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आम चुनाव की खास कहानियाँ: जब अटल बिहारी के खिलाफ चुनाव लड़ रहे राज बब्बर ने छू लिए उनके पांव

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: April 19, 2019 17:13 IST

बीजेपी के संस्थापक अटल बिहारी वाजपेयी उत्तर प्रदेश के लखनऊ से लोकसभा चुनाव लड़ रहे थे। अटल बिहारी मूलतः मध्यप्रदेश के रहने वाले थे। देश को सबसे ज्यादा प्रधानमंत्री देने वाले सूबे से अटल के खिलाफ समाजवादी पार्टी ने अभिनेता से नेता बने राज बब्बर को मैदान में उतारा था।

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अमन गुप्ता

साल था 1996. आम चुनाव में समाजवादी पार्टी ने लखनऊ से अटल बिहारी के खिलाफ राज बब्बर को उतारा था. राज बब्बर का ये पहला लोकसभा चुनाव था और वो भी एक दिग्गज नेता के सामने.

राज बब्बर  खुद भी जानते थे कि अटल बिहारी के सामने चुनाव जीतना लगभग नामुमकिन था. उनके मन में दुविधा में भी थी लेकिन निर्णय पार्टी ने लिया था. शायद यही वजह रही कि बे बिल्कुल आखिरी समय में चुनावी मैदान में उतरे. अब चुनाव में विपक्षी नेता और दलों पर आरोप प्रत्यारोप का दौर तो चलता ही है लेकिन राज बब्बर ने अटल बिहारी के खिलाफ एक शब्द नहीं कहा बल्कि उनके पैर छूकर आशीर्वाद लिया था.

अटल जी के खिलाफ लखनऊ सीट से पर्चा भरने के बाद राज बब्बर लखनऊ से दिल्ली जा रहे थे. जिस फ्लाइट में राज बब्बर थे उसी में अटल बिहारी बाजपेयी भी सफर कर रहे थे. राज बब्बर ने जब अटल जी को देखा तो उनके पैर छुए और हाथ जोड़कर खड़े हो गए.

राज बब्बर ने उनसे कहा, 'मुझे आशीर्वाद दीजिए, ये आशीर्वाद इसलिए मांग रहा हूं कि कहीं गलती से कोई ऐसा शब्द न निकल जाए जो आपकी शान में गुस्ताखी हो। बचपन में कभी जिनका भाषण सुनने जाया करता था, अब उनके खिलाफ ही चुनाव के मैदान में उतरना है।'

राज बब्बर की बातें सुनकर अटल बिहारी बाजपेयी मुस्कराते हुए बोले कि ऐसा कुछ नहीं होगा क्योंकि तुम्हारे अंदर संस्कार हैं।

फिर चुनावी रैलियों का भी दौर आया लेकिन राज बब्बर के मुंह से अटल जी के खिलाफ एक शब्द नहीं निकला. अटल जी भले ही मुस्कराते हुए हल्की-फुल्की एकाध टिप्पणी करते हुए निकल जाते थे लेकिन राज बब्बर ने उनके सम्मान की लाज बनाए रखी. इस बीच राज बब्बर की उनसे कई बार मुलाकात हुई और वे एक दूसरे का हाल-चाल भी पूछते थे. खैर चुनाव हुए और जब नतीजे आए तो वही हुआ जिसका अंदेशा था. राज बब्बर चुनाव हार गए. उन्हें 37 फीसदी वोट मिले जबकि अटल जी को 52 फीसदी.

अटल बिहारी इससे पिछला 1991 का चुनाव भी लखनऊ सीट से जीते थे. तब से 2004 तक लगातार वे इसी सीट पर बने रहे.  16 दिसंबर 2018 को जब अटल जी का निधन हुआ तो राज बब्बर ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए कहा था कि अटल जी देश के ऐसे नेताओं में से एक हैं, जो विचारधारा से अलग होते हुए भी गांधी जी और नेहरू जी के समावेशी समाज की परिकल्पना के पक्षधर रहे। यही कारण रहा कि दल और विचारधारा से अलग सारे समाज के लोग, सारी पार्टियों के लोग उनकी इज्जत करते थे। 

टॅग्स :लोकसभा चुनावअटल बिहारी वाजपेयीराज बब्बरसमाजवादी पार्टीकांग्रेस
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