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छात्रों ने 2022 के लिए बोर्ड परीक्षा को दो अवधि में बांटने के फैसले का स्वागत किया

By भाषा | Updated: July 6, 2021 20:11 IST

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नयी दिल्ली, छह जुलाई सीबीएसई के स्कूलों की कक्षा 10वीं और 12वीं के छात्रों ने महामारी के मद्देनजर शैक्षणिक अवधि को दो चरण में बांटने के बोर्ड के फैसले का मंगलवार को स्वागत करते हुए कहा कि यह ‘‘समय पर’’ उठाया गया कदम है जो उनके लिए ‘‘बड़ी राहत’’ लेकर आया है।

केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने कोविड-19 महामारी के मद्देनजर 10वीं और 12वीं की अगले साल की बोर्ड परीक्षा के लिए विशेष मूल्यांकन योजना की सोमवार को घोषणा की और शिक्षण सत्र को दो हिस्सों में बांट दिया। बोर्ड ने 2021-22 शिक्षण सत्र के पाठ्यक्रम को युक्तिसंगत बनाने और आंतरिक मूल्यांकन और प्रोजेक्ट आदि को अधिक ‘‘विश्वसनीय’’ और ‘वैध’ बनाने संबंधी योजना की भी घोषणा की। पहले टर्म (अवधि) की परीक्षा नवंबर-दिसंबर, 2021 में होगी जबकि दूसरे टर्म की परीक्षा मार्च-अप्रैल, 2022 में होगी।

हेरिटेज एक्सपीरेंशियल लर्निंग स्कूल की कक्षा 12वीं की छात्रा शिरोनिका जैन ने कहा, ‘‘सीबीएसई द्वारा साझा की गई मूल्यांकन योजना एक स्वागत योग्य कदम है। लेकिन, यह छात्रों पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है क्योंकि उन्हें कई परीक्षाओं की तैयारी करनी होगी। हालांकि, पाठ्यक्रम के 50 प्रतिशत विभाजन के साथ, यह बोझ को भी कम करेगा क्योंकि हमें एक ही बार में पूरा पाठ्यक्रम की तैयारी करने की जरूरत नहीं है।’’

सेठ आनंदराम जयपुरिया स्कूल, वसुंधरा, गाजियाबाद की कक्षा 12वीं की छात्रा सान्या गंजू के अनुसार महामारी के मद्देनजर सीबीएसई द्वारा किया गया यह निर्णय उचित है। उन्होंने कहा, ‘‘समय पर लिया गया यह फैसला प्रशंसनीय है क्योंकि छात्रों के पास अब तैयारी के लिए समय है। दबाव के बावजूद मुझे लगता है कि हम लोग अब अपने विषयों को विशेष रूप से एमसीक्यू और हायर ऑर्डर थिंकिंग स्किल्स (एचओटीएस) प्रारूप की मदद से अच्छे से पढ़ सकते हैं।’’

निर्मल भाटिया स्कूल के अजय का मानना ​​है कि नयी योजना विभिन्न विषयों में 50 से अधिक अध्यायों को पढ़ने के दौरान छात्र के दबाव को कम करती है और फिर अंत में एक परीक्षा में उसका मूल्यांकन किया जाएगा। उन्होंने कहा, ‘‘दो टर्म की परीक्षा का विचार बहुत अच्छा है और हम देख सकते हैं कि सरकार और सीबीएसई अंततः छात्रों की सुरक्षा को प्राथमिकता देना शुरू कर रहे हैं और उन पर पाठ्यक्रम और बोर्ड परीक्षा के दबाव और तनाव का बोझ नहीं डाल रहे हैं।’’

के आर मंगलम वर्ल्ड स्कूल, गुरुग्राम के छात्र यश हांडा ने सीबीएसई के फैसले को ‘‘बड़ी राहत’’ करार दिया।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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