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मायावती के बाद अखिलेश यादव का ऐलान, उपचुनाव लड़ेंगे अकेले, सपा-बसपा गठबंधन पर करेंगे मंथन

By रामदीप मिश्रा | Updated: June 4, 2019 12:35 IST

अखिलेश यादव में संवावदाताओं से बातचीत करते हुए कहा है कि उनकी पार्टी उत्तर प्रदेश में अकेले ही उपचुनाव लड़ेगी। जहां तक गठबंधन का सवाल है तो पार्टी का उपचुनाव के लिए कोई गठबंधन नही है। साथ ही साथ उन्होंने कहा कि अगर सपा-बसपा का गठबंधन टूट गया है तो पार्टी गहराई से विचार करेगी।     

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ठळक मुद्देबहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) और समाजवादी पार्टी (सपा) का गठबंधन टूटने के कगार पर पहुंचने लगा है। अखिलेश ने कहा कि अगर सपा-बसपा का गठबंधन टूट गया है तो पार्टी गहराई से विचार करेगी।     मायावती ने कहा कि उत्तर प्रदेश में होने वाले वाले उपचुनाव में वह अकेले ही मैदान में उतरेगी।

बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) और समाजवादी पार्टी (सपा) का गठबंधन टूटने के कगार पर पहुंचने लगा है। मंगलवार (4 जून) को बीएसपी सुप्रीमो के उत्तर प्रदेश में अकेले चुनाव लड़ने के फैसले के बाद सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भी उत्तर प्रदेश में अकेले ही चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया। हालांकि उन्होंने गठबंधन के टूटने को लेकर पार्टी में विचार-विमर्ष करने की बात कही है। 

अखिलेश यादव में संवावदाताओं से बातचीत करते हुए कहा है कि उनकी पार्टी उत्तर प्रदेश में अकेले ही उपचुनाव लड़ेगी। जहां तक गठबंधन का सवाल है तो पार्टी का उपचुनाव के लिए कोई गठबंधन नही है। साथ ही साथ उन्होंने कहा कि अगर सपा-बसपा का गठबंधन टूट गया है तो पार्टी गहराई से विचार करेगी।     

इससे पहले मायावती ने कहा कि उत्तर प्रदेश में होने वाले वाले उपचुनाव में वह अकेले ही मैदान में उतरेगी। इस चुनाव में एसपी से गठबंधन नहीं रहेगा। उनका कहना था कि लोकसभा चुनाव के बाद कहा कि सपा का वोट बीएसपी में गया है। ये बातें सोचने पर मजबूर करती हैं। यादव समाज के लोगों ने ही समाजवादी पार्टी को वोट नहीं दिया, ऐसे में उनसे बसपा के लिए उम्मीद करना ही बेकार है। 

मायावती ने कहा कि कन्नौज में डिंपल, बदायूं में धर्मेंद यादव और फिरोजाबार में अक्षय यादव की हार हमें सोचने पर मजबूर करती है। इनकी हार का हमें भी बहुत दुख है। साफ है कि इन यादव बाहुल्य सीटों पर भी यादव समाज का वोट एसपी को नहीं मिला। मायावती ने तीन जून को दिल्ली में हुई समीक्षा बैठक का जिक्र करते हुए कहा कि समीक्षा बैठक में पाया गया है कि जिस उद्देश्य के साथ समाजवादी पार्टी से गठबंधन किया गया था उसमें सफलता नहीं मिली है। 

गठबंधन की हार को लेकर कहा है कि समाजवादी पार्टी के लोगों को खुद में सुधार लाने की आवश्यकता है और बीएसपी कैडर की तरह बीजेपी की घोर जातिवादी, सांप्रदायिक व जनविरोधी नीतियों से प्रदेश व देश के लोगों को मुक्ति दिलाने की आवश्यकता है। इसका एक मौका समाजवादी पार्टी के लोगों ने गवां दिया है। लेकिन आगे इसी हिसाब से तैयारी करने की जरूरत है। 

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