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शिवसेना ने किया आगाह, महंगाई पर लगाम न लगाई तो जनता NDA सरकार के खिलाफ हो जाएगी

By लोकमत समाचार ब्यूरो | Updated: January 17, 2020 04:44 IST

देश में आम आदमी महंगाई की मार झेल रहा है, खासतौर से खुदरा क्षेत्र में. अगर केंद्र महंगाई बढ़ने से रोकने में नाकाम रहता है तो उसे आगाह रहना चाहिए कि लोग सरकार के खिलाफ हो जाएंगे. शिवसेना ने देश की वृद्धि दर के ''लगातार गिरने'' के लिए केंद्र की नीतियों को जिम्मेदार ठहराया.''

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ठळक मुद्देअगर महंगाई पर लगाम नहीं लगाई गई तो लोग एनडीए सरकार के खिलाफ हो जाएंगे.देश में आम आदमी महंगाई की मार झेल रहा है, खासतौर से खुदरा क्षेत्र में.

 शिवसेना ने जरूरी सामान के बढ़ते दामों को लेकर गुरुवार को केंद्र की आलोचना करते हुए कहा कि 2014 के लोकसभा चुनाव में जिन्होंने ''महंगाई डायन खाये जात है'' का प्रचार करके सत्ता हासिल की, उनके राज में यही ''महंगाई डायन'' फिर से आम जनता की गर्दन पर बैठ गई है.

उसने आगाह किया कि अगर महंगाई पर लगाम नहीं लगाई गई तो लोग एनडीए सरकार के खिलाफ हो जाएंगे. शिवसेना ने अपने मुखपत्र में कहा कि भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार संशोधित नागरिकता कानून जैसा विधेयक लाने में व्यस्त थी, जबकि सब्जियों, अन्य खाद्य सामग्रियों के बढ़ते दाम और नौकरियों की कमी जैसे मुद्दों पर वह चुप रही.

देश में आम आदमी महंगाई की मार झेल रहा है, खासतौर से खुदरा क्षेत्र में. अगर केंद्र महंगाई बढ़ने से रोकने में नाकाम रहता है तो उसे आगाह रहना चाहिए कि लोग सरकार के खिलाफ हो जाएंगे. शिवसेना ने देश की वृद्धि दर के ''लगातार गिरने'' के लिए केंद्र की नीतियों को जिम्मेदार ठहराया.''

उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली पार्टी ने कहा कि 'अच्छे दिन' जब आएंगे तब आएंगे, लेकिन इस महंगाई को देखते हुए आम जनता के जीवन में कम से कम पहले जो 'ठीक दिन' थे, वही ले आओ. उसने सीएए और राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) जैसे फैसलों को लेकर केंद्र की आलोचना की.

शिवसेना ने कहा कि सीएए और एनआरसी से देश में नौकरियां पैदा नहीं होने जा रहीं. नई नौकरियां पैदा करने की योजनाएं नहीं हैं, जबकि जो कुछ लोग अभी काम कर रहे हैं उन्हें भरोसा नहीं है कि उनकी नौकरी कब तक रहेगी. उसने तंज कसते हुए कहा, ''जो लोग ऐसे मुद्दों के खिलाफ आवाज उठाते हैं उन्हें 'भक्त' लोग 'देश विरोधी' ठहराने के लिए तैयार रहते हैं.''

शिवसेना ने कहा,'''सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी' नामक संस्थान ने कहा है कि 10 राज्यों में बेरोजगारी दर सबसे अधिक है. इनमें से छह राज्यों में भाजपा या उसके सहयोगी दलों की सरकार है. इस पर केंद्र की प्रतिक्रिया क्या है? केंद्र ने इन मुद्दों पर मौन धारण किया हुआ है.''

टॅग्स :नरेंद्र मोदीशिव सेनाभारतीय जनता पार्टी (बीजेपी)
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