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प्रधानमंत्री गरीब अन्न योजना को लेकर रामविलास पासवान ने केजरीवाल और ममता सरकार पर लगाया बड़ा आरोप

By गुणातीत ओझा | Updated: May 30, 2020 06:15 IST

केंद्रीय खाद्य मंत्री रामविलास पासवान ने शुक्रवार को कहा कि दिल्ली और पश्चिम बंगाल की सरकारों को अभी तक प्रधानमंत्री गरीब अन्न योजना (पीएमजीएवाई) के तहत मई महीने के लिए राशन कार्ड धारकों को पांच किलोग्राम मुफ्त खाद्यान्न वितरित करना बाकी है जबकि अन्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने खाद्यान्नों को पूरी तरह या आंशिक रूप से वितरित कर दिया है।

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ठळक मुद्देकोई गरीब भूखा न रहे, केंद्र ने अप्रैल-जून के लिए प्रति व्यक्ति प्रति माह 5 किलोग्राम चावल या गेहूं और प्रति परिवार एक किलोग्राम दाल मुफ्त में आवंटित करने की केंद्र ने घोषणा की है।यह कार्यक्रम कोविड-19 के चलते लागू पाबंदियों से प्रभावित लोगों की मदद के लिए घोषित 20 लाख करोड़ रुपये के आर्थिक पैकेज का हिस्सा है।

नई दिल्ली। केंद्रीय खाद्य मंत्री रामविलास पासवान ने शुक्रवार को कहा कि दिल्ली और पश्चिम बंगाल की सरकारों को अभी तक प्रधानमंत्री गरीब अन्न योजना (पीएमजीएवाई) के तहत मई महीने के लिए राशन कार्ड धारकों को पांच किलोग्राम मुफ्त खाद्यान्न वितरित करना बाकी है जबकि अन्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने खाद्यान्नों को पूरी तरह या आंशिक रूप से वितरित कर दिया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, मध्यप्रदेश, पंजाब, महाराष्ट्र, हिमाचल प्रदेश, गुजरात, केरल और मणिपुर जैसे राज्यों में अभी भी कई लाभार्थी मई महीने के कोटे की प्रतीक्षा कर रहे हैं, जहां 80 प्रतिशत तक ही खाद्यान्न वितरण काम किया गया है। पीएमजीएवाई के तहत प्रति परिवार एक किलो मुफ्त दालों के वितरण के बारे में, पासवान ने कहा कि राज्यों ने 1.68 लाख टन दालों का उठाव किया है और लाभार्थियों को अभी भी महीनेवार वितरण के प्रावधान नहीं किये है।

इस संबंध में प्रगति रिपोर्ट का इंतजार है। यह सुनिश्चित करने के लिए कि कोई गरीब भूखा न रहे, केंद्र ने अप्रैल-जून के लिए प्रति व्यक्ति प्रति माह 5 किलोग्राम चावल या गेहूं और प्रति परिवार एक किलोग्राम दाल मुफ्त में आवंटित करने की केंद्र ने घोषणा की है। यह कार्यक्रम कोविड-19 के चलते लागू पाबंदियों से प्रभावित लोगों की मदद के लिए घोषित 20 लाख करोड़ रुपये के आर्थिक पैकेज का हिस्सा है। पासवान ने डिजिटल प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, ‘‘दिल्ली और पश्चिम बंगाल ने पीएमजीएवाई के तहत अप्रैल महीने का राशन का कोटा वितरित किया हैं। दिल्ली ने अप्रैल में 96 प्रतिशत कोटे का वितरण किया और पश्चिम बंगाल ने 93 प्रतिशत कोटा का राशन बांटा। लेकिन मई के महीने में दोनों राज्यों ने शून्य आवंटन किया है।’’

उन्होंने कहा, 'हमने इस मुद्दे पर दिल्ली और पश्चिम बंगाल सरकारों को कई पत्र लिखे हैं।' नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, अरुणाचल प्रदेश और नागालैंड ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के माध्यम से राशन कार्ड धारकों को मई महीने का कोटा पूरी तरह से वितरित किया है। आंध्र प्रदेश, असम, तेलंगाना, त्रिपुरा, उत्तराखंड, जम्मू और कश्मीर, झारखंड, कर्नाटक, मेघालय, ओडिशा और राजस्थान जैसे एक दर्जन से अधिक राज्यों / केंद्रशासित प्रदेशों ने चालू महीने में अनाज का 90 प्रतिशत से अधिक वितरण करने का काम पूरा कर लिया है। पीएमजीएवाई के तहत 81 करोड़ राशन कार्ड धारकों को दिया जाने वाला मुफ्त कोटा राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून (एनएफएसए) के तहत वितरित सब्सिडी वाले अनाज से अलावा और अधिक है।

पीएमजीएवाई के तहत दालों के वितरण पर, पासवान ने कहा कि उनके मंत्रालय ने महीने-वार वितरण कका आंकड़ा प्राप्त नहीं किया है, लेकिन राज्यों ने लाभार्थियों को अब तक 1.68 लाख टन दाल वितरण की सूचना दी है। उन्होंने कहा कि अब तक केंद्र सरकार द्वारा भेजी गई कुल 4.7 लाख टन दाल में से लगभग 3.70 लाख टन दालें राज्यों में पहुंच गई हैं। पश्चिम बंगाल को छोड़कर, अन्य राज्यों ने वितरण के लिए दाल को या तो पूरी तरह से या आंशिक रूप से उठा लिया है। खराब गुणवत्ता वाले दालों के वितरण के बारे में एक रिपोर्ट पर, मंत्री ने कहा कि सरकार को शुरू में दिल्ली और झारखंड से गुणवत्ता के बारे में शिकायत मिली थी। हालांकि, वहां दालों को बदल दिया गया है। अब, किसी भी राज्य से ऐसी कोई शिकायत नहीं है।

पासवान ने कहा, ‘‘हम कच्ची दालों की मिलिंग में देरी को बर्दाश्त कर सकते हैं लेकिन खराब गुणवत्ता को नहीं। इस मुद्दे पर ध्यान दिया गया है। इस संबंध में एक मानक संचालन प्रक्रिया जारी की गई है।’’ पासवान ने यह भी उल्लेख किया कि सरकार के पास देश में गरीब लोगों को खिलाने के लिए पर्याप्त स्टॉक है और राज्य सरकारों से इस कोविड-19 संकट के दौरान पीएमजीएवाई के तहत मुफ्त खाद्यान्न का समय पर वितरण सुनिश्चित करने की अपील की। मौजूदा समय में, सरकारी उपक्रम, भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के पास 7.63 करोड़ टन से अधिक खाद्यान्न का स्टॉक है, जो पीडीएस और अन्य कल्याणकारी योजनाओं के तहत आवंटित की जाने वाली मात्रा की मासिक आवश्यकता से बहुत अधिक है।

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