देहरादून: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने रविवार को कहा कि संघ एक सशक्त समाज और राष्ट्र के निर्माण के लिए व्यक्ति निर्माण की दिशा में काम कर रहा है। संघ के 100 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में यहां ‘संघ यात्रा- नये क्षितिज, नये आयाम’ विषय पर आयोजित एक जनगोष्ठी एवं संवाद कार्यक्रम में भागवत ने यह बात कही। उन्होंने कहा, ‘‘संघ का उद्देश्य व्यक्ति निर्माण है, क्योंकि सशक्त व्यक्ति से ही सशक्त समाज और राष्ट्र का निर्माण होता है। संघ की किसी संगठन से प्रतिस्पर्धा नहीं है, अगर राष्ट्र सशक्त होगा तो राष्ट्रवासी भी सशक्त होंगे। यदि राष्ट्र दुर्बल होगा तो व्यक्ति अपने ही देश में सुरक्षित नहीं रह पाएगा।’’ भागवत ने कहा कि बाहर से देखकर संघ की वास्तविकता को नहीं समझा जा सकता। उन्होंने कहा कि पथ संचालन देखकर कुछ लोग संघ को अर्धसैनिक संगठन समझ लेते हैं।
राष्ट्रप्रेम के गीत सुनकर संगीत मंडली मान लेते हैं, सेवा कार्य देखकर सेवा क्षेत्र का संगठन समझ लेते हैं किंतु संघ इन सीमाओं से परे एक व्यापक सामाजिक शक्ति है। इस संबंध में उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे चीनी की मिठास को जानने के लिए उसे चखना पड़ता है, वैसे ही संघ को समझने के लिए उसके कार्य में आना आवश्यक है।
भागवत ने कहा कि एक लंबी ऐतिहासिक यात्रा के पश्चात आज विश्व भारत को पुनः नेतृत्वकारी भूमिका में देखने की आशा कर रहा है । उन्होंने उपस्थित जनसमूह से संघ की गतिविधियों से जुड़कर समाज और राष्ट्र को सशक्त बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जो जोड़ने का कार्य करे, वही हिंदू है। उन्होंने कहा, ‘‘ मातृभूमि के प्रति भक्ति अनिवार्य है।
विश्व सत्य से अधिक शक्ति को समझता है, इसलिए शक्ति अर्जित करना आवश्यक है, किंतु उसका उपयोग मर्यादित होना चाहिए।’’ महिलाओं की भूमिका के बारे में भागवत ने कहा कि महिलाएं पूर्णतः स्वतंत्र हैं और देश संचालन में उनकी भागीदारी 33 प्रतिशत तक सीमित न होकर 50 प्रतिशत तक होनी चाहिए।