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केले के रेशे से बने सेनेटरी नैपकिन को 120 बार किया जा सकता है इस्तेमाल, जानें कीमत

By लोकमत समाचार ब्यूरो | Updated: August 21, 2019 08:37 IST

आईआईटी दिल्ली के प्रोफेसरों की सहायता से 'सैनफे' द्वारा विकसित दो नैपकिन की कीमत 199 रुपए रखी गई है. टीम ने इस उत्पाद के लिए पेटेंट का आवेदन जमा कराया है.

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ठळक मुद्देकेले के रेशे से बनाए गए नेप्किन को दो वर्षों तक चलाया जा सकता हैसैनफे' द्वारा विकसित दो नैपकिन की कीमत 199 रुपए रखी गई है.

आईआईटी दिल्ली से जुड़े एक स्टार्टअप ने पहली दफा 120 बार इस्तेमाल में लाए जा सकने वाले सेनेटरी नैपकिन की पेशकश की है, जिसे समग्र केले के रेशे से बनाया गया है. इस प्रकार इसे दो वर्षों तक चल सकता है और इसे लगभग 120 बार पुन: उपयोग में लाया जा सकता है.

आईआईटी दिल्ली के प्रोफेसरों की सहायता से 'सैनफे' द्वारा विकसित दो नैपकिन की कीमत 199 रुपए रखी गई है. टीम ने इस उत्पाद के लिए पेटेंट का आवेदन जमा कराया है. स्टार्टअप के संस्थापकों में से एक अर्चित अग्रवाल ने कहा, ''अधिकांश सैनिटरी नैपकिन सिंथेटिक सामग्री और प्लास्टिक से बने होते हैं, जिन्हें सड़ने में 50-60 वर्ष से ज्यादा वक्त लग सकते हैं.

मासिक धर्म के समय इस्तेमाल किए जाने वाले इन नैपकिन को कूड़ेदान, खुले स्थान या और जल में फेंक दिया जाता है, जला दिया जाता है या मिट्टी में दबा दिया है या फिर शौचालयों में बहा दिया जाता है.''

उन्होंने कहा, ''ये निपटान तकनीकें पर्यावरण के लिए खतरा पैदा करती हैं. उदाहरण के लिए, जलने से डाइऑक्सिन के रूप में कार्सिनोजेनिक धुएं का उत्सर्जन होता है, जिससे वायु प्रदूषण का खतरा पैदा होता है.

इस कचरे को लैंडफिल में डालने से केवल कचरे का बोझ बढ़ता है.'' अग्रवाल ने हैरी सेहरावत के साथ अपने स्टार्टअप की स्थापना उस समय की थी, जब वे भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, दिल्ली में बीटेक कर रहे थे.

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