनाव में संसदीय क्षेत्रों के हिसाब से भाजपा और कांग्रेस के प्रदर्शन को देखा जाए तो मंडला लोकसभा क्षेत्र के तहत आने वाली 8 सीटों में से कांग्रेस ने 6 पर विजय पाई थी, वहीं भाजपा को 2 पर ही संतोष करना पड़ा था. अब यहां कांग्रेस के कमल मरावी और भाजपा के फग्गन सिंह कुलस्ते के बीच सीधा मुकाबला है. शहडोल संसदीय क्षेत्र में 2018 के विधानसभा चुनाव में भाजपा और कांग्रेस ने 8 में से 4-4 विधानसभा क्षेत्रों पर विजय हासिल की थी. लोकसभा चुनाव में यहां मुकाबला कांग्रेस से भाजपा में गई हिमाद्री सिंह और भाजपा से कांग्रेस में गई प्रमिला सिंह के बीच है. 2018 के विधानसभा चुनाव में रतलाम झाबुआ संसदीय क्षेत्र के तहत 8 सीटों में से 5 पर कांग्रेस ने और 3 पर भाजपा ने जीत दर्ज कराई थी. लोकसभा चुनाव में भाजपा ने यहां उन जीएस डामोर को अपना प्रत्याशी बनाया है, जिन्होंने ने विधानसभा चुनाव में झाबुआ विधानसभा क्षेत्र से लोकसभा प्रत्याशी कांतिलाल भूरिया के बेटे विक्रांत भूरिया को पराजित कियाथा. डामोर राज्य सरकार के लोक स्वास्थ्य यांत्रिकीविभाग में वरिष्ठ अधिकारी रहे हैं वहीं कांग्र्रेस प्रत्याशी कांतिलाल भूरिया केन्द्र में मंत्री रहे हैं. यहां आदिवासी संगठन जयस ने अपने प्रत्याशी के तौर पर कमलेश डोंडियार को प्रत्याशी बनाया है, जिससे कांग्रेस परेशान है.

धार संसदीय क्षेत्र के तहत आने वाले 8 विधानसभा क्षेत्रों में से 6 पर कांग्रेस और 2 पर भाजपा ने पिछले विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज कराई थी. कांग्रेस ने यहां दिनेश गिरवाल को अपना प्रत्याशी बनाया है तो भाजपा ने अपनी वर्तमान सांसद सावित्री ठाकुर के स्थान पर छतरसिंंह दरबार को प्रत्याशी बनाया है. यहां जयस प्रत्याशी महेन्द्र कन्नोज मुकाबले को तिकोना बना रहे हैं. इससे कांग्रेस चिंतित है.

खरगोन लोकसभा क्षेत्र के तहत आने वाले 8 विधानसभा क्षेत्रों में से 6 पर कांग्रेस 1 पर भाजपा और पर निदर्लीय प्रत्याशी ने जीत दर्ज कराई थी. यहां भाजपा ने अपने मौजूदा सांसद सुभाष पटेल का टिकट काट कर गजेन्द्र पटेल प्रत्याशी बनाया है. वहीं कांग्रेस ने डा. गोविंद मुजाल्दा को प्रत्याशी बनाया है. पिछले विधानसभा चुनाव में बैतूल संसदीय क्षेत्र के तहत आने वाली 8 विधानसभा क्षेत्रों से कांग्रेस और भाजपा ने 4-4 सीटों पर जीत दर्ज कराई थी. यहां भाजपा ने अपनी वर्तमान सासंद ज्योति धुर्वे का टिकट काटकर दुर्गादास को प्रत्याशी बनाया है वहीं रामू टेमाक को अपना प्रत्याशी बनाया है.

गौरतलब है कि इसी सफलता से उत्साहित होकर कांग्रेस ने अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित क्षेत्रों के लिए विशेष रणनीति बनाई हैं. कांग्रेस अगर अपनी रणनीति में कामयाब हो जाती है तो उसके लिए एक बड़ी सफलता होगी.

मध्यप्रदेश में 21.1 प्रतिशत अजजा की आबादी

प्रदेश में अनुसूचित जनजाति के लोगों की संख्या वर्ष 2011 में हुए जनगणना के अनुसार 1,53,16,784 है, जो प्रदेश की कुल जनसंख्या का 21.1 प्रतिशत है.

जयस बन रहा है कांग्रेस की परेशानी

जय अदिवासी युवा संगठन (जयस) ने पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को समर्थन दिया था. कांग्रेस को विधानसभा चुनाव में इसका लाभ भी मिला. विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के टिकट से जयस के संयोजक डॉ. हीरालाल अलावा चुनाव भी जीत गए, लेकिन लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने जयस को कोई तबज्जो नही दी. जयस के प्रदेश अध्यक्ष अंतिम मुजाल्दा ने कहा कि कांग्रेस ने नवंबर 2018 के पिछले विधानसभा चुनावों के दौरान हमें इस्तेमाल करने के बाद हमारे साथ सरकार वादा खिलाफी की है. इसलिए हमने रतलाम और धार संसदीय क्षेत्र से अपने उम्मीदवार उतार दिए हैं. रतलाम से कमलेश डोंडियार और धार से महेन्द्र कन्नोज हमारे प्रत्याशी हैं. हम खरगोन और बैतूल से भी प्रत्याशी उतार रहे है. मुजाल्दा ने कहा, कांग्रेस की ओर से हमें सत्ता में भागीदारी का भरोसा दिलाया गया था. हमसे यह भी कहा गया था कि रतलाम, धार, खरगोन और बैतूल सीटों पर प्रत्याशी चयन के मामले में हमारी राय को तबज्जों दी जाएगी. लेकिन कांग्रेस ने हमसे कोई वादा नहीं निभाया और इन सीटों पर अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी.

अजजा सीटों पर मुकाबला

संख्या लोकसभा सीट    कांग्रेस    भाजपा

1.    शहडोल    प्र्रमिला सिंह    हिमाद्री सिंह

2.    मंडला    कमल मारावी    फग्गन सिंह कुलस्ते

3.    रतलाम    कांतिलाल भूरिया    जीएस डामोर

4.    धार    दिनेश गिरवाल    छतरसिंह दरबार

5.    खरगोन    डॉ. गोविंद मुजालदा गजेंद्र पटेल

6.    बैतूल    रामू टेकाम    दुर्गादास

टॅग्स :लोकसभा चुनावभारतीय जनता पार्टी (बीजेपी)कांग्रेस
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