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भारत के उपग्रह नौवहन क्षेत्र में उच्च विकास के लिए नीतिगत स्तर पर गति की देने की तैयारी

By भाषा | Updated: August 1, 2021 15:58 IST

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बेंगलुरु, एक अगस्त भारत का उपग्रह आधारित नौवहन सेवा क्षेत्र एक प्रस्तावित नीतिगत पहल के जरिए तेजी से विकास करने की ओर बढ़ता दिख रहा है क्योंकि इसमें इस तरह की प्रणाली के विकास, संचालन और रखरखाव पर जोर दिया गया है।

अंतरिक्ष विभाग (डीओएस) की योजना उपग्रह आधारित नौवहन के लिए ‘‘ विस्तृत और मूलभूत’ राष्ट्रीय नीति - भारतीय उपग्रह नौवहन नीति-2021 (सैटनेव पॉलिसी-2021) बनाने की है।

इस नीति के मसौदे को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की वेबसाइट पर परामर्श के लिए जारी किया गया है, जिसके बाद इसे केंद्रीय मंत्रिमंडल के समक्ष अंतिम मंजूरी के लिए रखा जाएगा।

इसमें ‘उपग्रह आधारित नौवहन और संबंधित संवर्धन सेवाओं में आत्मनिर्भतरता हासिल करने का लक्ष्य रखा गया है और साथ ही सेवा की गुणवत्ता युक्त उपलब्धता को सुनिश्चित करने, इस्तेमाल बढ़ाने, सेवा के विकास और अनुसंधान को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया गया है।’’

इसमें रेखांकित किया गया है कि गत कुछ दशकों में ऐसे कई एप्लिकेशन का विकास हुआ है जो स्थिति, गति और समय (पीवीटी) सेवा पर निर्भर हैं और जिसे अंतरिक्ष आधारित नौवहन प्रणाली मुहैया कराती है।

सूचना और मोबाइल फोन प्रौद्योगिकी के आने के बाद करोड़ भारतीय उपयोगकर्ता एकतरह से दैनिक जीवन के लगभग सभी कार्यों के लिए पीवीटी आधारित एप्लिकेशन पर निर्भर हैं।

वैश्विक नौवहन उपग्रह प्रणाली (जीएनएसएस) अंतरिक्ष आधारित नौवहन प्रणाली है जो पूरी दुनिया में नौवहन सेवाएं मुहैया कराते हैं। इस समय चार जीएनएसएस- अमेरिका का जीपीएस, रूस का ग्लोनास, यूरोपीय संघ का गैलीलियो और चीन का बाइदो- वैश्विक स्तर पर पीवीटी सेवा मुहैया कराते हैं। इनके अलावा दो क्षेत्रीय नौवहन उपग्रहण प्रणाली- भारत का नाविक और जापान का क्यूजेडएसएस- है जो सीमित क्षेत्र में नौवहन सुविधा प्रदान करते है।

मसौदा नीति में कहा गया कि ऐसी सुरक्षित सेवा की विशेष तौर पर जरूरत भारतीय रणनीतिक समुदाय को है। इसलिए भारत सरकार ने भरोसेमंद और स्वतंत्र प्रणाली- नेविगेशन विथ इंडियन कांस्टलेशन (नाविक) की स्थापना की जिसपर उसका पूर्ण रूप से नियंत्रण है।

मसौदा में कहा गया कि भारत सरकार ने भारतीय हवाई क्षेत्र के लिए जीपीएस सहायता प्राप्त भू संवर्धित नौवहन (गगन) की स्थापना की है।

मसौदा में कहा गया कि भारत सरकार की ‘आत्मनिर्भर’ पहल की मजबूती के लिए यह जरूरी है कि यह सुनिश्चित किया जाए कि नाविक और गगन की सेवा सुचारु रूप से जारी रहे, प्रौद्योगिकी के स्तर पर तेजी से हो रहे विकास के लिए प्रणाली को अद्यतन करने और इनके परिचालन की क्षमता बनाए रखने की जरूरत है।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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