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हार पर नहीं, लड़ाई के संघर्षों को दिखाते हुए दोबारा लिखा जाना चाहिए इतिहास: समीक्षा समिति के सदस्य

By विशाल कुमार | Updated: October 14, 2021 09:55 IST

राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा को संशोधित करने के लिए केंद्र द्वारा स्थापित समिति के सदस्य गोविंद प्रसाद शर्मा ने कहा है कि आज जो इतिहास पढ़ाया जाता है, वह हम यहां हार गए, हम वहां हार गए है. लेकिन हमें संघर्षों पर चर्चा करने की जरूरत है, लड़ाई के दौरान विदेशी आक्रमणकारियों के खिलाफ बहादुरी से लड़े. हम उस पर पर्याप्त प्रकाश नहीं डालते हैं.

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ठळक मुद्देकेंद्र ने राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा संशोधित करने के लिए के. कस्तूरीरंगन के नेतृत्व वाली समिति गठित की है.यह स्कूल पाठ्यक्रम और पाठ्यपुस्तकों के लिए व्यापक दिशानिर्देश निर्धारित करेगा.नेशनल बुक ट्रस्ट के अध्यक्ष गोविंद प्रसाद शर्मा इसके सदस्य हैं.

नई दिल्ली: नेशनल बुक ट्रस्ट के अध्यक्ष गोविंद प्रसाद शर्मा ने कहा है कि स्कूलों में मौजूदा पाठ्यक्रम हार पर बहुत अधिक जोर देता है, इसलिए नए तथ्यों को देखते हुए इतिहास को फिर से लिखा जाना चाहिए और पाठ्यपुस्तकों में महाराणा प्रताप जैसे शासकों की विदेशी आक्रमणकारियों के खिलाफ लड़ाई की भावना के बारे में बात करनी चाहिए.

शर्मा राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा को संशोधित करने के लिए 21 सितंबर को केंद्र द्वारा स्थापित के. कस्तूरीरंगन के नेतृत्व वाली समिति के सदस्य हैं, जो स्कूल पाठ्यक्रम और पाठ्यपुस्तकों के लिए व्यापक दिशानिर्देश निर्धारित करेगा.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, शर्मा ने कहा कि आज जो इतिहास पढ़ाया जाता है, वह हम यहां हार गए, हम वहां हार गए है. लेकिन हमें संघर्षों पर चर्चा करने की जरूरत है, लड़ाई के दौरान विदेशी आक्रमणकारियों के खिलाफ बहादुरी से लड़े. हम उस पर पर्याप्त प्रकाश नहीं डालते हैं.

तथ्य यह है कि इतनी सारी लड़ाइयां केवल इसलिए हुईं क्योंकि उन्होंने इतना मजबूत विरोध किया. उदाहरण के लिए, एक कथा बनाई गई है कि (मुगल सम्राट) अकबर ने महाराणा प्रताप को हराया था जबकि तथ्य यह है कि दोनों में कभी आमने-सामने लड़ाई नहीं हुई थी.

नए तथ्यों को देखते हुए में इतिहास को फिर से लिखा जाना चाहिए. या हम यह भी कह सकते हैं कि पाठ्यपुस्तकों में नए तथ्यों को शामिल किया जाना चाहिए. संशोधित पाठ्यक्रम को सामाजिक सद्भाव और राष्ट्रीय गौरव को विकसित करने में भी मदद करनी चाहिए,

शर्मा आरएसएस के विद्या भारती के पूर्व अध्यक्ष हैं, जो पूरे भारत में स्कूलों की एक श्रृंखला चलाता है और निकाय के केंद्रीय कार्यकारी सदस्य बने हुए हैं. शर्मा इससे पहले मध्य प्रदेश सरकार की पाठ्यपुस्तक लेखन स्थायी समिति के अध्यक्ष रह चुके हैं.

राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 में कहा गया है कि प्राचीन भारतीय ज्ञान को जहां भी प्रासंगिक हो, पूरे स्कूली पाठ्यक्रम में सटीक और वैज्ञानिक तरीके से शामिल किया जाएगा.

एनसीएफ को आखिरी बार 2005 में यूपीए सरकार के तहत तैयार किया गया था और इससे पहले, इसे 1975, 1988 और 2000 में संशोधित किया गया था.

मंगलवार को एनसीएफ का मसौदा तैयार करने वाली 12 सदस्यीय समिति की पहली बैठक हुई, जिसमें स्कूल शिक्षा सचिव अनीता करवाल भी शामिल हुईं. बैठक में राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 के प्रावधानों पर चर्चा हुई.

टॅग्स :हिस्ट्रीEducation Reform Committeesएजुकेशन
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