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संस्कृत सभी भाषाओं की जननी, भारत को समझना है तो संस्कृत के बिना आप यह नहीं कर सकतेः भैया जी जोशी

By भाषा | Updated: February 10, 2020 17:37 IST

गुरुकुल व्यवस्था को पुनर्जीवित करने पर बल देते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह सुरेश भैया जी जोशी ने कहा, ‘‘हम आज के समय में आश्रम जैसी व्यवस्था के बारे में नहीं सोच सकते लेकिन जब हम गुरुकुल व्यवस्था की बात करते हैं तब शिक्षा संस्थान की प्राथमिकता होती है।’’

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ठळक मुद्देगुरुकुल शिक्षा पद्धति को पुनर्जीवित किया जाना चाहिए: संघ के सरकार्यवाह सुरेश भैया जी जोशीशिक्षा को व्यवसाय की बजाय मिशन के रूप में लेकर चलने वाले संस्थान होना समय की मांग है।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह सुरेश भैया जी जोशी ने कहा कि देश में शिक्षा की गुरुकुल व्यवस्था को पुनर्जीवित किया जाना चाहिए और कौन क्या कहेगा, इसकी चिंता किए बिना संस्कृत को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जाना चाहिए।

जोशी ने दोना पावला में एक कार्यक्रम में कहा कि केंद्र को शिक्षा व्यवस्था में सकारात्मक प्रयोग करने वालों को प्रोत्साहित करना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘संस्कृत प्रत्येक स्कूल में पढ़ाई जानी चाहिए। सरकार को इसके बारे में गंभीरता से चिंतन करना चाहिए। हमारा मानना है कि संस्कृत सभी भाषाओं की जननी है और यदि आपको भारत को समझना है तो संस्कृत के बिना आप यह नहीं कर सकते। इसीलिए कौन क्या कहेगा, इसकी चिंता किए बिना संस्कृत को उसका स्थान दिलाया जाना चाहिए।’’

गुरुकुल व्यवस्था को पुनर्जीवित करने पर बल देते हुए जोशी ने कहा, ‘‘हम आज के समय में आश्रम जैसी व्यवस्था के बारे में नहीं सोच सकते लेकिन जब हम गुरुकुल व्यवस्था की बात करते हैं तब शिक्षा संस्थान की प्राथमिकता होती है।’’ उन्होंने कहा कि शिक्षा को व्यवसाय की बजाय मिशन के रूप में लेकर चलने वाले संस्थान होना समय की मांग है। जोशी ने कहा कि देश ने ब्रिटिशकालीन शिक्षा पद्धति अपना ली थी जिसमें सभी शैक्षणिक संस्थानों को सरकार द्वारा निर्धारित नीतियों का पालन करना होता है लेकिन आवश्यकता इसकी है कि सरकार शैक्षणिक नीतियों में बदलाव की अनुमति प्रदान करे। उन्होंने कहा, ‘‘कुछ संस्थान हैं जिन्होंने अपनी नीतियां अपनाई हैं और उन्हें सफलतापूर्वक लागू किया है। मुझे लगता है कि जिन्होंने शैक्षणिक व्यवस्था में सकारात्मक प्रयोग किए हैं, उन्हें प्रोत्साहन मिलना चाहिए।’’ भाषा यश नेत्रपाल नेत्रपाल

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