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राजधानी दिल्ली में मंहगी हुई बिजली, बिजली खरीद समायोजन लागत (PPAC) में हुई बढ़ोत्तरी

By शिवेंद्र राय | Updated: July 11, 2022 11:25 IST

बिजली वितरण कंपनियों द्वारा ग्राहकों पर लगाए जाने वाले बिजली खरीद समायोजन लागत (पीपीएसी) में चार फीसदी की बढ़ोतरी की वजह से दिल्ली में बिजली महंगी हो गई है। दिल्ली भाजपा ने इसे केजरीवाल सरकार का जनविरोधी फैसला बताते हुए विरोध किया है।

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ठळक मुद्देबिजली खरीद समायोजन लागत (PPAC) में चार फीसदी की वृद्धिकोयले और गैस की कीमतों में इजाफे का सीधा असर बिजली उत्पादन की लागत परग्राहकों पर पड़ेगी मंहगाई की मार

दिल्ली: राजधानी दिल्ली में जनता पर मंहगाई की एक और मार पड़ने वाली है। राजधानी दिल्ली की बिजली वितरण कंपनियों ने बिजली खरीद समायोजन लागत (PPAC) में चार प्रतिशत की बढ़ोत्तरी कर दी है। नया नियम जून के मध्य से लागू किया जाएगा।  बिजली खरीद समायोजन लागत में वृद्धि का सीधा असर ग्राहकों पर पड़ेगा। यानी कि बिल में बढ़ोत्तरी होना तय है।

क्या होता है  बिजली खरीद समायोजन लागत (PPAC)

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि बिजली खरीद समायोजन लागत (PPAC) एक तरह का अधिभार है, जो बिजली कंपनियों को बाजार संचालित ईंधन की लागत में परिवर्तन होने पर क्षतिपूर्ति के लिए लिया जाता है।

क्यों बढ़ी हैं कीमतें

अंतराराष्ट्रीय बाजार में कोयले और गैस की कीमतों में इजाफे का सीधा असर बिजली उत्पादन की लागत पर पड़ा है। PPAC की कीमतों में फिलहाल की गई बढ़ोतरी इंपोर्ट किए जाने वाले कोयले के सम्मिश्रण, गैस की कीमतों में वृद्धि और बिजली एक्सचेंज में कीमतें बढ़ने पर आधारित हैं।

भाजपा ने किया विरोध

दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी के विधायक और विधानसभा में विपक्ष के नेता रामवीर सिंह बिधूड़ी ने अरविंद केजरीवाल सरकार से बिजली खरीद समायोजन लागत में बढ़ोत्तरी के फैसले को वापस लेने को कहा है। रामवीर सिंह बिधूड़ी ने दिल्ली सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि पीपीएसी के नाम पर केजरीवील सरकार जनता पर मंहगाई का बोझ बढ़ा रही है। बिधूड़ी ने कहा कि ये ये कीमते पिछले दरवाजे से बढाई गई हैं।

नेता प्रतिपक्ष रामवीर सिंह बिधूड़ी ने ये भी दावा किया कि दिल्ली में बिजली की दरें पूरे देश में सबसे ज्यादा हैं। बिधूड़ी के मुताबिक दिल्ली के घरेलू उपभोक्ताओं को करीब 8 रु. प्रति यूनिट और वाणिज्यिक उपभोक्ताओं को 14 रु. तक का भुगतान करना पड़ता है। बता दें कि बिजली वितरण कंपनियों (Discoms) के अधिकारियों के मुताबिक 2002 के बाद दिल्ली डिस्कॉम के लिए बिजली खरीद की लागत में करीब 300 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।  इस पर डिस्कॉम का कोई नियंत्रण नही है। 

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